Ashram News

दिल्ली हाई कोर्ट ने दी क्लीन चिट…

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और कहा सभी धर्मों का सम्मान और आदर करते हैं संत आशारामजी बापू के सभी शिष्य ।

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के आश्रम की प्रवक्ता नीलम बहन दूबे के खिलाफ किये गये केस को क्वैश (खारिज) करते हुए मंगलवार 12 अगस्त को दिल्ली उच्च न्यायालय की माननीय न्यायाधीश सुनिता गुप्ता ने कहा कि इस केस में एफ.आई.आर. बनती ही नहीं है ।

 

एक लम्बे अरसे से कुछ मिडिया चैनलों द्वारा भारत के सम्माननीय संत श्री आशारामजी बापू के बारे में अनर्गल कुप्रचार करते हुए जनता को गुमराह किया जा रहा था । जिसमें चैनलों की डिबेट के दौरान आश्रम की प्रवक्ता नीलम दूबे द्वारा ये कहे जाने पर कि जो सत्य की राह पर चलते हैं, उन पर झूठे आरोप बरसों से लगाये जाते रहे हैं । हमारे देश में कई संतों का इतिहास उठाकर देखा जाय तो पहले भी कई संतों-महापुरुषों पर झूठे अनर्गल आरोप लगाकर निर्दोष संतों को जेल में डाल दिया गया, बाद में समाज ने उन्हें पहचाना और उनकी पूजा भी की । इसमें संत कबीरजी, गुरु नानकदेवजी, गोस्वामी तुलसीदासजी इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं ।

 

इसे विवादित बयान बताकर कुछ लोगों के द्वारा इसे सिखों का अपमान बताया गया और एफ.आई.आर. दर्ज की गयी । इस संदर्भ में 5-6 महीने से न्यायालय में मामला चल रहा था । उच्च न्यायालय ने सभी दलीलें सुनने के बाद यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया है कि संत आशारामजी बापू के शिष्य सभी धर्मों का आदर व सम्पूर्ण सम्मान करते हैं । नीलम दूबे ने ये वाक्य जानबूझकर या किसी धर्म का अपमान करने के लिए नहीं कहे थे । ये अपने शब्दों से किसीको ठेस नहीं पहुँचाना चाहती थीं । फिर भी सिख भाइयों की भावना आहत न हो इसलिए उन्होंने उनसे क्षमा भी माँग ली । इसलिए इसमें केस नहीं बनता है ।

नीलम बहन दूबे को बाइज्जत बरी किया गया ।

 

 

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