Poornima Sandesh

Pujya Sant Shri Asaramji Bapu Buddh Purnima Sandesh 4th May 2015

Asaramji Bapu Buddh Purnima Sandesh 4th May 2015

Asaramji Bapu Buddh Purnima Sandesh 4th May 2015

Pujya Bapuji Letter1

Pujya Bapuji Letter1

Pujya Bapuji Letter2

Pujya Bapuji Letter2

Pujya Bapuji Letter3

Pujya Bapuji Letter3

बुद्ध पूर्णिमा (४.५.१५ ) यह पूनम तुम्हारे जीवन में स्वास्थ्य और शुभ संकल्प फलित करने वाला बने | पक्का संकल्प करो कम से कम १० मिनट ॐ ॐ का होटो से जप करें आसन लगाकर एक जगह बैठ के  , इसको बढ़ाते जाना | बदलने वाले और सुख दुःख के थपेड़े देने  वाले मिथ्या संसार ,तन  , मन , धन जाने वाला – मैं सत्य स्वरुप चैतन्य स्वरुप , आनंदस्वरूप अपने आनंद स्वाभाव में बढ़ता जाऊँगा | ॐ आनंदम्  ॐ शांति हरि ॐ ॐ गुरु  | हरि और गुरु के अनुभव में एकाकार होते जाऊँगा |  एक हरि दुसरे गुरु तीसरे हम ये व्यावहारिक सत्ता में परमार्थ सत्ता |  पूर्ण गुरु किरपा मिली पूर्ण गुरु का ज्ञान, हरि गुरु हम न तुम दफ्तर गुम | एक आनंद चैतन्य अपना आपा ही भासमान हो रहा है , एक ही समुद्र का जल ऊपर ऊपर अनेक रूप दिख रहा है | एक ही पृथ्वी अनेक देशों राज्यों शहरों गाँवों और गलियारों में बटी  सी दिख रही है | एक ही आकाश घाट , मठ  , इसाई , पारसी , जीव जंतु में व्याप रहा है उसको जानने वाला मैं चिदाकाश ॐ स्वरुप आत्मा हूँ | कहीं बाढ़ कहीं भूकंप कहीं नया प्रलय , तो कहीं मौतें तो कहीं मिलन , तो कहीं बिछुड़न , कहीं नाश , कहीं उत्पत्ति | जैसे सागर की तरंगें ऊपर से देखने भर को हैं गहरे में वही शांत उपाधि ऐसे ही तुम गहराई में शांत साक्षी चैतन्य  अमर आत्मा हो | यह ॐ कार का गुंजन तुम्हें असली स्वतंत्र स्वभाव में पहुँचा  देगा | सामान्य आदमी भले अपने को बाह्य तीर्थों में या विषय विकारों में अपने को उलझाता रहे लेकिन धन भागी हैं वे लोग जिन्हें  आत्मवेत्ता गुरुओं का ज्ञान मिल जाता है | सत्संग , साहित्य , नियम , व्रत पालने वाले पार होजाते हैं जन्म मरण से | ऐसे गुरु भक्तों के लिए शिव गीता में आया है – धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोदभवः| धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता || लग जाओ होठों में जप करने को १० मिनट का प्रोग्राम | अभी से शुरू करदो ..वाह |शीघ्र बन  जाओगे धर्मात्मा और महान आत्मा | ज्ञानेश्वरी गीता में आता है ऐसे साधकों को देखकर तीर्थ बोलते हैं – हम किसको पावन  करें ? अन्तरंग जप और साधना वाले गुरुभक्त से तो हम  पावन  होते हैं  |
भृगु ऋषि का शिष्य शुक्र का आदर करते हुए इंद्र देवता अपने सिंहासन पर उसको बैठाते हैं  और अर्घ्य पद से पूजन करते हैं | आज मेरा स्वर्ग पवित्र हुआ ब्रह्मवेत्ता गुरु के  शिष्य आए | भृगु जैसे ज्ञानी गुरु के शिष्य शुक्र जी आए  | ॐ ॐ | फिर से  धन्या माता पिता धन्यो…| बाह्य विकास और विनाश तुच्छ हैं , स्वप्ना है | रावन की सोने की लंका का विकास और विनाश तुच्छ हो गया | मीरा , शबरी , एकलव्य , एकनाथ की गुरुभक्ति सर्वोपरि साबित हुई , होती रहेगी तुम्हारी भी ॐ ॐ ॐ |

 

Advertisements
Standard

Your Opinion

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s