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आपके गुरुभक्ति का दुरूपयोग कर, गुरुभाई के साथ लड़ा तो नहीं रहा कोई आपको ?

क्योंकि मैं भी एक साधक हूँ

इसलिए ! पूज्य बापूजी के नाम पर लोगों को गुमराह करने वालों से एक सवाल है मेरा ?
क्या कभी हमारे गुरुदेव को ये अच्छा लगेगा के हम साधक आपस में ही कुत्तों की नाई लड मरें ।

मुझे अच्छे से याद है वो दर्दनाक रात जिस रात को हमारे गुरुदेव को पुलिस लेने के लिए इन्दौर आश्रम आई थी और रात को बेदर्दी से गाडी में उठाकर ले गयी थी । पर जाने से पहले हमारे गुरुदेव ने एक संदेश लाईव टैलिकास्ट के द्वारा हम सबके लिए दिया था गुरुदेव ने कहा था धैर्य रखना मिलजुलकर रहना, टूटना नहीं कुछ असामाजिक तत्व तुमको तोडने की कोशिश भी करेंगे । साधक आपस में संगठित रहना टूटना नहीं । आज हिन्दू संस्कृति और संतों पर आँधी का दौर चला है । ऐसे में हमें मिलकर इसका सामना करना होगा ।

पर आज हम क्या कर रहे हैं अपने ही गुरुभाईयों के खून के प्यासे हो रहे हैं !

देखना षडयंत्रकारियों के षडयंत्रों को सफल बनाने में कहीं आप योगदान तो नहीं कर रहे ?

कहीं आपकी अपने गुरुदेव के प्रति श्रद्धा भावना का कोई दुरुपयोग तो नहीं कर रहा ?

सच को जाने बिना किसी के कहने पर विश्वास मत करें । पहले सच्चाई को जाने !
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मैं आपके सामने रख रहा हूँ जिसे सुनकर आपको खुद विश्वास होगा कि किस तरीके से आज साधकों को आपस में लडाने का प्रयास किया जा रहा है ।

पूज्य बापूजी को गिरफ्तार करने के बाद केस के निम्नलिखित प्वाइंट बनाते बनाते उल्झाते गये । और इसमें कुछ साधक के भेश में छुपे षडयंत्रकारियों ने केस को उल्झाने में बहुत खतरनाक काम किया है आइये जानें कैसे —–

  1. वकीलों पर हमला किया अपराजिक तत्वों ने पर कहा गया कि बापूजी के साधक साधक नहीं गुंडे हैं अगर बापूजी को जमानत दी गयी तो केस के गवाहों पर असर हो सकता है । नतीजा पूज्य बापूजी की जमानत में कठिनाई होने लगी ।

  2. अहमदाबाद में दो बहनों के तथा कथित रेप केस में पूज्य बापूजी और श्री नारायण साँई जी को फँसाया गया । वो वास्तव में केस ही नहीं था 10-15 साल पुराना केस और आसानी से उसमें जमानत हो सकती थी पर । रिश्वत का मामला हो या फिर गवाहों पर हमले के मामले को लेकर उसे कठिन से कठिनतर कर दिया गया । और किया साधकों के भेश में छुपे षडयंत्रकारियों ने ।

  3. जब भी पूज्य बापूजी के केस की सुनवाई होने वाली होती है ठीक उससे एक दो दिन पहले किसी ना किसी को धमकी भरा फोन जाता है और फोन आने से भी चार पाँच घंटे पहले से ही चैनल वाले दिखाना शुरु हो जाते हैं पर लगता है फोन भी मिडिया में दिखाने के बाद ही जाता होगा । पर पुलिस ने जब धमकि देने वालों को गिरफ्तार किया तो वो कुछ और ही निकला उसका दूर दूर तक बापूजी या आश्रम से कोई संबंध नहीं था ।

मैटर थोडा लंबा है क्योंकि स्टंट बडा गहरा है । आगे जानिये…

जोधपुर में काम कर रहे आश्रम के साधक….

साधक गद्दार हैं …. बापू जी को बाहर नहीं आने देना चाहते…. वकीलों को पूज्य बापूजी कि निर्देशानुसार नहीं रखा गया है…. केस को उल्झाने का प्रयास किया जा रहा है…. हम अपने गुरुदेव को खो देंगे… चलो जोधपुर….. ऐसे कई मैसेज आपके मोबाईलों पर बार बार आते होंगे ।

पर मैं आप सबसे पूछता हूँ ! क्या हजारों लाखों लोग जोधपुर पहुँचकर मार पिटाई करेंगे या दंगा करेंगे, जबरद्स्ती करेंगे तो इससे हमारे गुरुदेव का केस सुलझेगा या उलझेगा और हमारे गुरुदेव को ये अच्छा लगेगा ।

अरे अभी की परिस्थिति तो ये है कि आश्रम में रह रहे साधकों पर समन्स निकालकर कभी भी उन्हें उठा लिया जाता है, मारा पिटा जाता है, करंट के शोक दिये जा रहे हैं । आश्रमों पर कभी भी पूलिस खुली दादागिरि से छापा मारती है साधकों को खदेडकर घंटों तक एक जगह पर नजरबंद कर देती है । बाथरूम तक नहीं जाने देती । कैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं आश्रम के लोग ऐसी परिस्थितियों में भी वो लोग अगर लगे हैं तो वो गद्दार हैं या वफादार आप खुद ही सोचें….

जाहिर सी बात है केस को उल्झाने के लिए साधकों की भावनाओं को भडकाया जा रहा है । आपके हमारे सबके मन में पीडा है ! दुख है ! पर कहाँ गयी हमारी श्रद्धा ? कहाँ गया हमारे गुरुदेव पर हमारा विश्वास ? क्या हमें अपने गुरुदेव की शक्तियों पर भरोसा नहीं ? अरे जिनकी एक मीठी निगाह से लोगों के बिगडे काज संवर जाते हैं उन महापुरुष को भला कोई इस छोटे से संसार की कोई छोटी सी जेल कैद करेगी ।

याद है आपको श्री आशारामायण जी की वो कुछ पंक्तियाँ ?

मृत गाय दिया जीवन दाना, तबसे लोगों ने पहचाना ।
एक दिना एक माई आई, बोली हे भगवन सुखदायी ।
पडे पुत्र दुख मुझे झेलने, खून केस दो बेटे जेल में ।।
बोले आसू सुख पायेंगे, निर्दोष छुट जल्दी आयेंगे ।
बेटे घर आये माँ भागी, आसुमल के पाँवो लागी ।।

पढिये नया अनुभव ;

एक अनूठा चमत्कार – मृत कन्या दिया जीवनदाना

जिनका एक वचन मात्र लोगों को कारावास से छुडवा सकता है । जिनकी एक नजर मृत गाय में प्राणों का संचार कर सकती है । ऐसे समर्थ महापुरुष को कोई भला क्या कैद करेगा ? जाहिर सी बात है ये एक लिला है । परंतु हमारा भी कर्तव्य है सेवा का ! हमें अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए पर निरुत्साही होकर या लोगों के भडकावे में भडककर कहीं हम आपस में एक दूसरे से लडें नहीं । जब हम दीक्षा लेते हैं तो हमें रोज गुरुगीता और गुरुभक्तियोग पढने को कहा जाता है । और पंचामृत पुस्तक दी जाती है ।

जब शिष्य-शिष्य आपस में लडते हैं तब घर्षण उत्पन्न होता है और वो घर्षण सदॆगुरुदेव के हृदय को पीडा पहुँचाता है ।

गुरुभक्तियोग

अब मैं आप पर ही छोडता हूँ क्या हमें ऐसे अनर्गल कुप्रचार से जुडकर आपस में लडना चाहिए ? क्या हमारे आश्रम में रह रहे आपके हमारे परिवारों से ही आये साधक भाई बहनों को मारने या हटाने से हम अपने गुरुदेव को बाहर ले आयेगें ?

मैं तो एक बात कहूँगा अगर हमारे या आश्रम के भाईयों के लडने से एक दूसरे की गर्दन काटने से हमारे गुरुदेव बाहर आते हैं तो मैं सबसे पहले तैयार हूँ ।

अरे शीश दिये सदगुरु मिले तो भी सस्ता जान ।

पर ये समस्या का हल नहीं । मेरे गुरुभाईयों ! आज मिलकर हमें इस कठिन परिस्थितियों का सामना करना होगा ! लडना नहीं जूडना होगा ! तभी हम मिलकर इस कठिनाईयों का सामना कर पायेंगे ! ऐसे झूठे अनर्गल कुप्रचार करने वालों से सावधान ! कहीं आपकी श्रद्धा भावना का कोई दुरुपयोग ना कर ले ।

इसलिए सावधान ! मैं तो यही कहूँगा बंद मुठी लाख की, खुल गयी तो खाक की । अगर जुडकर रहे तो मिलकर बडे से बडी परिस्थिति का सामना कर लेंगे । और अगर बिखर गये तो एक एक करके सबको तोड देंगे लोग ।
इसलिए गुमराह ना हों और सच्चाई जानने के लिए अहमदाबाद आश्रम संपर्क करें ।
बिना सोचे-समझे कुप्रचार से भ्रमित होकर कोई निर्णय ना लें सच को जानने का प्रयास जरूर करें ।

 

तो क्या आप गुरु सेवा करना चाहोगे ? कृपया यह फॉर्म भरें ;

http://www.asaramji.org/online-suprachar-sewa-form/

 

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2 thoughts on “आपके गुरुभक्ति का दुरूपयोग कर, गुरुभाई के साथ लड़ा तो नहीं रहा कोई आपको ?

  1. सुन लो चतुर सुजान निगुरे नहीं रहना….
    निगुरे का नहीं कहीं ठिकाना चौरासी में आना जाना।
    पड़े नरक की खान निगुरे नहीं रहना….
    गुरु बिन माला क्या सटकावे मनवा चहुँ दिश फिरता जावे।
    यम का बने मेहमान निगुरे नहीं रहना….

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  2. मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं।
    स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं।।
    हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर !
    ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं।।

    http://santasharam.org

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