भजनामृत

मेरे गुरवर चाहे सबका हित ही

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जन्म मरण के विषचक्र से मुक्त होने का कोई मार्ग नहीं है क्या ? सुख-दुःख, हर्ष-शोक, लाभ-हानि मान-अपमान की थप्पड़ों से बचने का कोई उपाय नहीं है क्या ?

है…अवश्य है | हे प्रिये आत्मन ! नाशवान पदार्थों से अपना मन वापिस लाकर सदगुरु के चरणकमलों में लगाओ | गुरुभक्तियोग का आश्रय लो | गुरुसेवा ऐसा अमोघ साधन है जिससे वर्त्तमान जीवन आनन्दमयबनता है और शाश्वत सुख के द्वार खुलते हैं |

गुरु सेवत ते नर धन्य यहाँ |

तिनकुं नहीं दुःख यहाँ वहाँ ||

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