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Dirty politics (घिनौनी राजनीति)


Dirty politics (घिनौनी राजनीति)

Polytics

कितना घिनौना दुष्प्रचार ! कितनी घिनौनी राजनीति !

छिदवाड़ा गुरुकुल की सहेलियों को जाते-जाते आरोप लगानेवाली लड़की कहती गयी कि ‘‘अब देखना गुरुकुल का क्या होता है ! मैं अपना नाम करूँगी । गुरुकुल की जड़ उखाड़ के रख दूँगी । न होगा गुरुकुल, न मुझे आना प‹डेगा ।”

यह बात आरोप करनेवाली लड़की की सहेली ने अपने पिता को बतायी और अन्य लोगों तक पहुँची, हम तक भी पहुँची । छिदवाड़ा से शाहजहाँपुर १००० कि.मी. से अधिक व शाहजहाँपुर से जोधपुर १००० कि.मी. से अधिक, कुल २००० कि.मी. से अधिक अंतर हो जाता है । अब सोचो, इतने दूर से माँ-बाप के साथ लड़की को बुलाकर, माँ बाहर बरामदे में बैठी है, बाप भी वहीं है उस समय उसका मुँह दबाकर हाथ घुमाते रहे… क्या ऐसा सम्भव है ? ‘मैं चिल्लाती रही और माँ-बाप को भी नहीं सुनायी दिया ! पास में स्थित किसान के घर में रहनेवालों को भी सुनायी नहीं दिया !’ कैसी कपोलकल्पित कहानी है !

दुष्कर्म नहीं हुआ और यह बात लड़की स्वयं बोलती है, उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी बोलती है । मुँह दबाया हो ऐसी कहीं कोई खरोंच भी लैबोरेटरी रिपोर्ट में नहीं पायी गयी । फिर भी ‘दुष्कर्म है, दुष्कर्म है…’ – ऐसा मीडिया का दुष्प्रचार कितना घिनौना है ! राजनीति कितनी घिनौनी है ! साजिशकर्ताओं की, धर्मांतरणवालों की साजिश कितनी घिनौनी है ! कोई भी समझ सकता है आसानी से कि साजिश है, राजकारण है, मनग‹ढंत कहानी है । और पाँच दिन बाद न जोधपुर में न शाहजहाँपुर में, एफआईआर दर्ज की जाती है दिल्ली में रात को २-४५ बजे ! यह तथ्य तो साजिश की पोल ही खोल देता है । पुलिस पर ऊपर से दबाव ऐसा था कि उनको तो मानसिक दबाव देकर बापूजी से हस्ताक्षर ही कराने थे, वे उन्होंने करवा लिये । दो-दो, तीन-तीन दिन का जागरण और मानसिक दबाव… पुलिस के मनमाफिक लिखे हुए कागजों पर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा के लाखों-करो‹डों लोगों को सताने व उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया गया । इस घिनौनी साजिश से तो हृदय भी काँपता है, कलम भी काँपती है । आश्चर्य है ! आश्चर्य है !! आश्चर्य है !!!

सत्यवक्ताओं, ‘ऋषि प्रसाद’ के पाठकों को,साधकों को, और ashram.org के Viewers को  भगवान दृढ़ता दे और सुंदर, सुहावनी सूझबूझ दे । भारतीय संस्कृति को मिटानेवालों की संतों को बदनाम करने की मलिन मुरादें नाकाम हों । सभी संतों, प्रवक्ताओं और पाठकों को ईश्वर विशेष-विशेष आत्मबल, ओज अवश्य-अवश्य प्रदान करते हैं । ॐ ॐ ॐ… उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम – ये छः सद्गुण जहाँ, पद-पद पर प्रभु की प्रेरणा-सहायता वहाँ ! ॐ ॐ ॐ…

करोड़ो भक्तों को, जिन्होंने आँसू बहाये, जप किया, धरना दिया, धैर्य, शांति का परिचय दिया व कुप्रचार को सुप्रचार से काटने का यह भगीरथ कार्य किया और करते रहेंगे, उनको और उनके माता-पिता को धन्यवाद है ! धन्या माता पिता धन्यो…

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Politics

चाणक्य कौटिल्य


Achary Chanakay

 

कहते हैं कि आचार्य चाणक्यके पास एक चीनी यात्री आया था । वह जिस समय मिलने आया था, उस समय चाणक्य ( विष्णुगुप्त, कौटिल्य) कुछ लिख रहे थे । आपको तो ज्ञात ही है कि उस समय न तो बडे दीए थे और न ही बिजली थी । तेलके दीए जलाए जाते थे । उस दिन सायंकाल ऐसे ही एक दीपकके प्रकाशमें विष्णुगुप्त कुछ महत्त्वपूर्ण अभिलेख लिख रहे थे, तभी वहां वह चीनी यात्री आया । उस यात्रीका आचार्य चाणक्यने स्वागत किया, बैठाया एवं अपने हाथका अभिलेखन कार्य पूर्ण किया । कार्य पूरा करनेके पश्चात आचार्यने क्या किया, जानना चाहते हैं ? तो सुनिए, उनके सामने दो दीए थे । एक जला हुआ था  तथा दूसरा बुझा हुआ था । चाणक्यने प्रथम अपने सामनेका जलता दीप बुझाया, तत्पश्चात दूसरा दीप जलाया । यह देखकर चीनी यात्री अत्यन्त चकित हुआ । उसे लगा कि चाणक्यने ऐसा कर, किसी भारतीय प्रथाका पालन किया होगा । सम्भवतः भारतमें अतिथिके आगमनपर यहांके लोग ऐसा करते होंगे । उसने कुतूहलवश चाणक्यसे  प्रश्न किया, ‘आपके देशमें ऐसी कोई प्रथा है क्या, जिसके अनुसार अतिथिके आगमनपर जलता हुआ दीप बुझाकर दूसरा दीप जलाना पडता है ?’

उसकी ये बातें सुनकर आचार्य चाणक्यने कहा, ‘ऐसा नहीं है । मैं अभी जिस दीपके प्रकाशमें लिख कर रहा था, वह दीप, उसमें भरा तेल और कार्य तीनों मेरे राष्ट्रके थे । अर्थात, मैंने अपने राष्ट्रका कार्य राष्ट्रके धनसे किया । अब मैं आपसे जो चर्चा करनेवाला हूं, वह मेरा व्यक्तिगत विषय है, राष्ट्रका नहीं ! व्यक्तिगत चर्चामें राष्ट्रका तेल न लगे, इसलिए मैंने राष्ट्रका दिया हुआ दीप बुझाकर अपना दीप जलाया ।’

हमारे आचार्योंके विचार इतने उच्च थे कि यह सब जानकर मन चकित हो जाता है । इतनी ऊंचाईपर पहुंचे इन लोगोंको देखकर ऐसा लगता है कि हमें उनका थोडा तो भी अनुकरण करना चाहिए । कितना शुध्द बरताव, कितना शुध्द आचार, कितना शुध्द मन, कितना शुध्द चित्त एवं अंतःकरण रहा होगा उनका ! आप अपने मनमें थोडा सोचकर बताइए कि इन आचार्यजीको कौन-सी पदवी देनी चाहिए ? इतने उच्च  वैचारिक धरातलके आचार्यको क्या कहें ? हमारे लोग कब सीखेंगे इनसे ? वैसे तो राजनेताओंको इनसे सीख लेनी चाहिए; परन्तु लोग अभागे हैं । कोई सीखना  नहीं चाहता  ।

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Abhyas, ऋषि दर्शन, कथा अमृत, दर्शन ध्यान, ध्यानामृत, निर्भय नाद, विचार विमर्श, विवेक जागृति, संत वाणी, सनातन संस्कृति, Hindu, Innocent Saint, Journalism, Media, Om, Politics

संसार मुसाफिरखाना है।


संसार मुसाफिरखाना है। इसकी वस्तुएँ अपनी नहीं हैं। यह देह पाँच तत्त्वों से बनी हुई है। यह है तो किराये की वस्तु परंतु जीव इसे अपनी देह समझ बैठता है। वास्तव में न हम देह हैं और न देह हमारी है। देह तथा संसार में ‘मैं-मेरे’ की भावना नहीं करनी चाहिए। स्वयं को संसार तथा शरीर से पृथक इनका द्रष्टा-साक्षी मानना चाहिए। शरीर को अपने से पृथक जानोगे तो अखण्ड आनंद प्राप्त करोगे। जैसे ब्रह्मा-विष्णु को आनंद आता है, वैसी ही स्थिति हो जायेगी। भगवान को खूब याद करो। शब्द, स्पर्श, रूप, रस एवं गंध के आकर्षण से बचना चाहिए तथा यथासम्भव मोह-ममतारहित होकर संसार की वस्तुओं से काम लेना चाहिए। संसार को अनित्य जानकर उससे किनारा करते रहो। संसार एवं शरीर जड़ हैं। वे न अपने को पहचान सकते हैं, न दूसरे को। आपका घर, दुकान, गाड़ी, कपड़े, गहने आपको नहीं पहचान सकते हैं। जो भी उनका उपयोग करेगा, वे उसी के हो जायेंगे। शरीर की भी अपनी सत्ता नहीं है, यदि होती तो मरने के बाद भी व्यवहार करता। इस जड़ शरीर एवं संसार में भी चेतनता एवं ज्ञान की जो झलक मिलती है, वह चेतन तथा ज्ञानस्वरूप चैतन्य परमात्मा की ही है। यह सब उसी की सत्ता से चल रहा है।

nashvar sharir

यह प्रकृति का विधान है कि जिसे जिस समय जिस वस्तु की अत्यन्त आवश्कता होती है उसे पूरी करने वाला उसके पास पहुँच जाता है या तो मनुष्य स्वयं ही वहाँ पहुँच जाता है जहाँ उसकी आवश्यकता पूरी होने वाली है।

satsang mahima

बापूजी से ʹविश्व धर्म संसदʹ में पत्रकारों ने पूछाः
“भारत में ही भगवान के अवतार क्यों होते है ? हिन्दुस्तान में ही भगवान क्यों जन्म लेते हैं ? जब सारी सृष्टि भगवान की ही है तो आपके भगवान ने यूरोप या अमेरिका में अवतार क्यों नहीं लिया ? नानकजी या कबीरजी जैसे महापुरुष इन देशों में क्यों नहीं होते ?”

satsang mahima

तब बापूजी ने उनसे पूछाः “जहाँ हरियाली होती है वहाँ बादल क्यों आते हैं और जहाँ बादल होते हैं वहाँ हरियाली क्यों होती है ?”
उन्होंने जवाब दियाः “बापू जी ! यह तो प्राकृतिक विधान है।”

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तब बापूजी ने उत्तर दिया, “हमारे देश में अनादि काल से ही ब्रह्मविद्या और भक्ति का प्रचार हुआ है। इससे वहाँ भक्त पैदा होते रहे। जहाँ भक्त हुए वहाँ भगवान की माँग हुई तो भगवान आये और जहाँ भगवान आये वहाँ भक्तों की भक्ति और भी पुष्ट हुई । अतः जैसे जहाँ हरियाली वहाँ बादल और जहाँ बादल वहाँ हरियाली होती है वैसे ही हमारे देश में भक्तिरूपी हरियाली है इसलिए भगवान भी बरसने के लिए बार-बार आते हैं।”

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बापूजी दुनिया के बहुत देशों में घूमे, कई जगह प्रवचन भी किये परन्तु भारत जितनी तादाद में तथा शांति से किसी दूसरे देश के लोग सत्संग सुन पाये हों ऐसा आज तक किसी भी देश में नहीं देखा गया। फिर चाहे ʹविश्व धर्म संसदʹ ही क्यों न हो। जिसमें विश्वभर के वक्ता आये वहाँ बोलने वाले 600 और सुनने वाले 1500 ! भारत में तो हररोज सत्संग के महाकुंभ लगते रहते हैं। भारत में आज भी लाखों की संख्या में हरिकथा के रसिक हैं। घरों में ʹगीताʹ एवं ʹरामायणʹ का पाठ होता है। भगवत्प्रेमी संतों के सत्संग में जाकर, उनसे ज्ञान-ध्यान प्राप्त कर श्रद्धालु अपना जीवन धन्य कर लेते हैं। अतः जहाँ-जहाँ भक्त और भगवत्कथा-प्रेमी होते हैं वहाँ-वहाँ भगवान और संतों का प्रागट्य भी होता ही रहता है।

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#Bail4Bapuji, #Justice4Bapuji, #WhySoBiased, Controvercy, Dharm Raksha Manch, Dharna, Exclusive News, Indian Culture, Innocent Saint, Media, People's Opinion, Politics, Saint, Saint and People

Is Our Freedom Secure?


After Nirbhaya episode, the laws enacted have become perilous. Many innocent people are trapped because of misuse of laws that are unclear. More emphasis is being placed on the statement of the woman instead of the medical report. In 2012, 46% of the accused were proved innocent, this number reached 75% in the first 8 months of 2013. In 90% of the cases where the accused were innocent, the personal rivalary between the so-called “victim” and the accused was the cause of making accusations. Are the citizens of the country secure and free when such laws exist?

Statistics tell us that the Anti Dowry Act has become a tool used by estranged wives for taking revenge. As per the law, when the woman complains against the husband, all his family including parents, sisters and brothers are put in jail, it does not matter whether they are proven innocent later.  Charges are pressed in court in 93% of the reported cases but the conviction rate is 18%.

Currently 3,72,703 cases are pending out of which the accused will be acquitted in 3,17,000. Without any evidence, even before any charges are substantiated, many innocent people have been put in jail because of the provisions in such laws. Their lives are destroyed because of this. Are the citizens of the country considered secure and free with the existence of such laws?

Mr. Rajeev Jay Chairman of ‘Co-ordination council of All Bar Association’ states that the women and the parents or relatives of the minors themselves are misusing the sexual abuse laws such as POCSO. It has also been found that in many cases, girls abscond on their own and when discovered, level false allegations of sexual assault and kidnapping at the behest of their parents or relatives. Renowned Ex. Justice of the Supreme Court of India Shri Krishna states that ‘In the new rape laws, there have been such changes that are overly excessive, and very harsh.’

Are the citizens of the country considered secure and independent with the existence of such laws?

Laws to protect women have become a danger for them 2 member bench of the Supreme Court has said quoting the National Crime Records Bureau that ‘About 200000 people were arrested under the Anti-Dowry Law out of which 25% were women. Every year about 80,000 women are jailed out of which a vast majority are proved innocent.’  Are the rights and independence of women secure in deed?

Anti-Rape Laws are being grossly abused. Delhi High Court has said that cases have been found where women are misusing the harsh laws pertaining to rape. Justice Kailash Gambhir has said that “Clearly they are fooling the justice system’. The bench said “The court need to ensure that the rape case is not fraudulent.” Women especially those of younger age are being let go off their jobs because of fear of false persecution under rape laws. Women are being used to destroy the fabric of family ties”

Indian Government needs to revise such laws that are  severe societal disturbances and destroying family relationships. Criminals and Innocents both are being treated in the same way!

It is imperati​ve that the Government of India make the required changes in these laws. 

 

(Article in Sade Lok, Punjabi Weekly Published from California, Aug 28-Sept 4 Issue)

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Double Standards of Media Exposed (मिडिया का दोगलापन)

There have been no arrest calls for #Tejpal by administration. While incase of Sant #Asharam Bapuji, the administration was too quick to convict him on false accusations.

“संत-निंदक मिडिया” की बात को सच मानकर संत आशाराम जी बापू और नारायण साईं के पीछे पड़ने वाले लोग जबाब दे : –

तेजपाल के मामले में मिडिया जो सच्चाई दिखा रही वो सच्चाई नारायण साईं के मामले में क्यों छुपायी मिडिया ने ?

कानून के तहत जब आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट में होती है, तो बिना सुनवाई का उसकी गिरफ़्तारी नही होती |
जैसे की तेजपाल की सुनवाई टाल दी गयी तो मिडिया ने कितनी सफाई से बताई की तेजपाल को रहत मिली और
जब तक सुनवाई नही होगी तब तक तेजपाल की गिरफ़्तारी नही होगी |

लेकिन, यही सच्चाई इस मिडिया ने नारायण साईं के मामले में क्यों दबाई और क्यों कानून को ठेंगा दिखाते हुए समाज को गुमराह कीया,  इसका जबाब कोई देगा जनता को  ?
नारायण साईं की भी अग्रिम जमानत याचिका दोनों कोर्ट में लम्बित थी, जिसमे सेशन कोर्ट ने याचिका ख़ारिज की लेकिन अभी तक हाईकोर्ट ने सुनवाई नही की है |
तो फिर किस आधार में नारायण साईं के खिलाफ गैर जमानती वारंट जरी किया गया ?
और क्यों पुलिस ने उनको भगौड़ा घोषित किया, सभी कानून-नियम को ठेंगा दिखाके ?
मिडिया ने ये सच्चाई क्यों नही बताई समाज को ?
इसी मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार और पुलिस को फटकार लगाते हुए जबाब माँगा, तो फिर मिडिया इस बात को क्यों पचा गयी ?
मिडिया को तेजपाल के परिवार के आंसू दिखते है, लेकिन संत आशाराम जी बापू के लाखो भक्तो के आसू उसे तमाशा क्यों नजर आते है ?
क्या इन प्रश्नों का उत्तर देगा कोई बुद्धिजिवी जो दिनभर मिडिया की बात सुनकर संतो की निंदा करने में नही चुकता ?
आखिर क्यों ? ….
भगवान का शुक्रिया है की अभी भी “सच्चाई से बिमुख लोगो” को “मिडिया का दोगलापन” दिखाकर सचेत होने का मौका दे रहे है |

Media, Politics

Double Standards of Media Exposed (मिडिया का दोगलापन)

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Corrupt Politics

Politically motivated Conspiracy against Asaram Bapuji: DELHI

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Divide and Rule


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Divide and Rule – writings of a british agent

Hempher, the British agent who nurtured and encouraged Muhammad Wahhab to spring forth a new religious dogma, an antithesis of Islam, clearly understood that Islam had to be destroyed for the West to claim victory over Islam’s empires.

By his own admission, Hempher exposed in his memoir what he and his protégé, Wahhab set out to do in the name of greed and power. Hempher wrote, “We, the English people, have to make mischief and arouse schism in all our colonies in order that we may live in welfare and luxury. Only by means of such instigations will we be able to demolish the Ottoman Empire. Otherwise, how could a nation with a small population bring another nation with a greater population under its sway? Look for the mouth of the chasm with all your might, and get in as soon as you find it. You should know that the Ottoman and Iranian Empires have reached the nadir of their lives.

Therefore, your first duty is to instigate the people against the administration! History has shown that the source of all sorts of revolutions is public rebellions. When the unity of Muslims is broken and the common sympathy among them is impaired, their forces will be dissolved and thus we shall easily destroy them.”

Moreover, “Encourage oppressiveness among emperors. Encourage secularism, or the need to separate religion from state affairs. Aggravate economic decline through sabotage. Accustom statesmen to such indulgences as sex, sports, alcohol, gambling, and interest banking. Then, in order to make the new generation hostile towards their rulers and scholars, expose them for their corruption.”

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