Satsang

भक्ति सारी सुखों की खान है

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भक्ति सारी सुखों की खान है, सब साधनों की मूल है और तब मिले सब संत अनकूल – ईश्वर की भक्ति मिल जाय सत्संग मिल जाय | संतो के पास जायेंगे तो धीरे-धीरे उस माहोल से मन इंद्रिय बदलेगी लेकिन चाहे उधर रहे आदत पुरानी अपनी नहीं छोड़े तो क्या फायदा | बड़ी विलक्षण माया, बड़ी विलक्षण लीला है | बोले भगवान पाना बड़ा कठिन है और भगवान का पाना इतना सरल है की | खाली आप इरादा बना लो ईश्वर को पाना है तो सारी जिम्मेदारी वो अपने आप पर लेता है | उसकी प्राप्ति की इच्छा कर लो बस इमानदारी से | जितना हित हराम से उतना हरि से होये का कबीर वार्दास पला न पकड़ा ना कोई |  हे प्रभु, हे हरि ……..

चरित्र की पवित्रता, बुद्धि में सत्य का प्रकाश, सत्य ज्ञान स्वरुप है, सत्य सर्वत्र है, सत्य सदा है, और सत्य सबका हितेशी, साक्षी है | बुद्धि वो ज्ञान भर लो, मन में सदभाव भर लो, इंद्रिय में चरित्र निर्माण कर लो | बस हो गया……. ये तीन भी पढ़ लिया आपके ऊपर बड़ा उपकार किया . ऐसे हमने तीन पढ़ दिया वैसे प्रभु तुम्हारे परे कृपा कर दिई | प्रभु के साथ रहो वास्तव में रहो लेकिन ये पता नहीं इसलिए दुःख भोग रहे हो | वास्तव में हो लेकिन जो तुच्छ है उसको तो मै और मेरा मन और जो स्वास्वत है उसको समजते है वो दूर है, दुर्लभ है, पराये है  तो जो स्वास्वत है उसको समजते है वो दूर नहीं है, दुर्लभ नहीं है, पराये नहीं है | वो कभी बिछड़ता नहीं उसके लिए जरा खोज कर ले | उसको जरा अपना मान लो | इसके लिए जरासा जिज्ञासा जगा ले मंगल हो जायेगा मंगल | जयराथ भगवान ने भागवत में पंच विषयोंको मनुष्य के लिए बडे दुर्गम विषय में उनको पार कर लिया | देखेने की आसक्ति सुनने की चखने की वा वा सुनने की काम विकार, एक एक विकार को जितने के लिए बारा – बारा वर्ष का साधन भी बताया तब मन उसे विकार से विकलांग होता है | फिर क्या वेदव्यासजी बोले दिखते है भगवान पराशर के सदगुरु लेकिन वही है बोले – येतत सर्वम गुरु भक्त्या | ये सब गुरु भक्तिसे हो जाता है |

कार्य नहीं ना शेष मोह कभी ना ठग सके | ऐसा नहीं की मोह सुबहें ना ठग सके, मोह रात को ना ठग सके, मोह अमावश्या को ना ठक सके, कभी ना ठक सके | मोह कभी ना ठग सके पिच्छा नहीं आवेश पूर्ण गुरु के पामिनी पूर्ण गुरु कहलावे| ये प्रभु, ये मेरे भगवान, ये मेरे लीलाशाहजी  भगवान मागने तो आये कुछ और ले गए कुछ | मागने तो आये थे तो शिवजी का दर्शन घड़ा दिया लेकिन शिवजी जैसे शिवजी तो है | दाता तो तू सहृद भी है, उदार भी है राजा को क्या दान करेगा ? शेठ्जी तो क्या दान करेगा? कर्ण भी तो क्या दान करेगा ? चीज वस्तु का दान करेगा | अपने कवच का दान करेगा कर्ण लेकिन भगवान तो आपने आप सबसे बड़ा दाता तू ही है भगवान | दाताओं दान करते है वो भी तेरी सत्ता है | हे हरि ….. हे हरि ……

Saral hai Bhakti (सरल है भक्ति ) – Asaram ji Bapu

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