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साजिश को सच का रूप देने की मनोवैज्ञानिक रणनीति


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संत श्री आशारामजी बापू के खिलाफ जो षड्यंत्र चल रहा है, उसका मनोवैज्ञानिक तरीके से किस तरह से सुनियोजन किया गया है, यह मैं एक मनोविज्ञानी होने के नाते आपको बताना चाहती हूँ । आठ मुख्य पहलू समझेंगे कि किस तरह इस साजिश को सच का मुखौटा पहनाया जा रहा है ।

(१) जनता के विशिष्ट वर्गों पर निशाना : समाज के शिक्षित, जागरूक, उच्च एवं मुख्यतः युवा वर्ग को निशाना बनाया गया क्योंकि इनको विश्वास दिलाने पर ये तुरंत प्रतिक्रिया करते हैं ।

(२) षड्यंत्र का मुद्दा : देश की ज्वलंत समस्या ‘महिलाओं पर अत्याचार’ को मुख्य मुद्दा बनाया है । इस भावनात्मक विषय पर हर कोई तुरंत प्रतिक्रिया दे के विरोध दर्शाता है ।

(३) रणनीति : चीज को यथार्थपूर्ण, विश्वसनीय, प्रभावशाली दिखाने जैसी मार्केटिंग रणनीति का उपयोग करके दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है ।

दर्शक मनोविज्ञान का भी दुरुपयोग किया जा रहा है । कोई विज्ञापन हमें पहली बार पसंद नहीं आता है लेकिन जब हम बार-बार उसे देखते हैं तो हमें पता भी नहीं चलता है कि कब हम उस विज्ञापन को गुनगुनाने लग गये । बिल्कुल ऐसे ही बापूजी के खिलाफ इस बोगस मामले को बार-बार दिखाने से दर्शकों को असत्य भी सत्य जैसा लगने लगता है ।

(४) प्रस्तुतिकरण का तरीका : पेड मीडिया चैनलों के एंकर आपके ऊपर हावी होकर बात करना चाहते हैं । वे सिर्फ खबर को बताना नहीं चाहते बल्कि सेकंडभर की फालतू बात को भी ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बताकर दिनभर दोहराते हैं और आपको हिप्नोटाइज करने की कोशिश करते हैं ।

(५) भाषा : खबर को बहुत चटपटे शब्दों के द्वारा असामान्य तरीके से बताते हैं । ‘बात गम्भीर है, झड़प, मामूली’ आदि शब्दों की जगह ‘संगीन, वारदात, गिरोह, बड़ा खुलासा, स्टिंग ऑपरेशन’ ऐसे शब्दों के सहारे मामूली मुद्दे को भी भयानक रूप दे देते हैं ।

(६) आधारहीन कहानियाँ बनाना, सुटिंग ऑपरेशन्स और संबंधित बिन्दु : ‘आश्रम में अफीम की खेती, स्टिंग ऑपरेशन’ आदि आधारहीन कहानियाँ बनाकर मामले को रुचिकर बना के उलझाने की कोशिश करते हैं ।

(७) मुख्य हथियार : बहुत सारे विडियो जो दिखाये जाते हैं वे तोड़-मरोड़ के बनाये जाते हैं । ऐसे ऑडियो टेप भी प्रसारित किये जाते हैं । यह टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग है ।

इसके अलावा कमजोर, नकारात्मक मानसिकतावालों को डरा के या प्रलोभन देकर उनसे बुलवाते हैं । आश्रम से निकाले गये २-५ बगावतखोर लोगों को मोहरा बनाते हैं ताकि झूठी विश्वसनीयता ब‹ढायी जा सके ।

(८) मनोवैज्ञानिक वातावरण तैयार करना : बापूजी की जमानत की सुनवाई से एक दिन पहले धमकियों की खबरें उछाली जाती हैं, कभी पुलिस को, कभी माता-पिता और लड़की को तो कभी न्यायाधीश को । ये खबरें कभी भी कुछ सत्य साबित नहीं हुर्इं ।

अब आप खुद से प्रश्न पूछिये और खुद ही जवाब ढूँढिये कि क्या यह आरोप सच है या एक सोची-समझी साजिश ?

और एक बात कि केवल पेड मीडिया चैनल ही नहीं बल्कि इसीके समान प्रिंट मीडिया भी खतरनाक तरीके से जनमानस को प्रभावित कर रहा है । इन दोनों से सावधान रहना चाहिए ।

– शिल्पा अग्रवाल,

प्रसिद्ध मनोविज्ञानी

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निर्दोष, निष्कलंक बापू


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किसीने ठीक ही लिखा है कि हिन्दू तो वह बूढ़े काका का खेत है, जिसे जो चाहे जब जोत जाय । उदार, सहिष्णु और क्षमाशील इस वर्ग के साथ वर्षों से बूढ़े काका के खेत की तरह बर्ताव हो रहा है । हिन्दू समाज का नेतृत्व करनेवाले ब्रह्मज्ञानी संतों, महात्माओं, समाज-सुधारकों, क्रांतिकारी प्रखर वक्ताओं पर जिसके मन में जो आता है, वह कुछ भी आरोप मढ़ देता है । अब तो दुष्प्रचार की हद हो गयी, जब ७३ वर्षीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू पर साजिशकर्ताओं की कठपुतली, मानसिक असंतुलन वाली कन्या द्वारा ऐसा घटिया आरोप लगवाया गया, जिसका कोई सिर-पैर नहीं, जिसे सुनने में भी शर्म आती है । इससे देश-विदेश में फैले बापूजी के करोड़ो भक्तों व हिन्दू समाज में आक्रोश का ज्वालामुखी सुलग रहा है ।

कुदरत के डंडे से कैसे बचेंगे ?

आरोप लगानेवाली ल‹डकी की मेडिकल जाँच रिपोर्ट में चिकित्सकों ने आरोप को साफ तौर पर नकार दिया है । इससे स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ बापूजी को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है लेकिन प्रश्न यह है कि करोड़ो भक्तों के आस्था के केन्द्र बापूजी के बारे में अपमानजनक एवं अशोभनीय आरोप लगाकर भक्तों की श्रद्धा, आस्था व भक्ति को ठेस पहुँचानेवाले कुदरत के डंडे से कैसे बच पायेंगे ? शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि ‘भगवान स्वयं का अपमान सहन कर सकते हैं मगर अपने प्यारे तत्त्वस्वरूप संतों का नहीं ।’

व्यावसायिक हितों की चिंता

इन झूठे, शर्मनाक आरोपों के मूल में वे शक्तियाँ काम कर रही हैं, जो यह कतई नहीं चाहती हैं कि बापूजी की प्रेरणा से संचालित गुरुकुलों के असाधारण प्रतिभासम्पन्न विद्यार्थी आगे चलकर देश, संस्कृति व गुरुकुल का नाम रोशन करें । दुनिया जानती है कि भारतीय वैदिक गुरुकुल परम्परा पर आधारित शिक्षण एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के क्षेत्र में बापूजी के मार्गदर्शन में देशभर में चल रहे गुरुकुल आज कॉन्वेंट शिक्षण पद्धति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं । एक तरफ कई व्यावसायिक संस्थाओं की लूट इस पहाड़ के नीचे आ रही है तो दूसरी तरफ इंटरनेट और अश्लील साहित्य सामग्री के जरिये देश के भविष्य को चौपट करने की सुनियोजित साजिश पर पानी फिर रहा है । ओजस्वी-तेजस्वी भारत निर्माण के बापूजी के संकल्प को हजम कर पाना उन साजिशकर्ताओं के लिए अब काँटोंभरी राह साबित हो रहा है । ऐसे में गुरुकुलों की बढ़ती लोकप्रियता, विश्वसनीयता की छवि और मेधावी बच्चों की प्रतिभा को कुचलने के लिए अब कुछ इस तरह से कीचड़ उछाला जा रहा है कि माता-पिता अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजें ही नहीं ।

पहले गुरुकुल के बच्चों पर तांत्रिक विद्या का मनग‹ढंत आरोप लगाया गया परंतु जब सर्वोच्च न्यायालय में इन आरोपों की हवा निकल गयी तो अब सीधे बापूजी के चरित्र पर ही कीच‹ड उछालने लगे हैं । मगर सूर्य पर थूँकने का दुस्साहस करनेवाले खुद ही गंदे हो जाते हैं । जो समाज को मान-अपमान, qनदा-प्रशंसा और राग-द्वेष से ऊपर उठाकर समत्व में प्रतिष्ठित करते हुए समत्वयोग की यात्रा करवाते हैं, भला ऐसे संत के दुष्प्रचार की थोथी आँधी उनका क्या बिगा‹ड पायेगी ? टीआरपी के पीछे दौ‹डनेवाले चैनल बापू को क्या बदनाम कर पायेंगे ? बापू के भक्तों की हिमालय-सी दृ‹ढ श्रद्धा के आगे आरोप की बिसात एक तिनके के समान है ।

चाहे धरती फट जाय तो भी सम्भव नहीं

वैसे आज किसी पर भी कीच‹ड उछालना बहुत आसान है । पहले बापूजी के आश्रम के लिए जमीन ह‹डपने, अवैध कब्जे, गैर-कानूनी निर्माण के थोकबंद आरोप लगाये गये मगर सत्य की तराजू पर सभी झूठे, बेबुनियाद साबित हुए । जब इनसे काम नहीं बना तो बापूजी और उनके द्वारा संचालित आश्रम, समितियों और साधकों पर अत्याचार किये गये लेकिन भक्तों ने इनका डटकर मुकाबला किया । साजिश करनेवालों ने हर बार मुँह की खायी । कितने तो आज भी लोहे के चने चबा रहे हैं तो कितने कुदरत के न्याय के आगे खामोश हैं परंतु बावजूद इसके आज भी बापूजी के ऊपर अनाप-शनाप आरोप लगवानेवालों को अक्ल नहीं आयी । साजिशकर्ताओं के इशारे पर बकनेवाली एक ल‹डकी ने बापूजी पर जैसा आरोप लगाया है, दुनिया इधर-की-उधर हो जाय, धरती फट जाय तो भी ऐसा सम्भव नहीं हो सकता है । यह घिनौना आरोप भक्तों की श्रद्धा, साधकों की आस्था को डिगा नहीं सकता है ।

पूरा जीवन खुली किताब

बापूजी का पूरा जीवन खुली किताब की तरह है । उसका हर पन्ना और उस पर लिखी हर पंक्ति समाज का युग-युगांतर तक पथ-प्रदर्शन करती रहेगी । बापूजी कोई साधारण संत नहीं, वे असाधारण आत्मसाक्षात्कारी महापुरुष हैं ।

दरअसल सबसे ब‹डी समस्या यह है कि सारे आरोप हिन्दू संतों पर ही लगाये जाते हैं क्योंकि हिन्दू चुपचाप सब सह लेता है । दुनिया के और किसी धर्म में ऐसा होने पर क्या होता है यह किसीसे छुपा नहीं है । हमारी उदारता और सहिष्णुता का दुरुपयोग किया जाता है । तभी तो महापुरुषों को बदनाम करने का षड्यंत्र चलता ही रहा है, फिर चाहे कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी हों या फिर सत्य साँर्इं बाबा हों । आरोप लगानेवालों ने तो माता सीताजी व भगवान श्रीकृष्ण पर भी लांछन लगाया था । ऐसे में यह कल्पना कैसे की जा सकती है कि समाज को संगठित कर दिव्य भारतीय संस्कृति की विश्व-क्षितिज पर पताका लहरानेवाले विश्ववंदनीय संत पर आरोप न लगाये जायें ? संत तो स्वभाव से ही क्षमाशील होते हैं लेकिन उनके भक्त अपमान बर्दाश्त करनेवाले नहीं हैं । झूठ के खिलाफ सत्य की यह धधकती मशाल अन्याय और अत्याचार के अँधेरे को कुचलकर ही रहेगी ।

– श्री निलेश सोनी (वरिष्ठ पत्रकार)

प्रधान सम्पादक, ‘ओजस्वी है भारत !’

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Dirty politics (घिनौनी राजनीति)


Dirty politics (घिनौनी राजनीति)

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कितना घिनौना दुष्प्रचार ! कितनी घिनौनी राजनीति !

छिदवाड़ा गुरुकुल की सहेलियों को जाते-जाते आरोप लगानेवाली लड़की कहती गयी कि ‘‘अब देखना गुरुकुल का क्या होता है ! मैं अपना नाम करूँगी । गुरुकुल की जड़ उखाड़ के रख दूँगी । न होगा गुरुकुल, न मुझे आना प‹डेगा ।”

यह बात आरोप करनेवाली लड़की की सहेली ने अपने पिता को बतायी और अन्य लोगों तक पहुँची, हम तक भी पहुँची । छिदवाड़ा से शाहजहाँपुर १००० कि.मी. से अधिक व शाहजहाँपुर से जोधपुर १००० कि.मी. से अधिक, कुल २००० कि.मी. से अधिक अंतर हो जाता है । अब सोचो, इतने दूर से माँ-बाप के साथ लड़की को बुलाकर, माँ बाहर बरामदे में बैठी है, बाप भी वहीं है उस समय उसका मुँह दबाकर हाथ घुमाते रहे… क्या ऐसा सम्भव है ? ‘मैं चिल्लाती रही और माँ-बाप को भी नहीं सुनायी दिया ! पास में स्थित किसान के घर में रहनेवालों को भी सुनायी नहीं दिया !’ कैसी कपोलकल्पित कहानी है !

दुष्कर्म नहीं हुआ और यह बात लड़की स्वयं बोलती है, उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी बोलती है । मुँह दबाया हो ऐसी कहीं कोई खरोंच भी लैबोरेटरी रिपोर्ट में नहीं पायी गयी । फिर भी ‘दुष्कर्म है, दुष्कर्म है…’ – ऐसा मीडिया का दुष्प्रचार कितना घिनौना है ! राजनीति कितनी घिनौनी है ! साजिशकर्ताओं की, धर्मांतरणवालों की साजिश कितनी घिनौनी है ! कोई भी समझ सकता है आसानी से कि साजिश है, राजकारण है, मनग‹ढंत कहानी है । और पाँच दिन बाद न जोधपुर में न शाहजहाँपुर में, एफआईआर दर्ज की जाती है दिल्ली में रात को २-४५ बजे ! यह तथ्य तो साजिश की पोल ही खोल देता है । पुलिस पर ऊपर से दबाव ऐसा था कि उनको तो मानसिक दबाव देकर बापूजी से हस्ताक्षर ही कराने थे, वे उन्होंने करवा लिये । दो-दो, तीन-तीन दिन का जागरण और मानसिक दबाव… पुलिस के मनमाफिक लिखे हुए कागजों पर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा के लाखों-करो‹डों लोगों को सताने व उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया गया । इस घिनौनी साजिश से तो हृदय भी काँपता है, कलम भी काँपती है । आश्चर्य है ! आश्चर्य है !! आश्चर्य है !!!

सत्यवक्ताओं, ‘ऋषि प्रसाद’ के पाठकों को,साधकों को, और ashram.org के Viewers को  भगवान दृढ़ता दे और सुंदर, सुहावनी सूझबूझ दे । भारतीय संस्कृति को मिटानेवालों की संतों को बदनाम करने की मलिन मुरादें नाकाम हों । सभी संतों, प्रवक्ताओं और पाठकों को ईश्वर विशेष-विशेष आत्मबल, ओज अवश्य-अवश्य प्रदान करते हैं । ॐ ॐ ॐ… उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम – ये छः सद्गुण जहाँ, पद-पद पर प्रभु की प्रेरणा-सहायता वहाँ ! ॐ ॐ ॐ…

करोड़ो भक्तों को, जिन्होंने आँसू बहाये, जप किया, धरना दिया, धैर्य, शांति का परिचय दिया व कुप्रचार को सुप्रचार से काटने का यह भगीरथ कार्य किया और करते रहेंगे, उनको और उनके माता-पिता को धन्यवाद है ! धन्या माता पिता धन्यो…

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The Flip Side of Asaramji Bapu


Asaramji Bapu

The Flip Side: Ek sach jo aap tak pahunch na saka – Documentary [HD]

Documentary to bring out flipside of Sant Asaram Bapu c

The Flip Side (एक सच जो आप तक पहुँच न सका) is a 2015 Indian documentary film by Utpal Kalal, depicting the jaw-dropping story of Saint Asaram Bapu.

Synopsis:
Indie Filmmaker Utpal Kalal and Cinematographer Kaustubh Manchekar travel to the Asaram Bapu’s Motera Ashram in Ahmedabad, looking to observe the Ashram’s reality and investigate the Sadhaks living there. They spent 20 days in the Ashram, interacting with each of the inhabitants, and closely observing each and every ashram activity. They have asked unrestrained, hard-hitting questions based on whatever allegations have been put up, and tried to research all the related aspects without any prejudice, and unabashedly. They watched and analyzed many hours of footage archives, and when the filming and research was complete, what they had was an unforgettable experience with them, a soul stirring reality that has not reached the common man, until now.

(Asaram Bapu who is currently lodged at Central Jail, Jodhpur, is exercising his legal recourse against the charges of molestation. It’s believed that he has been framed in an international conspiracy and gone through the worst media trial ever.)

Credits:
Presented by: UK Pictures
Directed, Written, Narrated by: Utpal Kalal
Director of Photography: Kaustubh Manchekar
Edited by: Sanjay Chaudhary & Sachin Nikam
Original Music by: Vishal & Shivram
Production Audio: Lokesh

Copyright © 2015 by UK Pictures Entertainment.
Any reproduction, republication or distribution of all or part of this film is expressly prohibited, unless UK Pictures Entertainment grants you prior written permission.

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आशाराम बापू को शत्-शत् अभिनन्दन |


यूँ तो धरा पर जन्म एक आम इंसान भी लेता है और वहीं एक जीव भी लेता है | पर उसके कर्म ही उसको दिव्य बनाते हैं | पूज्य गुरुदेव ने भी सत्संग में कई बार इसका वर्णन किया है “जन्म कर्म च में दिव्यं” अर्थात् उसके जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य माने जाते हैं जो जीते जी परमात्मा के रास्ते चल पड़ता है और आत्मज्ञानी संतों की खोज करके अपने को ब्रह्म मस्ती में सराबोर कर परम पद को प्राप्त कर लेता है |

आज हम साधक भी धन्य हुए ऐसे गुरुदेव को पाकर जिन्होंने अपने जीवन काल में सदैव आत्म मस्ती  में रमण किया और जन जन तक इसका सन्देश पंहुचाया | स्वयं तो समाज सेवा और परहित के उत्थान में लगे ही रहे और सभी को इसका लाभ समझाया | बचपन से ही दैविक चमत्कारों से अनजान दुनियावालों को आकर्षित करने वाले पूज्य संत आज भी जन – जन के लोक लाडले और हिन्दू धर्म के हितैषी बनकर सबके दिलों पर राज कर रहे हैं | और उनके ही वचनों और संस्कारों का अनुसरण करते हुए उनके साधक भी समाज सेवा के कार्यों में नित्य प्रति उत्साह और जोश के साथ लगे रहते हैं |

यूँ तो बापूजी कहते हैं कि जन्म तो शरीर का होता है, आत्मा तो अजर-अमर-अविनाशी है पर भला उनके साधक कहाँ ये बात मानने वाले हैं | वो तो अपने गुरुदेव का जन्म दिवस मनाने हेतु कदम से कदम और ताल से ताल मिलाकर समाज सेवा के कार्यों में जोर-शोर से लगे हुए हैं और सदैव लगे रहते हैं |

ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों की परम्पराओं पर दृष्टि डाली जाये तो वो आज के युग में भी जीवित है | आइये देखते हैं कैसे :

1) श्री राघवानंद जी महाराज

2) स्वामी रामानंद जी स्वामी

3) संत कबीर दास जी महाराज

4) संत कमाल साहिब

5) श्री दादू दीनदयाल जी महाराज

6) स्वामी निश्चलदास जी महाराज

7) स्वामी केशवानंद जी महाराज

8) स्वामी लीलाशाह जी महाराज

9) संत श्री आशारामजी बापू

गुरु स्वामी रामानंद जी महाराज की परम्परा अपने शिष्य संत कबीरदास जी पंथ से लेकर पूज्य संत श्री आशारामजी बापू जैसे महापुरुषों तक की ये संत परम्परा आज भी सजीव है । हमें विश्ववासियों को, भारत के सपूतों को इस सच्चाई से अवगत कराना होगा कि पूज्य संत श्री आशारामजी बापू कोई सामान्य संत नहीं हैं । ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों की संत परम्परा हम आज भी प्रत्यक्ष देख सकते हैं |

हर युग में संतों पर श्रद्धा रखने वाले श्रधालु लाभ लेते आयें हैं वहीँ दूसरी ओर कुतर्की लोग संतों पर जुल्म भी करते आये हैं । लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कभी डिगाये नहीं डिगती क्योंकि श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में आदिभौतिक, आदिदैविक और आध्यात्मिक लाभ एवं चमत्कार प्रत्यक्ष अनुभव किये हुए होते हैं इसलिए वे सत्पथ से कभी विचलित नहीं होते और अपने सत् धर्म का प्रचार-प्रसार करते चले जाते हैं ।

इसी तरह आज संत श्री आशारामजी बापू अपने 75 वर्षीय उम्र में भी लगातार 50 वर्षों से समाज हित के दैवी कार्य करते ही चले जा रहें हैं और आज कुतर्की और षड्यंत्रकारियों के कारण ऐसे महान संत को जेल में डाला गया । लेकिन उनके शिष्यों द्वारा समाज-उत्थान के कार्य आज भी प्रत्यक्ष हम विश्वभर में देख सकते हैं ।

जेल में होने के बावजूद ऐसे महान संत के दैवी कार्य बंद नहीं हुए हैं । आज भी कई जगह जप यज्ञ, भंडारे, जल सेवा, छाछ वितरण, कम्बल वितरण, हॉट केस आदि जीवनोपयोगी सामग्री जरूरतमंदों में वितरित की जाती है । साथ ही साथ बाल संस्कार, युवा सेवा संघ, महिला उत्थान कार्यक्रम, आश्रमों में पूजा-पाठ, भंडारा, योगासन आदि कई कार्यक्रम नित्यप्रति किये जा रहे हैं ।

कल आने वाले 10 अप्रैल 2015 को पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू के जन्मोत्सव को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी “विश्व-सेवा दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है  और जोधपुर में विशाल स्वच्छता अभियान भी पुरजोर तरीके से किया जा रहा है |

धन्य हैं ऐसे गुरुदेव और उनके ऐसे गुरुभक्त और उनकी सच्ची श्रद्धा और आस्था !! भारत के महान संतों-महापुरुषों को मेरा शत्-शत् नमन् !

 

 

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संत श्री आशारामजी आश्रम में दीवाली पर हजारों बच्चो ने किया सात दिवसीय अनुष्ठान शिविर


दिनांकः 29-10-2014

प्रेस-विज्ञप्ति

हजारों विद्यार्थियों ने लिया संत आशारामजी आश्रम अहमदाबाद में हुए 7 दिवसीय विद्यार्थी शिविर का लाभ


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कुप्रचारकों ने भले ही संत आशारामजी बापू व उनके आश्रमों को बदनाम करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया हो लेकिन उनके शिष्यों एवं समर्थकों की श्रद्धा तोड़ने में वे असफल ही रहे । इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है २३ से २९ अक्टूबर तक दीपावली पर अहमदाबाद आश्रम में हुए ७ दिवसीय विद्यार्थी अनुष्ठान शिविर में उमड़ा विद्यार्थियों का सैलाब ।

ब्राह्ममुहूर्त में जागरण, भगवन्नाम-जप, ध्यान, कीर्तन, सत्संग-श्रवण, वैदिक शास्त्रों एवं श्लोकों का पाठ, प्रार्थना, योगासन, प्राणायाम तथा पीपल, तुलसी व सूर्य को अर्घ्‍यदान, तुलसी-सेवन आदि भारतीय संस्कृति के जिन आदर्श नियमों को संत आशारामजी बापू अपने सत्संगों में बताते आये हैं, उनका अपनी दिनचर्या में पालन कर बच्चों ने सर्वांगीण उन्नति का अनुभव किया । घर जा के भी इसी दिनचर्या का पालन करने का बच्चों ने संकल्प लिया ।

इन 7 दिनों में परीक्षा में सफलता पाने के गुर, यादशक्ति एवं एकाग्रता बढ़ाने के उपाय, स्वस्थ रहने की सरल युक्तियाँ व माता-पिता की आज्ञापालन की महत्ता शिविरार्थी नौनिहालों ने सीखी-समझी । शिविर में हुई भजन-कीर्तन, गायन, वक्तृत्व तथा लिखित स्पर्धा आदि में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया । बच्चों ने सामूहिक सेवा तथा गायों को गोग्रास खिलाकर गौ-सेवा भी की ।

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आयोजकों ने बताया कि शिविर में विद्यार्थियों में शिक्षाएँ आत्मसात् करने का उत्साह देखा गया लेकिन उनकी आँखों में आँसू व हृदय में वेदना थी बापूजी के प्रत्यक्ष दर्शन न होने की । उनकी पुकार बापूजी तक पहुँचीं और शिविर के प्रथम दिन ही बापूजी का दिवाली शुभ संदेश प्राप्त हुआ जिसे पढ़-सुनकर विद्यार्थी भाव-विभोर हो गये । चौथे दिन बापूजी द्वारा भेजा गया किशमिश और तुलसी का प्रसाद पाकर विद्यार्थियों की खुशी का ठिकाना न रहा । शिविर की पूर्णाहुति पर पुनः पूज्यश्री के आशिर्वचन आये, जिसमें परमात्मज्ञान की दिव्य कुंजियों का अनमोल प्रसाद पाकर बच्चे व साधक धन्य-धन्य हो उठे ।

divali shivir children (3)

भोजन में बच्चों को देशी गाय के दूध, खजूर, चारोली व पुष्टिदायक औषधियों से युक्त खीर भी दी गयी । नूतन वर्ष के दिन बच्चों को हड्डियों तक के रोगों का शमन करनेवाले पंचगव्य का पान कराया गया । इसमें बापूजी का स्पर्श किया हुआ जल भी मिलाया गया था । शिविर में बच्चों ने संकल्प लिया कि ‘जिस तरह माता सीता की निर्दोषता को लव-कुश ने जन-जन को समझाया था, उसी तरह निर्दोष बापूजी की सच्चाई को समाज तक हम पहुँचायेंगे ।

भारतभर से आये इन विद्यार्थियों के जीवन में भारतीय संस्कृति के महान संस्कारों को पाने की जो ललक देखी गयी, उसे देखकर पूज्य बापूजी द्वारा भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प की साकाररूप में कुछ झलके देखने को मिलीं ।

divali shivir children (2)

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जोधपुर जेल का दीवाली का विहंगम दृश्य


हजारों दीप..
हजारों ज्योतियाँ..
उनके बिच आशारामजी बापू के हजारों भक्त!

जो साधक गुरूजी के सानिध्य में हर साल दीवाली मनाते थे , वे गुरुदेव के जोधपुर जेल में होने के कारण उनके विरह में जेल के बाहर दीप-दिया जलाकर अपने प्रेम और श्रद्धा का परिचय दे रहे है | किसी ने इन श्रद्धालुओं को बुलाया नही पर गुरु के प्रति उनके लगाव ने उन्हें भारत भर से यहा खिच के लाया है | जहा लोग अपने घर में परिवार और मित्रो सहित यह दीवाली का पर्व मना रहे है वे ही साधक इतने दूर अपने गुरुदेव की याद में यहा आये है |

पता नही (पेड़) मीडिया यह क्यों नही दिखाती ? क्यों लोगों के आँखों के सामने यह दृश्य प्रस्तुत नही किया जा रहा? इस अव्यवस्था के चलते साधक सोशल मीडिया का सहारा लेकर संतों की सच्चाई उजागर करने के लिए निरंतर लगे हुए है | सोशल मीडिया शिविर का आयोजन भारत में तिन अलग जगह पर किया जा रहा है| अमदावाद (८,९ नवम्बर) , गाजिआबाद (१५,१६ नवम्बर) और रायपुर (२२,२३ नवम्बर)  में होगा | यहा पर जानकारों द्वारा सोशल मीडिया सेवा पर प्रकाश डाला जाएगा | रजिस्ट्रेशन लिंक http://www.ashram.org/SocialMediaShivir.aspx

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जोधपुर जेल का यह विहंगम दृश्य स्पष्ट दर्शाता है जन-मानस में बापूजी के प्रति व्याप्त श्रद्धा और अचल विश्वास!

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