Guru Poornima

Gurupoonam Special Satsang 2014

क्या करें गुरु पूर्णिमा के दिन ?

bapuji (18)

हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं, अतः वे हमारे आदिगुरु हुए। इसीलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। उनकी स्मृति हमारे मन मंदिर में हमेशा ताजा बनाए रखने के लिए हमें इस दिन अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पाद-पूजा करनी चाहिए तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए गुरु का आशीर्वाद जरूर ग्रहण करना चाहिए।

  • इस दिन सुबह बिस्तर पर तुम प्रार्थनाकरना : ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा ! अब हम अपनी आवश्यकता की ओरचलेंगे । इस देह की सम्पूर्ण आवश्यकताएँ कभी किसीकी पूरी नहीं हुर्इं ।हुर्इं भी तो संतुष्टि नहीं मिली । अपनी असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदमरख रहे हैं । ”उसी समय ध्यान करना । शरीर बिस्तरछोडे उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना ।
  • प्रातः घर की सफाई, स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके तैयार हो जाएं। थोडा-बहुतधूप, प्राणायाम आदि करके श्रीगुरुगीता का पाठ कर लें ।
  • फिर हमें ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र से पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
  • तत्पश्चात दसों दिशाओं में अक्षत छोड़ना चाहिए।
  • फिर व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम, मंत्र से पूजा का आवाहन करना चाहिए।

मानस-पूजन करे

‘मेरे गुरुदेव ! मन-ही-मन, मानसिक रूप से मैं आपको सप्ततीर्थों के जल सेस्नान करा रहा हूँ । मेरे नाथ ! स्वच्छ वस्त्रों से आपका चिन्मय वपु (चिन्मय शरीर) पोंछ रहा हूँ । शुद्ध वस्त्र पहनाकर मैं आपको मन से ही तिलककरता हूँ, स्वीकार कीजिये । मोगरा और गुलाब के पुष्पों की दो मालाएँ आपकेवक्षस्थल में सुशोभित करता हूँ ।
आपने तो हृदयकमल विकसित करके उसकी सुवास हमारे हृदय तक पहुँचायी है लेकिन हम यह पुष्पों की सुवास आपके पावन तन तक पहुँचाते हैं, वह भी मन से, इसे स्वीकार कीजिये । साष्टांगदंडवत् प्रणाम करके हमारा अहं आपके श्रीचरणों में धरते हैं ।
हे मेरे गुरुदेव ! आज से मेरी देह, मेरा मन, मेरा जीवन मैं आपके दैवी कार्यके निमित्त पूरा नहीं तो हररोज २ घंटा, ५ घंटा अर्पण करता हूँ, आप स्वीकारकरना । भक्ति, निष्ठा और अपनी अनुभूति का दान देनेवाले देव ! बिना माँगेकोहिनूर का भी कोहिनूर आत्मप्रकाश देनेवाले हे मेरे परम हितैषी ! आपकीजय-जयकार हो ।’
इस प्रकार पूजन तब तक बार-बार करते रहें जब तक आपका पूजन गुरु तक, परमात्मा तक नहीं पहुँचे । और पूजन पहुँचने का एहसास होगा, अष्टसात्त्विक भावों (स्तम्भ १ , स्वेद २ , रोमांच, स्वरभंग, कम्प, वैवण्र्य ३ , अश्रु, प्रलय ४ ) में से कोई-न-कोईभाव भगवत्कृपा, गुरुकृपा से आपके हृदय में प्रकट होगा । इस प्रकारगुरुपूर्णिमा का फायदा लेने की मैं आपको सलाह देता हूँ । इसका आपको विशेषलाभ होगा, अनंत गुना लाभ होगा ।

  • अब अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा देना चाहिए।
  • गुरु पूर्णिमा पर व्यासजी द्वारा रचे हुए ग्रंथों का अध्ययन-मनन करके उनके उपदेशों पर आचरण करना चाहिए।
  • यह पर्व श्रद्धा से मनाना चाहिए, अंधविश्वास के आधार पर नहीं।

” X-ray of Asharam Bapu “

I had a calculated thought process for an interesting case of Sant Shree AsharamBapu to which media is lot attracted to highlight even minuscule, unless I myself inspected into further.

I thought my opinion was my own, while it was slowly shaped by a powerful mode of communication known as media. Not any other high profile case gets such an elongated media attention. Hence, I knew there was something fishy.

Reporters are usually found running behind Bapuji eager to get him on their mike and capture photograph …Too many clicks to make sure they discover a new expression on his face to be sold as innovative stuff in newspaper headlines.

When I tried to discover, there were facts I couldn’t deny upon at least with open eyes. Those could challenge brains of any intellect. Hence, I further scrutinized and learnt; whole bunch of my ideas related to case weren’t authentic. Thoughts were only a viewer’s perception without involvement.

  • If I gather data from the audience relying on T.V sets each one of them are flying in dark clouds hence they ought to say what they have been told .It makes sense or not, that is not question. All sources tame from media satellites.
  • Reporters, Journos tends to become extremists when it comes to discuss about Hindu saints. Hence, I discarded biased inputs.
  • Asharam Bapu followers are quite busy doing havans ,Jap Anushthan and Kirtan yatras etc to raise Saatvik influence around.

Thereby, stating facts gathered on the grounds of Legal behalf –

  1. It’s not at all a Rape case, not even sexual assault case – Panel of doctors and medical reports declared it long ago.

 

  1. Police gave a clean chit to his Ashram in Madhya Pradesh where it was alleged Opium is harvested.

 

  1. CID gave a clean chit to ashram on fake allegations of Black magic.

 

  1. Mahila uthan ashram got a clean chit from Gujarat Mahila ayog when they went to investigate & confirmed the same after meeting each women devotee personally to know their concern.

 

  1. All his ashrams are devotedly regarded place for meditation and nothing more than that.

 

  1. No proven charges of Land encroachment. Property that belongs to ashram samiti is either donated by devotee or was a vacant land not in use brought years ago when prices were quite low. My concern is- how does it matter because these lands are entirely used for social development acts and not at all for personal benefits. There isn’t an illegal flag to any of it.

 

  1. Strong witness Bholanand explicitly accepted he was misguided by media to utter against Bapu and Ashrams on T.V. Why there is no heads up on such an important witness?

 

  1. About suicides in Gurukuls, News was later on proved forged by police department.

 

  1. Media jury spread disastrous rumors about Shiva, Shilpi , Bhartiji , Narayan sai and his wife accepting the crime while in real , things were reverse.

Indicts struggled to state genuine facts aloud but alas they did not reach to common man!

 

The Process is known as PAID Defamation !

Evidence, witness, history says “Asaram Bapu is innocent “, than why he is still in Jail.

–       Asharam Bapuji and his followers aim at stopping religious conversions to much extent. Missionaries sponsor most of media channels and have been authoritative in such decisions to much extent.

They have successfully defamed earlier Hindu saints as well who stood for Dharma Protection and fought against inhumane acts of conversions in last 10 years.

 

Earlier in 2012, same bunch of power have tried to attack Bapuji through Helicopter crash as well .

 

गुरुपूर्णिमासंदेश

आत्मस्वरुप का ज्ञान पाने के अपने कर्त्तव्य की याद दिलाने वाला, मन को दैवी गुणों  से विभूषित करने वाला, सदगुरु के प्रेम और  ज्ञान की गंगा में बारंबार डुबकी लगाने हेतु प्रोत्साहन देनेवाला जो पर् वहै – वहीहै’गुरुपूर्णिमा’ ।

जोशिष्यब्रह्मवेत्तासदगुरुकेश्रीचरणोंमेंपहुँचकरसंयम-श्रद्धा-भक्तिसेउनकापूजनकरताहैउसेवर्षभरकेपर्वमनानेकाफलमिलताहै।

जबतकसदगुरुकेदिलकाराज्यहमारेदिलतकनहींपहुँचता, सदगुरुओंकेदिलकेखजानेहमारेदिलतकनहीउँडेलेजाते, जबतकहमारादिलसदगुरुओंकेदिलकोझेलनेकेकाबिलनहींबनता, तबतकसबकर्म, उपासनाएँ, पूजाएँअधुरीरहजातीहैं।देवी-देवताओंकीपूजाकेबादभीकोईपूजाशेषरहजातीहैकिंतुसदगुरुकीपूजाकेबादकोईपूजानहींबचती।

सच्चेसदगुरुशिष्यकीसुषुप्तशक्तियोंकोजाग्रतकरतेहैं, योगकीशिक्षादेतेहैं, ज्ञानकीमस्तीदेतेहैं, भक्तिकीसरितामेंअवगाहनकरातेहैंऔरकर्ममेंनिष्कामतासिखातेहैं।इसनश्वरशरीरमेंअशरीरीआत्माकाज्ञानकराकरजीते-जीमुक्तिदिलातेहैं।

गुरु-नामउच्चारणकरनेपरगुरुभक्तकारोम-रोमपुलकितहोउठताहैचिंताएँकाफूरहोजातीहैं, जप-तप-योगसेजोनहीमिलपातावहगुरुकेलिएप्रेमकीएकतरंगसेगुरुभक्तकोमिलजाताहै, इसेनिगुरेनहींसमझसकते |

आत्मज्ञानी, आत्म-साक्षात्कारीमहापुरुषकोजिसनेगुरुकेरुपमेंस्वीकारकरलियाहोउसकेसौभाग्यकाक्यावर्णनकियाजाय? गुरुकेबिनातोज्ञानपानाअसंभवहीहै।कहतेहैं :

ईशकृपाबिनगुरुनहीं, गुरुबिनानहींज्ञान

ज्ञानबिनाआत्मानहीं, गावहिंवेदपुरान

जिसकीश्रद्धानष्टहुई, समझोउसकासबकुछनष्टहोगया।इसलिएऐसेव्यक्तियोंसेबचें, ऐसेवातावरणसेबचेंजहाँहमारीश्र्द्धाऔरसंयमघटनेलगे।जहाँअपनेधर्मकेप्रति, महापुरुषोंकेप्रतिहमारीश्रद्धाडगमगायेऐसेवातावरणऔरपरिस्थितियोंसेअपनेकोबचाओ।

साधकों के लिए गुरुपूर्णिमा एक आध्यात्मिक हिसाब-किताब का दिवस है । पहले के वर्ष में सुख-दुःख में जितनी चोट लगती थी, अब उतनी नहीं लगनी चाहिए । पहले जितना समय देते थे नश्वर चीजों के लिए, उसे अब थोडा कम करके शाश्वत में शांति पायेंगे, शाश्वत का ज्ञान पायेंगे और शाश्वत ‘मैं’ को मैं मानेंगे, इस मरनेवाले शरीर को मैं नहीं मानेंगे । दुःख आता है चला जाता है, सुख आता है चला जाता है, चिंता आती है चली जाती है, भय आता है चला जाता है लेकिन एक ऐसा तत्त्व है जो पहले था, अभी है और बाद में रहेगा, वह मैं कौन हूँ ? उस अपने ‘मैं’ को जाँचो | यही है गुरुपूनम का संदेश है |

गुरुपूर्णिमाका उदेश्य

आत्मसाक्षात्कार करना | जीव, जगत (स्थूल जगत, सूक्ष्म जगत) और ईश्वर –ये सब माया के अन्तर्गत आते हैं। आत्मसाक्षात्कार माया से परे है। जिसकी सत्ता से जीव, जगत, ईश्वर दिखते हैं, उस सत्ता को मैं रूप से ज्यों का त्यों अनुभव करना, इसका नाम है आत्मसाक्षात्कार।

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये।

यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः।।

हजारों मनुष्यों में कोई विरला सिद्धि के लिए यत्न करता है और उन सिद्धों में से कोई विरला मुझे तत्वतः जानता है।

आत्मसाक्षात्कार को ऐसे कोई विरले महात्मा ही पाते हैं। योगसिद्धि, दिव्य दर्शन, योगियों का आकाशगमन, खेचरी, भूचरी सिद्धियाँ, भूमि में अदृश्य हो जाना, अग्नि में प्रवेश करके अग्निमय होना, लोक-लोकान्तर में जाना, छोटा होना, बड़ा होना इन अष्टसिद्धियों और नवनिधियों के धनी हनुमानजी आत्मज्ञानी श्रीरामजी के चरणों में गये, ऐसी आत्मसाक्षात्कार की सर्वोपरि महिमा है। साधना चाह कोई कितनी भी ऊँची कर ले, भगवान राम, श्रीकृष्ण, शिव के साथ बातचीत कर ले, शिवलोक में शिवजी के गण या विष्णुलोक में जय-विजय की नाईं रहने को भी मिल जाय फिर भी साक्षात्कार के बिन यात्रा अधूरी रहती है।

मनुष्य तू इतना छोटा नहीं कि रोटी, कपड़े मकान, दुकान या रूपयों में ही सारी जिंदगी पूरी कर दे। इन छूट जाने वाली असत् चीजों में ही जीवन पूरा करके अपने साथ अन्याय मत कर। तू तो उस सत्स्वरूप परमात्मा के साक्षात्कार का लक्ष्य बना। वह कोई कठिन नहीं है, बस उससे प्रीति हो जाये।

असत् पदार्थों की और दृष्टि रहेगी तो विषमता बढ़ेगी। यह शरीर मिथ्या है, पहले नहीं था, बाद में नहीं रहेगा। धन, पद ये मिथ्या हैं, इनकी तरफ नजर रहेगी तो आपका व्यवहार समतावाला होगा। धीरे धीरे समता में स्थिति आने से आप कर्मयोगी होने में सफल हो जाओगे। ज्ञान के द्वारा सत् असत् का विवेक करके सत् का अनुसंधान करोगे और असत् की आसक्ति मिटाकर समता में खड़े रहोगे तो आपका ज्ञानयोग हो जायगा। बिना साक्षात्कार के समता कभी आ ही नहीं सकती चाहे भक्ति में प्रखर हो, योग में प्रखर हो, ज्ञान का बस भंडार हो लेकिन अगर साक्षात्कार नहीं हुआ तो वह सिद्धपुरूष नहीं साधक है। साक्षात्कार हुआ तो बस सिद्ध हो गया।

एक उत्तम तोहफा यह है कि आप अपने दोनों हाथों की उँगलियों को आमने सामने करके मिला दें। होंठ बंद करके जीभ ऐसे रखें कि न ऊपर लगे न नीचे, बीच में रखें। फिर जीव-ब्रह्म की एकता का संकल्प करके, तत्त्वरूप से जो मौत के बाद भी हमारा साथ नहीं छोड़ता उसमें शांत हो जायें। यह अभ्यास प्रतिदिन करें, कुछ समय श्वासोच्छवास की गिनती करें जिससे मन एकाग्र होने लगेगा, शक्ति का संचय होने लगेगा। धीरे-धीरे इस अभ्यास को बढ़ाते जायेंगे तो तत्त्व में स्थिति हो जायेगी।

 

 

Advertisements
Standard

Your Opinion

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s