Ashram News

संत श्री आशारामजी आश्रम में दीवाली पर हजारों बच्चो ने किया सात दिवसीय अनुष्ठान शिविर

दिनांकः 29-10-2014

प्रेस-विज्ञप्ति

हजारों विद्यार्थियों ने लिया संत आशारामजी आश्रम अहमदाबाद में हुए 7 दिवसीय विद्यार्थी शिविर का लाभ


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कुप्रचारकों ने भले ही संत आशारामजी बापू व उनके आश्रमों को बदनाम करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया हो लेकिन उनके शिष्यों एवं समर्थकों की श्रद्धा तोड़ने में वे असफल ही रहे । इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है २३ से २९ अक्टूबर तक दीपावली पर अहमदाबाद आश्रम में हुए ७ दिवसीय विद्यार्थी अनुष्ठान शिविर में उमड़ा विद्यार्थियों का सैलाब ।

ब्राह्ममुहूर्त में जागरण, भगवन्नाम-जप, ध्यान, कीर्तन, सत्संग-श्रवण, वैदिक शास्त्रों एवं श्लोकों का पाठ, प्रार्थना, योगासन, प्राणायाम तथा पीपल, तुलसी व सूर्य को अर्घ्‍यदान, तुलसी-सेवन आदि भारतीय संस्कृति के जिन आदर्श नियमों को संत आशारामजी बापू अपने सत्संगों में बताते आये हैं, उनका अपनी दिनचर्या में पालन कर बच्चों ने सर्वांगीण उन्नति का अनुभव किया । घर जा के भी इसी दिनचर्या का पालन करने का बच्चों ने संकल्प लिया ।

इन 7 दिनों में परीक्षा में सफलता पाने के गुर, यादशक्ति एवं एकाग्रता बढ़ाने के उपाय, स्वस्थ रहने की सरल युक्तियाँ व माता-पिता की आज्ञापालन की महत्ता शिविरार्थी नौनिहालों ने सीखी-समझी । शिविर में हुई भजन-कीर्तन, गायन, वक्तृत्व तथा लिखित स्पर्धा आदि में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया । बच्चों ने सामूहिक सेवा तथा गायों को गोग्रास खिलाकर गौ-सेवा भी की ।

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आयोजकों ने बताया कि शिविर में विद्यार्थियों में शिक्षाएँ आत्मसात् करने का उत्साह देखा गया लेकिन उनकी आँखों में आँसू व हृदय में वेदना थी बापूजी के प्रत्यक्ष दर्शन न होने की । उनकी पुकार बापूजी तक पहुँचीं और शिविर के प्रथम दिन ही बापूजी का दिवाली शुभ संदेश प्राप्त हुआ जिसे पढ़-सुनकर विद्यार्थी भाव-विभोर हो गये । चौथे दिन बापूजी द्वारा भेजा गया किशमिश और तुलसी का प्रसाद पाकर विद्यार्थियों की खुशी का ठिकाना न रहा । शिविर की पूर्णाहुति पर पुनः पूज्यश्री के आशिर्वचन आये, जिसमें परमात्मज्ञान की दिव्य कुंजियों का अनमोल प्रसाद पाकर बच्चे व साधक धन्य-धन्य हो उठे ।

divali shivir children (3)

भोजन में बच्चों को देशी गाय के दूध, खजूर, चारोली व पुष्टिदायक औषधियों से युक्त खीर भी दी गयी । नूतन वर्ष के दिन बच्चों को हड्डियों तक के रोगों का शमन करनेवाले पंचगव्य का पान कराया गया । इसमें बापूजी का स्पर्श किया हुआ जल भी मिलाया गया था । शिविर में बच्चों ने संकल्प लिया कि ‘जिस तरह माता सीता की निर्दोषता को लव-कुश ने जन-जन को समझाया था, उसी तरह निर्दोष बापूजी की सच्चाई को समाज तक हम पहुँचायेंगे ।

भारतभर से आये इन विद्यार्थियों के जीवन में भारतीय संस्कृति के महान संस्कारों को पाने की जो ललक देखी गयी, उसे देखकर पूज्य बापूजी द्वारा भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प की साकाररूप में कुछ झलके देखने को मिलीं ।

divali shivir children (2)

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