False Allegations

यह कौन सी पत्रकारिता है ?

श्री आशारामायण,गुरुसेवा,प्रभु जी,गुरुदेव,मेरे राम,हरिओम,आशाराम जी,आसाराम बापू,नारायण,yss,bsk,mum,dpp,syvmr,gurukul,hariomgroup.org,ashram.org,google+,false allegation

किसी भी मामले में पत्रकारिता की भूमिका के आठ आधार होते हैं। 1.निष्पक्षता-यानी कोई आरोप लगा तो किसी पक्ष और विपक्ष में दुराग्रह से रहित होकर उसकी रिपोर्टिंग और टिप्पणियाँ। 2. आरोप जितना है  उसी सीमा तक सीमित रहना यानी अतिश्योक्ति से बचना। 3.जितने तथ्य हैं उतने ही सामने लाना। 4.अपनी ओर से आरोपों के साथ समाचार न परोसना। 5.आरोप को उस तरह प्रस्तुत करना ताकि वह आरोप ही लगे, तथ्य नहीं। 6. जब तक आरोप साबित न हो, आरोपी का चरित्रहनन न करना। 7.किसी भी तरह हमारे व्यवहार से कोई उत्पीड़ित या पीड़ित न हो। 8.चाहे कितना बड़ा अपराध उस व्यक्ति ने क्यों न किया हो, यदि उसके व्यक्तित्व के कुछ सकारात्मक पहलू हैं तो उन्हें अवश्य सामने लाना।

अब इन आठ आधारों पर संत आशाराम जी बापू पर आरोप प्रकरण में मीडिया की भूमिका को खड़ा करिये तो निष्कर्ष आपके सामने होगा। चैनलों ने आरोप को ऐसे उछाला मानो अपराध साबित हो गया हो। भाषा का स्तर भी इतना गिर गया है कि बस आरोप लगा और उसके लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग आरम्भ ! पूरे प्रकरण में ठोस तथ्यों की जगह हास्यास्पद अटकलों को किस तरह सच बनाकर प्रस्तुत किया गया, उसके कई उदाहरण हैं।

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