Satsang

सच्चा अमीर

Hami se hai jamana 87

​एक बार एक “संत” जंगल में ध्यानमग्न बैठे थे, वह आस पास की गतिविधियों से बिल्कुल बेख़बर होकर “भगवान” की “तपस्या” कर रहे थे ।

वहाँ से एक “अमीर” आदमी गुज़र रहा था वो “संत” को देखकर बहुत प्रभावित हुआ ।

जब संत ने आँखे खोली तो वह उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ा था और अपने थैले से 1000 “सोने के सिक्के” निकाल कर बोला कि, “महाराज मेरी तरफ से ये सिक्के स्वीकार करें मुझे उम्मीद है कि आप इसका उपयोग अच्छे कामों में ही करेंगे ।”

संत उसे देखकर मुस्कुराए और बोले कि, “क्या तुम अमीर आदमी हो?”

वह बोला “हाँ…….”

संत ने कहा कि, ” क्या तुम्हारे पास और धन है?”

वह बोला, “हाँ घर पे मेरे पास और बहुत “सारा धन” है मैं बहुत अमीर हूँ ।”

संत बोले की, “क्या तुम और ज़्यादा अमीर बनाना चाहते हो?”

वह बोला,”हाँ| मैं रोज भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे और धन दें | मैं और अमीर हो जाऊं ।”

यह सुनकर संत ने उसे सिक्के वापस देते हुए कहा कि, “यह अपना धन वापस लेलो मैं भिखारी से कभी कुछ नहीं लेता ।”

वह आदमी अपना अपमान सुनकर गुस्सा हो गया कि, “आप ये क्या बोल रहे हैं ।”

संत बोले की, “मैं तो “भगवान का भक्त” हूँ,  मेरे पास सब कुछ है,  मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं | लेकिन तुम तो रोज भगवान से धन माँगते हो तो अमीर तो मैं हू, तुम तो “भिखारी” हो ।”

सच्चा अमीर वो नहीं जिसके पास ज्यादा धन-दौलत है सच्चा धनवान तो वह है जिसके पास “सचरित्र” है ।।

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