Vijayadashmi

दशहरा

इस दिन किसी भी वस्तु,
परिस्थिति को नियंत्रित करने का संकल्प
जल्दी फलता है l दशहरा की शाम
की संध्या का समय “विजय काल“ कहलाता है ।
विजय के नक्षत्र व गृह विजय दिलाने में
सहायता करते हैं l संध्या के समय बाहर सैर सपाटे
की बजाय इस समय १-२ घंटे जप-ध्यान
करना चाहिए | इस समय में इन मन्त्रों का जप
तो अवश्य करें l
1) ‘ॐ’ का जप करने से देवदर्शन, लौकिक
कामनाओ की पूर्ति, आध्यात्मिक चेतना में वृद्धि,
साधक की ऊर्जा एवं क्षमता में वृद्धि होती है l
2) दशहरा की संध्या को देवी का सुमिरन कर के
इस मंत्र का जप किया जाता है-
“ॐ अपराजितायै नमः”
3) इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते
हुए इस मंत्र की एक माला जप करें
“पवन तनय बल पवन समाना,
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि,
जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥”

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