Satsang, Tatvik Satsang

अहम् के मूल में आसक्त हो जाओ – आशारामजी बापू की तात्विक अमृतवाणी

 

aham k mool me asakt ho jao

बार बार जो चीज़ अच्छी लगती है, उसको बोलते हैं आसक्ति ! इसलिए भगवन जी कहते हैं अगर जीव मुझमें आसक्त हो जायेगा, तो उसका कल्याण हो जायेगा ! ये पंचभौतिक शारीर तुम नहीं हो, तुम शुद्ध, बुद्ध चैतन्य हो, इन पञ्च भूतों में भी तुम ही हो !

माँ में करुणा और पिता में अनुशासन उसी परमात्मा का है ! अगर कोई अहंकारी है तो भगवन का अहंकार का अंश उसमे मिला हुआ है ! अगर कोई क्रोधित हो तो कहते हैं कि नृसिंह भगवन का अंश है, अगर कोई प्रेम दिखाए तो भगवन कृष्ण का अंश है ! पर है तो सबमे उसी परमात्मा का ही अंश !

aham k mool me asakt ho jao1

भगवन श्री कृष्ण कहते हैं अर्जुन से, हे पार्थ ! अनन्य प्रेम से मुझमें जो आसक्त होता है और शंशय रूप से मुझे जानेगा, उसी का उद्धार होगा !

 

 

Advertisements
Standard

Your Opinion

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s