नवरात्रि विशेष

नवरात्रियों में किस दिन किन देवी का पूजन करे और कैसे करें ? (Navratri 25th Sept to 2nd Oct 2014)

नवरात्रियों में किस दिन किन देवी का पूजन करे और कैसे करें ?

(Navratri 25th Sept to 2nd Oct 2014)

नवरात्रि के दिनों का अर्थ

  •     नवरात्रि के प्रथम तीन दिन होते हैं माँ काली की उपासना  के होते हैं …….जिसमे अपने काले कर्मो की निवृति के लिए जप किया जाता है ।
  •     नवरात्रि के दूसरे ३ दिन लक्ष्मी की उपासना के होते है …….ताकि हम सफल सम्पदा के अधिकारी बनें ।
  •     आखिरी ३ दिन सरस्वती की उपासना के होते हैं ………ताकि हमारे जीवन में प्रज्ञा ज्ञान का अर्जन हो । उसके लिए सारस्वत्य मंत्र का जप और सूर्य नारायण का ध्यान करना चाहिये ।

(नवरात्रि :- 25th Sept to 2nd Oct 2014 )

Pujya Bapuji Ahmadavad-6th April 11

 

Spiritual rules for all nine days of Worshiping goddess Durga – Navratri (25th Sept to 2nd Oct 2014) – Pujya Sant Shri Asharam ji Bapu Discourses on Navratri

 

माँ दुर्गा का नवरात्रि में पूजन और नियम
परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी
सत्संग के मुख्य अंश :
* देवी भागवत के तीसरे स्कन्द में भगवान व्यास जी ने शारदीय नवरात्रि की बड़ी भारी महिमा बताई है
* दोनों नवरात्रि में ऋतु परिवर्तन होता हैं इसलिए व्रत, उपवास और भगवती की आराधना का बड़ा महत्त्व है अगर उपवास और आराधना नहीं करते तो आगे चलकर बड़ा भारी रोग होता है विश्रांति और उपवास रोगों के कणों को भस्म कर देती है
* ९ दिन के नवरात्रि नहीं रख सकते तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी का व्रत रखने से पूरे नवरात्रि का फल मिलता है
* देवी की स्थापना के लिए १३.५ फुट लंबा और १०.५ फुट चौड़ा कमरा हो तो वास्तु के हिसाब से अच्छा है
* कुवांरी कन्याओ की पूजन विधि को भगवान व्यास जी ने जन्मेजय को बताया
* १ वर्ष की कन्या को विशेष ज्ञान नहीं होता
* पहले दिन २ वर्ष की कन्या का “कुवांरी भगवती” के रूप में पूजन करें(अंग भंग न हो, उसके पिता हो, विधवा की कन्या न हो) – दुःख, दरिद्रता मिटती है
* दूसरे दिन ३ वर्ष की कन्या को “त्रिमूर्ति” कहते हैं – धर्म, अर्थ और कामना की पूर्ती के लिए भगवती के रूप में पूजन करे
* तीसरे दिन ४ वर्ष की कन्या को “कल्याणी” कहते हैं – विद्या, विजय,राज्य और सुख की इच्छा वाले भगवती के रूप में पूजन करे
* चौथे दिन ५ वर्ष की कन्या को “रोहिणी” कहते हैं — रोग नाश के लिए “या देवी सर्वभूतेषु आरोग्य रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः” (दरिद्रता मिटाने के लिए — सम्पत्ति) पूजन करें
* पांचवे दिन ६ वर्ष की कन्या को “काली” कहते हैं — शत्रु पर विजय पाने के लिए पूजन करें
* छठे दिन ७ वर्ष की कन्या का पूजन “चंडिका” के रूप में करे — ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति में सफलता मिलती है
* सातवे दिन ८ वर्ष की कन्या का पूजन “शाम्भवी देवी” के रूप में करें — दूसरों को मोहित और दुःख, दरिद्रता दूर करने के लिए, शत्रुओ पर धावा बोलने के लिए और साम्राज्य पाने के लिए पूजन करें
* आठवें दिन ९ वर्ष की कन्या का पूजन “दुर्गा देवी” के रूप में करें — कठिन कार्य को सिद्ध करने के लिए और दुष्टों, शत्रुओ का नाश करने के लिए
* नवमी को १० वर्ष की कन्या का पूजन “सुभद्रा देवी” के रूप में करें — मनोरथ सिद्धि और संकल्प सामर्थ्य बढ़ाने के लिए !

 

सुरेशानंद जी  :- देवी भागवत मे महर्षि वेदव्यास जी ने बताया है कि नवरात्रि के दिनो मे इस मन्त्र का 1,2 माला जप करे या दिन भर मानसिक जप भी कर सकते हैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा ! * जिन बहनो माताओं के जीवन में बहुत ज्यादा कष्ट आता हो – * भविष्योत्तर पुराण में आता हैं नवरात्रि स्थापना के दिन (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को) अशोक वृक्ष का निम्न मंत्र से पूजन करें| सीता जी ने भी लंका के अशोक वाटिका में इस मंत्र से अशोक वृक्ष का पूजन किया था अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र न कुले (अशोक वृक्ष का पूजन जल आदि दाल दे, दिया दिखा दे) * ॐ ह्रीं गौर्यै नमः ! का भी जप कर सकते हैं * सारस्वत्य मंत्र का भी जप कर सकते हैं * लक्ष्मी जी का बीज मंत्र भी जप कर सकते हैं – श्रीं… श्रीं… श्रीं… – दिन भर ये जप होता रहे मन में तो भी अच्छा !

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