Satsang, tatvik

ऐसा कोई कण नहीं जिसमे भगवत सत्ता नहीं

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सबसे से जादा सुखी कौन? सबसे से जादा उदार कौन? सबसे से जादा हितेसी कौन ? सबसे से जादा श्वास्वत कौन ? सबसे से जादा निकट कौन ? सबसे से जादा दूर कौन ? इस प्रकार के प्रश्न बुद्धि में उठ जाये और मनमानी श्रद्दा होती है तो मनमाना फल मिलता है और मन थोडीसी इमानी होता है | मन की अपनी सीमा है | श्रद्दा सात्विक, राजस, तामस ऐसा ही फल होता है  | आप देवता किसी देवता को ले जाते तो फल चाहते है ……… देवता लोक ब्रम्हाजी के एक दिनमे चौदा इंद्र बदलते है |तो देवता की उपासना करोगे तो वो बदल जाते है | नये इंद्र का नया कानून हो जाता है | तो सवाल है की सबसे अधिक सहनशील कौन ? उससे अधिक निकट कौन ? सबसे अधिक भगवान भगवान …….. उड़िया बाबा को इस्पितल में ले गया था बाबा हमारे इस्पिताल में थे | बड़ी से बड़ी ईलाज इस्पिताल में होती | इसप्रकार से लौटे तो बाबा बड़े गुस्सायेर हुए थे | हाथोसे ईशारे रखते थे, हाथ पैर पटकते और कुछ खरी खोटी सुनाई जाती है भगवान को | ऐसी खरी-खोटी सुनाई जाती | कुत्ता मनुष्य की भाषा बोल रहा है ये भी लीला कर देखा है | पत्थर की मूर्ति दूध पिने लग जाये तो वो भी लीला है | हेलीकाप्टर चूर-चूर हो जाय और खरोज भी नहीं आये वो भी लीला करके देखा है | ह्रदय में न जाने  कितनी होती जाती रहती है कितना सहनशील उडीयाबाबा सुनाये जा रहे है ऐसा नही की वो सुनता नहीं है |  आखिर आखंडनंद ने पूछा क्या … आप भगवान को नहीं मानते क्या ? बोले नहीं मानता तो गाली क्यू देता है | मानता हूँ तभी तो ले आऊ कुछ सुनाऊ | तुम मेरे बोल रहे मेरे से जीभ दूर है लेकिन तुम हाजरा हाजिर है | जितने लोग दुखी है तो गुस्सा आ गया लेकिन वो सुनाई तो सही लेकिन बाबा को क्या किया | ईश्वर के पाच भुत भी है सेवदार पृथ्वी देखो खड्डा खोदो वो मुर्दे गाडो,सौच करो , गंदगी करो सब सह जा रही | धन, धान्य, अन्न, फुल, फल इत्यादि समुद्र में गंधा करो, डालो वो लहराते है बस | सबसे बाधिक–जोधिक शक्ति है तो परमात्मा है | छोटी बुद्धि होती है तो ग्राम देवता को मानते है | किसी स्थान देवता को मानते है, कोई कुलदेवता को मानते है, कोई किसी देवता को मानते है | छोटी-छोटी मती है छोटी-छोटी देव में अटक जाती है और फटक कोई ग्राम देवता मर जाए कोई कुलदेवता मर जाय | ये पता नही है की कुलदेवता के द्वारा और ग्राम देवता के द्वारा कुछ भी कृपा होगी तो उसीकी होगी | सत्ता होगी तो उसकी होगी, संकल्प-सामर्थ्य होगा तो उसकी का होगा |

देवतार्म यज्ञं तत् सारं सर्व लोकं महेश्वरं श्रुदम सर्व भुतामं ज्ञातामं शांतम मृछ्ते | सारे यज्ञं और तापोंका फल का भोक्ता मै हूँ|

मात्रु पिंड करो पितृ पिंड करी सब के अंदर वो ब्रम्ह है वो | छोटे छोटे आकृतियों छोटे छोटे खतम हुआ तुम्हारा ऊप्लब्धि ही खतम हुई उन सबमे मै हूँ | ईश्वर तो बहोत है एक-एक सृष्टि के अलग-अलग ईश्वर है | सृष्टि कितने भी है वो पार नहीं लेकिन ये सब सृष्टियों का ईश्वर अंतर्मयी आत्मा मै महेश्वर ही हूँ | और कैसा हूँ  सुहृदम सर्व भुतामं ज्ञातामं   प्राणिमात्र का श्रुयद हूँ | आकारण – हित करने वाला हूँ |  सुहृदम सर्व भुतामं ज्ञातामं शांतम मृछ्ते … प्राणिमात्र का श्रुयद हूँ  ऐसा मुझे जानता है  उसे शांति प्राप्त होती है | बस इतना पक्का करो की सारे भगवान, सारे देवता, सारे यक्ष, राक्षस, किन्नर की नजरो में परमेश्वर है | तो आपकी नजरो ये बड़ी हो जाय. बुद्धि विशाल हो जाय, खंड में अखंड में चली जाय, परीक्षण से व्यापक हो जाय, बिंदु में सिंधु बन जाय | ऐसा कोई बिंदु नहीं है की सिंधु से अलग है | ऐसा कोई बढे का आकाश नहीं महाकाश से बढे हो | ऐसा कोई जिव नहीं उस परमेश्वर की सत्ता, स्फूर्ति, चेतना, ज्ञान के बिना उसका अस्तित्व नहीं | गीता का ज्ञान, उपनिषदों का ज्ञान है तो भी मकड़ी के जालों में भगवान का ज्ञान आता है | जिदर देखता हूँ खुदा ही खुदा  खुदासे कोई चीज जुदा है | जब अवल राखे खुदा ही खुदा है |

 

Sant Shri Asharamji Bapu satsang Ahmedabad Ashram 28th Sep 2012 Part 4

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