सनातन संस्कृति, Hanuman Jayanti, Mangalmay Channel

वायु तत्व के प्रतीक हैं हनुमानजी

hanuman jayanti-Tvmehm soham

जन्म मृत्यु के बीच में जीवन नामक महत्वपूर्ण घटना घटती है। जन्म तो जानवरों का भी होता है, लेकिन उनमें जीवन नहीं घटता। यह संभावना सिर्फ मनुष्य में है। जन्म को जीवन में बदलने का एक उदाहरण हनुमानजी का है। कई लोग पूछते हैं कि हनुमानजी मनुष्य हैं या बंदर। कोई उन्हें मानने को तैयार नहीं है तो कोई उन्हें लेकर अनुभूति के कई प्रसंग सुना सकता है। कहीं वे सेवा के प्रतिमान हैं तो कहीं जीवन प्रबंधन गुरु। उन्हें वानर कहा गया है, अर्थात् वन में रहने वाले नर। इसलिए वे मनुष्य की श्रेष्ठतम स्थिति का प्रतीक हैं। वे पशु की दिव्यता को भी झलकाते हैं।

हिंदू धर्म ने प्रकृति और प्राणी को बड़े वैज्ञानिक ढंग से जोड़ा है। पंचतत्व की कल्पना इसी का प्रमाण है। पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश और मनुष्य का शरीर, सब संयुक्त हैं। हनुमानजी वायु तत्व के प्रतीक हैं। ये सब अपना-अपना हिस्सा हमें दे रहे हैं। हम ठीक से लेना न जानते हों, यह अलग बात है। हनुमान साधना का अर्थ ही यह है कि प्रकृति में वायु तत्व से उसका श्रेष्ठ ग्रहण कर लेें। इसलिए प्राणायाम के साथ श्री हनुमान चालीसा को किया जाए। सांस लेने के साथ यदि हनुमत तत्व यानी वायु तत्व से जुड़ जाएं, तो हमारे शरीर में जो जीवन के केंद्र हैं वे जाग्रत हो जाएंगे।

यह बड़ी निजी अनुभूति होगी। इसलिए हनुमान जयंती के दिन खूब पूजा-पाठ, कर्मकांड करें, लेकिन कुछ समय श्री हनुमान चालीसा की एक चौपाई सांस के साथ भीतर और दूसरी चौपाई सांस के साथ बाहर निकालें। ऐसा करने से आप हनुमानजी को बिल्कुल अपने निकट पाएंगे। यहाँ निकट पाने का अर्थ है कि जो भी दुःख, बाधाएं, कष्ट आते हैं या जीवन में आयेंगे, उनसे निपटने के लिए आपको शक्ति मिलेगी, आपकी निष्ठा दृड़ होगी और इस प्रकार आप राम भक्त हनुमान को तो अपने निकट पाएंगे ही, और जहाँ हनुमान, वहां राम, या जहाँ राम, वहां हनुमान !

तभी तो एक सुन्दर भजन भी गाया गया है कि दुनिया चले न श्री राम के बिना, श्री राम न चलें हनुमान के बिना !

इसलिए अपनी सभी चिंताएं, सभी दुःख, दर्द, कष्ट उनके चरणों में अर्पित करके आगे बढें और जीवन को दिव्या और रसमय बनाएं ! पूज्य गुरुदेव आशाराम बापू भी अक्सर अपने सुवचनों में यही सन्देश देते हैं कि ये शारीर जड़ है जो पञ्च महाभूतों से बना है, जिसका एक अंश वायु भी है और इस शरीर के अंत हो जाने पर पांचो भूत अपने-अपने उद्गम में विलय हो जाते हैं ! और जब गुरुदेव ये बताते हैं कि “अब मोहिं भा भरोसो हनुमंता, बिनु हरी कृपा मिले नहीं संता” ये सुनकर तो मानो आँखें ही खुल जाती हैं और ईश्वर को धन्यवाद किये बिना रहा नहीं जाता कि उन्होंने इसी जन्म में ऐसे सद्गुरु दे दिए जिन्होंने जीते जी जीवन नैया से पार होने का मार्ग दिखा दिया, नरकों की वैतरणी नदी को कैसे पार करना है, उसकी युक्ति सिखा दी, और ब्रह्मज्ञान के रस में सराबोर कर दिया !

धन्य हुए हम जो ऐसी भारतीय संस्कृति में जन्मे और ऐसे हिन्दू धर्म के संस्कारों से हमारा सिंचन हुआ, जहाँ प्रभु श्री राम, राम भक्त हनुमान और परम पूजनीय आशाराम बापूजी जैसी दिव्य आत्माएं अवतरित हुई और जन-मानस के कल्याण हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया !

 

 

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One thought on “वायु तत्व के प्रतीक हैं हनुमानजी

  1. sahusuryabhan says:

    Reblogged this on Asharamji Bapu Ashram and commented:

    धन्य हुए हम जो ऐसी भारतीय संस्कृति में जन्मे और ऐसे हिन्दू धर्म के संस्कारों से हमारा सिंचन हुआ, जहाँ प्रभु श्री राम, राम भक्त हनुमान और परम पूजनीय आशाराम बापूजी जैसी दिव्य आत्माएं अवतरित हुई और जन-मानस के कल्याण हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया !

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