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रब मेरा सदगुरु बन के आया मैनू देख लैन वे

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रब मेरा सदगुरु बन के आया मैनू देख लैन वे

रब्ब मेरा सतगुरु बन के आया, मैनू वेख लें दे।
मैनू वेख लैन दे, मथ्था टेक लैन दे॥

बूटे बूटे पानी पावे,
सूखे बूटे हरे बनावे।
नी ओ आया माली बन के,
मैनू वेख लें दे॥

जिथ्थे वी ओह चरण छुआवे,
पत्थर वी ओथे पिघलावे।
नी ओह आया तारणहारा,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी महिमा गाई ना जाए,
त्रिलोकी इथे झुक जावे।
नी ओ आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

ब्रह्म गायन दी मय पिलावे,
जो पी जावे ओह तर जावे।
एह ब्रह्म दा रस स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी सूरत रब दी सूरत,
कर दे मुरादे सब दी पुराण।
नी ओह रब दा पूरण स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

गुरां दी चरनी तीरथ सारे,
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे।
नी ओह आया पार उतारण,
मैनू वेख लैन दे॥

जनम मरण दे चक्क्कर कटदे,
जेहड़े इसदे दर दे चुकदे।
नी ओह रब्ब डा पूरण रूप,
मैनू देख लैन दे॥

नाम दी इसने प्याऊ लगाईं,
हरी ॐ नाल दुनिया झुमाई।
एहदे नाम दा अमृत पी के
मैनू वेख लैन दे॥

सत्संग एस दा बड़ा निराला,
जीवन विच करदा है उजाला।
मेरे रब्ब दा ज्योति स्वरूप,
मैनू वेख लैन दे॥

प्रीत है उसदी बड़ी अनोखी,
नाम दी दौलत कदे ना फुट्दी।
नी ओह आया जग नू झुमावन,
मैनू वेख लैन दे॥

घट घट सब दे ज्योत जगावे,
मोह माया दे भरम मिटावे।
एह मिठ्ठी निगाह बरसावे,
मैनू वेख लैन दे॥

हरी ॐ दी बोली प्यारी,
गंगा जी वी बनी पुजारी।
सब तीरथ होए निहाल,
मैनू वेख लैन दे॥

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