भजन

लाखो दरबार दुनिया में यू तो

                             लाखो दरबार दुनिया में यू तो 

hami se hai jaman 382

 

यदि हमारा मन ईर्ष्या-द्वेष से रहित बिल्कुल शुद्ध हो तो जगत की कोई वस्तु हमें नुक्सान नहीं पहुँचा सकती | आनंद और शांति से भरपूर ऐसे महात्माओं के पास क्रोध की मूर्ति जैसा मनुष्य भी पानी के समान तरल हो जाता है | ऐसे महात्माओं को देख कर जंगल के सिंह और भेड़ भी प्रेमविह्वल हो जाते हैं | सांप-बिच्छू भी अपना दुष्ट स्वभाव भूल जाते हैं |

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