इश्वर प्राप्ति, भगवान की खोज, भजन

मधु संचय

 

pujya asharam ji bapu

Pujya Asharamji Bapu

 

अज्ञान को मिटाओ

जब-जब दुःख हो, परेशानी हो, भय हो, तब समझ लेना कि यह अज्ञान की उपज है। कहीं न कहीं नासमझी को पकड़ा है, इसलिए दुःख होता है। विकार उठे तो समझ लो कि नासमझी है, इसलिए बह गये हो विकार में। फिर बहते ही न रहो, सावधान हो जाओ। विकारों ने सबक सिखा दिया कि इसमें कोई सार नहीं। परेशानी के सिवाय और कुछ नहीं है।क्रोध ने सिखा दिया कि इसमें हानि के सिवाय और कुछ नहीं है। मोह ने सिखा दिया कि इसमें मुसीबत के सिवाय और कुछ नहीं है।

काम शाश्वत नहीं है, राम शाश्वत है। काम आया और गया, लेकिन राम तो पहले भी था, अब भी है और बाद में भी रहेगा। अपने राम स्वभाव को जानो…. अपने शांत स्वभाव को जानो… अपने अमर स्वभाव को जानो, अपने चिदघन चैतन्य राम को जानो। उस राम को जाननेवाला राम से अलग नहीं रहता। वह राममय हो जाता है।

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