संत वाणी

Victory Over Death

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आँखों के द्वारा, कानों के द्वारा दुनियाँ भीतर घुसती है और चित्त को चंचल करती है । जप, ध्यान, स्मरण, शुभ कर्म करने से बुद्धि स्वच्छ होती है । स्वच्छ बुद्धि परमात्मा में शांत होती है और मलिन बुद्धि जगत में उलझती है । बुद्धि जितनी जितनी पवित्र होती है उतनी उतनी परम शांति से भर जाती है । बुद्धि जितनी जितनी मलिन होती है, उतनी संसार की वासनाओं में, विचारों में भटकती है ।

आज तक जो भी सुना है, देखा है, उसमें बुद्धि गई लेकिन मिला क्या? आज के बाद जो देखेंगे, सुनेंगे उसमें बुद्धि को दौड़ायेंगे लेकिन अन्त में मिलेगा क्या?

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