Satsang

सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?

पुण्य उदय हुआ और पाप क्षीण हुआ इसकी पहचान क्या है ? ईश्वर की तरफ़ चलने का दृढ़ निश्चय हो गया तो समझ लो कि पुन्य उदय हो गया।
काया कच्ची (मिटने वाली) है, धन कच्चा है, मन चंचल है फ़िर भी आदमी अचल रहने के लिय प्रयत्न कर रहा है। काल उसका मखोल उड़ाता है कि मरने वाले शरीर और चंचल मन वाला मनुष्य स्थिर रहने की कैसी बेवकूफ़ी कर रहा है।
यक्ष ने धर्मराज युधिष्ठर को सवाल पूछा :”इस पृथ्वी पर सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? ऐसा कौन सा आश्चर्य है जो सबको भुलावे में डालता है?”
तो युधिष्ठर ने कहा:
“संसार से रोज-रोज प्राणी यमलोक में जा रहे है, किन्तु जो बचे हुए है, वह सर्वदा जीते रहने की इच्छा करते है। इससे बढ़कर आश्चर्य और क्या होगा।”

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