संस्कार सिंचन

बच्चे बनेंगे प्रतिभाशाली

 

ajapa jap

बाल्यावस्था में ग्रहणशीलता अत्यधिक होती है | जो भी संस्कार उस अवस्था में दिये जायें, सब सहज में ह्रदय में घर कर जाते है | इस अवस्था में बच्चों की स्मरणशक्ति को तीव्र बनाने के लिये उन्हें श्लोक, गिनती आदि कंठस्थ कराये जाते हैं | किसी विशेष विषय में बच्चों का अधिक ध्यान दिलाया जाय तो उस विषयसंबंधी ज्ञानतंतु विकसित होने लगते हैं | ज्ञानतंतु सुषुप्त रहते हैं, उन्हें यौगिक क्रियाओं द्वारा जागृत किया जाता है | इसलिए जप या अन्य किसी योगाभ्यास द्वारा कोई शारीरिक या मानसिक क्रिया करते हैं तो उसका आपके विशेष केन्द्रबिंदु से सम्पर्क होता है | इससे उस केन्द्र का विकास होने लगता है, जिसे हम ‘ प्रज्ञा ’ कहते हैं |
अजपा – जप एक बहुत ही सरल एवं शक्तिशाली क्रिया है | शास्त्रों में बहुत प्राचीन समय से ही अजपा की साधना को बतलाया गया है | अजपा एक सहज साधना है, केवल इसे जगाना है | संत कबीरजी लिखते हैं :
सहज सहज सब कोइ कहै, सहज न चीन्है कोय |
जा सहजै विषया तजै, सहज कहावै सोय ||

पूज्य बापूजी द्वारा बतायी गयी श्वासोच्छ्वास की साधना भी विद्यार्थियों के लिये परम हितकारी है | पूज्य बापूजी कहते हैं : “श्वासोच्छ्वास की साधना करो, श्वास अंदर जाय तो ‘ॐ’ , बाहर आये तो गिनती | इससे श्वास तालबद्ध होंगे | बुद्धि बलवान होगी व मन को नियंत्रण में कर लेगी, इन्द्रिय – संयम रहेगा और संयम से अंतरात्मा का सुख मिलेगा, मन प्रसन्न रहेगा, बुद्धि में ज्ञान आयेगा |”
श्वासोच्छ्वास की गिनती या अजपा – जप से चेतना का विकास होता है और आत्मचेतना के विकास से सुख व सफलता की प्राप्ति होती है |
स्त्रोत – लोककल्याण सेतु – अप्रैल २०१५ से

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