Guru Vani

अमृत के घूँट

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सरलता, स्नेह, साहस,

धैर्य, उत्साह एवं तत्परता

जैसे गुणों से सुसज्जित तथा

दृष्टि को ‘बहुजनहिताय….

बहुजनसुखाय….’ बनाकर सबमें

सर्वेश्वर को निहारने से ही आप

महान बन सकोगे।

ॐॐॐॐॐ

 

हिलनेवाली, मिटनेवाली

कुर्सियों के लिए छटपटाना

एक सामान्य बात है, जबकि

परमात्मप्राप्ति के लिए छटपटाकर

अचल आत्मदेव में स्थित होना

निराली ही बात है।

यह बुद्धिमानों का काम है।

ॐॐॐॐॐ

 

मन को

फूलों की तरह

सुंदर रखो ताकि

भगवान की

पूजा में लग सके।

ॐॐॐॐॐ

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