Tithis

तिथि और दिवस विशेष योग !

तिथि और दिवस विशेष योग जैसे रविवारि सप्तमी, बुधवारी अष्टमी, मंगली चतुर्थी, सोमवती अमावस्या,पूर्णिमा,
लाभ पंचमी, साढ़े तीन मुहूर्त, नवरात्री, आदि दिवस विशेष पर ऊपवास, जप, ध्यान, दान, सत्संग-श्रवण
अभ्यास करने से आरोगय एवम आध्यात्मिक उन्नति होती है. महापुरुषों की खोज विधि विधान,
पुरुषार्थ, मन, आत्मा और परमात्मा इनका विशेष मेल करने मे सहायक होती है.  जिज्ञासु के लिये
तत्परता और मार्ग क्रमण प्राप्त होती है. सुनिये और पढिये इसी मे सबकुछ ………

नक्षत्र – ज्योतिष में २७ नक्षत्र है.  ३६० अंश के भाग चक्र को २७ भागो में विभक्त करे तब हर भाग १३-२० अंश आता है.  एक नक्षत्र २४ घंटे रहता है.  कभी कभी २४ घंटे से ज्यादा समय ले लेता है.  चंद्रमा को जो समय १३-२० अंश पार  करने में लगता है उसे नक्षत्र कहते है. सवा  दो नक्षत्रों की एक चन्द्रमा राशी होती है.  प्रत्येक नक्षत्र को ४ चरणों में विभाजित किया गया है.  कुल २७ में ६ नक्षत्र गंमुल  के होते है.  ग्रहों की संख्या ९ है, प्रत्येक ग्रह ३ नक्षत्रों का स्वामी होता है.

कृतिका, उत्तर फाल्गुनी, उत्तर आशाडा, रोहिणी, हस्त, श्रावण, मृगशिरा, चित्रा, धनिस्था, अश्लेशा, ज्येष्ठा, रेवती, पुनर्वसु, विशाखा, पुरवा, भाद्रपद, भरनी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्व आशाडा, पुष्य,

अनुराधा, उत्तर भाद्रपद, आर्द्रा, स्वाति, सतभिषा, अश्विनी, मघा, मूल –  इस प्रकार २७ नक्षत्र है.

योग –  हब सूर्य और चन्द्रमा गति में १३-२० अंश का अंतर हो एक योग बनता है.  शुभ और अशुभ मिलकर २७ योग है.  इनकी आवश्कयता यात्रा, मुहुर्त में पड़ती है.  आत्मिक उन्नति और आरोग्यता के लिए भी इनका लाभ होता है.  महापुरुषों ने ऐसे वार या दिवस के साथ बने योग से लाभ उठाने की युक्तियाँ खोज रक्खी है.

विष्कुम्भ, प्रीती, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगंड, सुकर्मा, घृति, शूल, गंड, वृद्धि, धृव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतिपात, वरियान, परिधि, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, ब्रह्म, इन्द्र, वैधृति   इस प्रकार २७ योग है.

विशेष योग ऐसे है……..

१. रविवार की सप्तमी आरोग्य प्रदान करने में सक्षम है | इसको अचला सप्तमी भी बोलते है | सूर्यग्रहण के समान इस का पुण्य है लाख गुना फल होगा जप का | सूर्यग्रहण के समय अथवा चंद्रग्रहण के समय स्नान, जप, ध्यान आदि से जो फल होता है वो फल होगा और रविवार की सप्तमी को अगर मानसिक गुरुपूजन का स्नान, जप, ध्यान आदि पूजन किया जाये तो वो फल अक्षय होगा | उस फल का क्षय नहीं होता, पुण्य का फल का क्षय होगा सुख भोगने से, पाप का फल होगा दुःख भोगने से, लेकिन गुरुपूजन का फल अक्षय होगा, नष्ट नहीं होगा, शाश्वत से मिलाने वाला होगा |

२. वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन श्याम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना | प्रार्थना कर देना, बैठ के जप करना | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जलदी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है |

३. वार्षिक महाशिवरात्रि – इस दिन हिम्मत है तो – सुबह से सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिये | हर महाशिवरात्रि को अगर कोई करे भाग्य की रेखा ही बदल सकती है | ये करना ही चाहिये १५ से लेकर ४५ साल के उम्र के लोगों को |

४. मासिक शिवरात्रि को मंगलवार  उसे भोम प्रदोष योग कहते है ….उस दिन नमक, मिर्च नहीं खाना चाहिये, उससे जलदी फायदा होता है | मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। उस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –
मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।

कभी नींद १२ से २ के बीच खुल जाती है तो पित्त की प्रधानता है | उस समय मिश्री मिश्रित ठंडा पानी…. न हो थोडा गुनगुना पानी पी ले… पित्त का शमन होगा ….नींद अच्छी आयेगी |
लेकिन २ से ६ बजे तक अनिद्रा और दुःख होता तो वायु है | तो मिश्री और जीरा ….कूट के रख दे ,सेक के | जीरा और मिश्री मिलाके पीना चाहिये | लेकिन ठंडा पिने से जठराग्नि मंद होगी | रात को पानी नहीं पीना चाहिये, थोडा गुनगुना पानी पी ले |

५. षट्तिला एकादशी है | स्नान, उबटन जिसमे जौ और तिल पड़ा हो | जौ डाला हुआ पानी पीना, तिल डाला हुआ पानी लेना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना ये पापनाशक प्रयोग है |

६. वराह भीष्म तिल द्वादशी | तिल का उपयोग करें स्नान में, प्रसाद में, हवन में, दान में और भोजन में | और तिल के दियें जलाकर सम्पूर्ण व्याधियों से रक्षा की भावना करोगे तो ब्रम्हपुराण कहता है कि तुम्हे व्याधियों से रक्षा मिलेगी |

७.भीष्म अष्टमी, भीष्म श्राद्ध दिवस है | भीष्म के नाम से सूर्य को अर्घ्य दिया, भीष्मजी को अर्घ्य दिया तो संतान हिन् को संतान मिल सकती है और आरोग्य आदि प्राप्त होता है |

८. भविष्योत्तर पुराण में बताया कि  माघी अमावश्या के दिन  अगर भगवान ब्रह्माजी  का कोई पूजन करें, श्लोक और गायत्री मंत्र बोलकर कोई ब्रम्हाजी को नमन करते है और थोड़ी देर शांत बैठे और फिर गुरुमंत्र का जप करें तो उनको विशेष लाभ होता है | जो भाई-बहन जो सत्संग में आते है वो दैवी सम्पदा पाये और लौकिक सम्पदा भी पाये | किसी के सिर पे भार न रहें | दैवी सम्पदा से खूब धनवान हो और लौकिक धन की भी कमी न रहें |
मंत्र इस प्रकार है –

स्थानं स्वर्गेथ पाताले यन्मर्ते किंचिदत्तंम | तद्व्पोंत्य संधिग्धम पद्मयोंने प्रसादत: ||

गायत्री मंत्र –

ॐ भू भुर्व: स्व: तत सवितुर्वरेण्यं | भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो न: प्रचोदयात् ||

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