False Allegations

देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की बाढ़

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देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की गम्भीर अवदशा को देखते हुए दिल्ली के सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र भट्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में झूठे दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहाः “दिल्ली में चलती बस में रेप की घटना के बाद ऐसा माहौल बन गया है कि यदि कोई महिला बयान दे देती है कि उसके साथ रेप हुआ है तो उसे ही अंतिम सत्य मान लिया जाता है और कथित आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाप आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाता है। इसके चलते देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की बाढ़ सी आ गयी है, अपराध के आँकड़े बढ़ रहे हैं।”

आँकड़े बताते हैं कि 2012 में 46 प्रतिशत दोषमुक्त हुए लेकिन 2013 के शुरुआती 8 महीनों में ही यह आँकड़ा 75 प्रतिशत पर जा पहुँचा। विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित कानून ‘अस्पष्ट’ होने के कारण उसका गलत रूप से इस्तेमाल हो रहा है। एक सीनियर प्रासीक्यूटर ने कहाः ‘दोषमुक्त होने के 90 प्रतिशत मामलों में तथाकथित पीड़िताएँ और आरोपी व्यक्ति के बीच आपसी दुश्मनी जैसी बातें सामने आयी हैं।”

कानून की रहम का आजकल तथाकथित पीड़िताएँ बेहद नाजायज फायदा उठा रही हैं। वे न्यायालय की ओर से भयमुक्त होने के कारण निर्दोष लोगों पर बिना सिर-पैर के लांछन लगाने

में तनिक भी नहीं हिचकिचाती हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन तीव्र गति से बढ़ते झूठे

बलात्कार के मामलों की रोकथाम के लिए कौन से कदम उठाती है ।

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