संत वाणी

दृढ़ इच्छाशक्ति व परम एकाग्रता के धनी – स्वामी विवेकानंदजी

श्री आशारामायण,गुरुसेवा,प्रभु जी,गुरुदेव,मेरे राम,हरिओम,आशाराम जी,आसाराम बापू,नारायण,yss,bsk,mum,dpp,syvmr,gurukul,hariomgroup.org,ashram.org,google+,false allegation

तुम अग्नि की भीषण लपट, जलते हुए अंगार हो।

तुम चंचला की द्युति चपल, तीखी प्रखर असिधार हो।

तुम खौलती जलनिधि-लहर, गतिमय पवन उनचास हो।

तुम राष्ट्र के इतिहास हो, तुम क्रांति की आख्यायिका।

भैरव प्रलय के गान हो, तुम इन्द्र के दुर्दम्य पवि।

तुम चिर अमर बलिदान हो, तुम कालिका के कोप हो।

पशुपति रूद्र के भ्रूलास हो, तुम राष्ट्र के इतिहास हो।

ऐसे वीर धर्मरक्षकों की दिव्य गाथा यही याद दिलाती है कि दुष्ट बनो नहीं और दुष्टों से डरो भी नहीं। जो आततायी व्यक्ति बहू-बेटियों की इज्जत से खेलता है या देश के लिए खतरा पैदा करता है, ऐसे बदमाशों का सामना साहस के साथ करना चाहिए। अपनी शक्ति जगानी चाहिए। यदि तुम धर्म और देश की रक्षा के लिए कार्य करते हो तो ईश्वर भी तुम्हारी सहायता करता है।

‘हरि ॐ.. हरि ॐ… हिम्मत… साहस… ॐ…ॐ…बल… शक्ति… हरि ॐ… ॐ… ॐ…’ ऐसा उच्चारण करके भी तुम अपनी सोयी हुई शक्ति को जगा सकते हो। अभी से लग जाओ अपनी सुषुप्त शक्ति को जगाने के कार्य में और प्रभु को पाने में।

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