प्रार्थना, बापू के बच्चे नही रहते कच्चे, People's Experience

एक अनूठा चमत्कार – मृत कन्या दिया जीवनदाना

पूज्य बापूजी की कृपा ने आज मेरी छोटी बहन को नया जीवन दिया है नहीं तो कुछ घंटे पहले तक हंसने बोलने वाली हमारी बहन आज शायद हमारे बीच न होती | 
बाँदा (हमीरपुर) गाँव करहिया की रहने वाली प्रियंका सिंह जो मेरी छोटी बहन है और अभी पढाई कर रही है, कल बारिश होने के कारण बरामदे में रखे हुए टेबल फैन को उठाकर कमरे में रखने लगी तभी गलती से उसका हाथ पंखे के तार पर उस जगह छू गया जहाँ कट था और वो उसी में चिपक गयी और पक्के फर्श पर जोर से गिर गयी | उस समय उसके पास कोई नहीं था जो उसे देख सके य उसकी मदद कर सके | प्रियंका की आवाज़ भी जा चुकी थी जिसके कारण वो किसी को मदद के लिए पुकार भी नहीं सकती थी | चारों तरफ से ना उम्मीदी देखकर उसे सिर्फ गुरुदेव की याद आई कि अंत समय में परिवार और नाते-रिश्तेदारों का नहीं, बल्कि बापू का सुमिरन ही करना चाहिए | उसने जीने की सभी उम्मीदें छोड़ अब सिर्फ हरी ॐ हरी ॐ का ही सुमिरन करके बापू को याद करने लगी | और चमत्कार देखिये कि जिस लड़की की आवाज़ चली गयी थी, उसकी बोलने की शक्ति वापिस आने लगी और अपने ही मुख से पापा को आवाज़ दी और तभी दूसरी बहन वहां से अचानक निकल पड़ी | पर उसने ये सोचकर ध्यान नहीं दिया कि शायद वो ज़मीन में लेटकर कुछ काम कर रही होगी और फिर वो उधर से जाने लगी, लेकिन तभी उसको ख्याल आया कि चलो एक बार देख तो लें कि ये ज़मीन में लेटकर कौन सा काम कर रही है |
जिस हाई वोल्टेज तार को छूने से २ महीने पहले हमारे गाँव के बिजली विभाग के एक कर्मचारी की उसी समय मृत्यु हो गयी, उसी बिजली के तार से पिछले १० मिनट से मेरी बहन चिपकी हुई थी | पर कहते हैं न कि जाको राखे साइयां, मार सके न कोय | बस ऐसा ही कुछ मेरी बहन के साथ हुआ | जब दूसरी बहन पूर्णिमा वहां से निकली तो देखकर सन्न रह गई और उसे भी कुछ समझ नहीं आया कि क्या करे कैसे करे | ऐसे समय में तो इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है | पर गुरुदेव ने उसे ऐसी समझ दी कि उसने अपने हाथों से उस तार को हटाने के बजाय लाइट के मेन स्विच बोर्ड को बंद किया और तब कहीं जाकर प्रियंका के हाथ से वो तार छूटा | पर तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी और उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ चुका था मानो शरीर में जान ही न रह गयी हो | उसको मारा पीटा गया, हाथ पैर मले गए कि किसी तरह होश में आ जाये, लेकिन सब कुछ बेअसर हो रहा था | डॉक्टर ने भी आने में बहुत देर कर दी थी |
इन सब बातों के बीच एक अजीब वाकया और हुआ और वो था हमारी दादी के साथ | बुढापे के कारण चलने में दादी हमेशा डंडे क सहारा लेती हैं इसलिए वो डंडा हमेशा उनके हाथ में ही रहता था | दादी ये भूल गयी थी कि उनका डंडा लकड़ी का नहीं बल्कि लोहे का है और वो उसी डंडे को खोजने लगी ताकि उसकी मदद से प्रियंका को बिजली के तार से अलग किया जा सके | पर गुरुदेव ने यहाँ भी रक्षा की और जो डंडा दादी कभी अपने से दूर नहीं करती थी, वही डंडा उन्हें उस समय ढूंढने से भी नहीं मिला | और अगर मिल जाता तो आप स्वयं अंदाज़ा लगा सकते हैं कि तब क्या परिस्थिति होती | छोटी बहन के साथ साथ दादी भी उस तार की चपेट में आ जातीं और तब दो लोगों की जान खतरे में पड़ जाती |
 
पर गुरुदेव की असीम कृपा तो देखिये कि आधे घंटे तक जिस लड़की के शरीर में खून का संचार न होने की वजह से वो लगभग बेजान हो चुकी थी, अपने प्राण खो चुकी थी, उसी लड़की के मुख से आधे घंटे के बाद हरी ॐ हरी ॐ के स्वर सुनाई दिये | सबके चेहरों पर जो दुःख और पीड़ा थी, जो घर में दुःख का माहौल बन चुका था, ऐसा लगा मानो फिर से सब मे नयी चेतना का संचार हो गया हो और उन रोते चेहरों पर मुस्कान और उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी | और देखते देखते प्रियंका को होश आने लगा | तब तक डॉक्टर भी आ गए थे और जल्दी से उसका इलाज शुरू हुआ ताकि खून का संचार हो सके |
हमारे लिए ये सब तो बापूजी की कृपा और उनका आशीर्वाद था, पर अभी तक जो गाँव वाले बापूजी के विरोध में जाने क्या क्या बोलते थे उनके लिए ये किसी चमत्कार से कम नहीं था क्योंकि अभी तक जितने भी लोगों को करंट लगा उनमें से ये पहला ऐसा केस था जहाँ किसी की जान बची हो, नहीं तो अभी तक कोई जीवित नहीं बच पाया और वो भी बोलने की स्थिति में सही सलामत हो |

धन्य हैं हमारे गुरुदेव कि जेल के अन्दर बैठे हुए भी अपने बच्चों की फिक्र करना नहीं भूलते, और जब इंसान बाकि सहारों की उम्मीद छोड़ गुरुदेव को याद करे तो बापू कैसे पीछे रह सकते हैं | भले ही इस दर्दनाक हादसे को कुछ घंटे बीत चुके है, पर मैं, मेरी बहन और मेरा पूरा परिवार जो बापूजी से दीक्षित है, तहे दिल से गुरुदेव को हर पल नमन करते थे और आज भी गुरुदेव के श्री चरणों में कोटि कोटि वंदन करते हैं कि आज उन्ही के आशीर्वाद से मेरी बहन हमारे बीच में सही सलामत है नहीं तो हम तो उसे खो ही चुके थे | धन्य हैं आप गुरुदेव जो यमराज के घर से हमारी बहन को वापिस ले आये | 

यूँ तो श्री आसारामायण में आता है, “मृत गाय दिया जीवनदाना, पर आज तो ये कहने को दिल करता है कि मृत कन्या दिया जीवनदाना”
धन्य हुए हम गुरुवर जो आपको गुरु रूप में पाया , कैसे बयां करें कैसे ये जीवन सफल बनाया |  
इस अनुभव की पुष्टि हेतु और किसी भी शंका के समाधान हेतु, निःसंकोच आप संपर्क कर सकते हैं:
श्री ओमप्रकाश सिंह (प्रियंका के पिताजी) (09935589976)
पता : ग्राम व पोस्ट करहिया, 
ज़िला: हमीरपुर 
पिन कोड : 210504
 

 

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