कार्तिक मास माहात्म्य, कार्तिक मास व्रत

कार्तिक मास माहात्म्य : ८ अक्टूबर से ६ नवम्बर

कार्तिक मास व्रत : अक्टूबर सेनवम्बर

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Kartic Maas Mahatmya ( कार्तिक मास माहात्म्य)

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी

सत्संग के मुख्य अंश :

* कार्तिक मास के समान कोई मास नही, सतयुग के समान कोई युग नही, वेद के समान कोई शास्त्र नही और गंगा जी के

सामान कोई तीर्थ नही |

* कार्तिक मास में पालने योग्य नियम —

* दीपदान करें, तुलसी वन या तुलसी के पौधे लगाये, तुलसी को सुबह आधा-एक गिलास पानी देना, स्वर्ण दान का फल देता

है |

* भूमि पर शयन अथवा गद्दा हटाकर, सादा गुदड़ी बिछा कर तख़्त पर शयन तथा ब्रह्मचर्य का पालन करने से जीवात्मा

का उद्धार होता है |

* उड़द, मसूर आदि भारी चीजों का त्याग तथा तिल का दान करें तथा आज कल नदिया शुद्ध नही है तो मानसिक स्नान

नदी में कर लें |

* साधू-संतो का सत्संग, जीवन चरित्र का अनुसरण करके, मोक्ष प्राप्ति का इरादा बना ले |

* आंवले के वृक्ष की छाया में भोजन करने से एक वर्ष तक के अनगिनत पाप नष्ट हो जाते हैं, आंवले के उबटन से स्नान

करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है, और अधिक प्रसन्नता मिलती है, संक्रांति, ग्रहण और रविवार को आंवले का उपयोग नही

करना चाहिये |

* कार्तिक मास में अगर सभी दिन स्नान न कर पाए तो अंतिम ३दिन (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा) को सूर्योदय से

पहले स्नान कर लें |

* अनजाने में जूठा खा लिया हो तो बाद में आंवला, बेल, ईख चबा लेने से जूठे के दोष से मुक्त हो जाता है |

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