संत वाणी

ज्ञानी द्वेष करता दिखता है, लेकिन गहराई से सम होता है !

मातृ-पितृ पूजन,parents worship day,valentine day,mother-fathers day,love day,achutaya product,rishi prasad,rishi darshan,श्री आशारामायण,गुरुसेवा,प्रभु जी,गुरुदेव,मेरे राम,हरिओम,आशाराम जी,आसाराम बापू,नारायण,yss,bsk,mum,dpp,syvmr,gurukul,hariomgroup.org,ashram.org,google+,false allegation

जिस क्षण हम संसार के सुधारक बन खड़े होते हैं उसी क्षण हम संसार को बिगाड़नेवाले बन जाते हैं | ज्ञानी द्वेष करता दिखता है, लेकिन गहराई से सम होता है ! शुद्ध परमात्मा को देखने के बजाय जगत को बिगड़ा हुआ देखने की दृष्टि बनती है | सुधारक लोग मानते हैं कि : भगवान ने जो जगत बनाया है वह बिगड़ा हुआ है और हम उसे सुधार रहे हैं |’ वाह ! वाह ! धन्यवाद सुधारकों ! अपने दिल को सुधारो पहले | सर्वत्र निरंजन का दीदार करो | तब आपकी उपस्थिति मात्र से, आपकी दृष्टि मात्र से, अरे प्यारे ! आपको छूकर बहती हवा मात्र से अनन्त जीवों को शांति मिलेगी और अनन्त सुधार होगा | नानक, कबीर, महावीर, बुद्ध और लीलाशाह बापू जैसे महापुरुषों ने यही कुंजी अपनायी थी |

Advertisements
Standard

Your Opinion

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s