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जोड़ के हाथ झुका के मस्तक…

sewa (5)

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जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।

द्वेष मिटायें प्रेम बढ़ायें, नेक बने इनसान प्रभु।।

भेदभाव सब मिटे हमारा, सबको मन से प्यार करें।

जाये नजर जिस ओर हमारी, तेरा ही दीदार करें।।

पल-पल क्षण-क्षण करें हमेशा, तेरा ही गुणगान प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

दुःख में कभी दुःखी न होवें, सुख में सुख की चाह न हो।

जीवन के इस कठिन सफर में, काँटों की परवाह न हो।।

रोक सकें ना पाँव हमारे, विघ्नों के तूफान प्रभु।।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगेग ये वरदान प्रभु।।

दीन दुःखी और रोगी सबके, दुखड़े निशदिन दूर करें।

पोंछ के आँसू रोते नैना, हँसने पर मजबूर करें।।

संस्कृति की सेवा करते, निकलें तन से प्राण प्रभु।।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

गुरु ज्ञान से इस दुनिया का, दूर अँधेरा कर दें हम।

सत्य प्रेम के मीठे रस से, सबका जीवन भर दें हम।।

वीर-धीर बन जीना सीखे, ये तेरी संतान प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

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