The Truth

Wake Up Sadhak … #Asaram Bapu Ji


SAVDHAN, बैंक ठगी

WAKE UP SADHAK

FRAUD BANKING CALLS-freeze accounts-adhar card no. and verification code

CAUTION- BEWARE of Fraud Banking Calls. Banks don’t ask for PIN, Password or OTP one time password via mobile sms etc, this is beyond the RIGHTS of Banks. Thus, Never Ever Fall in to this Trap of Fraud Banking Calls, asking for PIN, Password. Your Bank PIN and Password are Highly Confidential and let it be so. Spread the Awareness. Recently many people has LOST INR 95, 56,52,000 /- due to this. People has requested RBI and Few of the Top PSUs to PUT up a CAUTION NOTICE in Banks/Branches in 3 Languages (English,Hindi and Local). They have replied and will give it a consideration.

An account freeze is an action taken by a bank or brokerage that prevents any transactions from occurring in the account. Typically, any open transactions will be cancelled, and checks presented on a frozen account will not be honored. Account freezes can be initiated by either the account holder or a third party.

मोबाइल फोन पर एक घंटी बजी और आपका अकाउंट फ्रीज़ कर दिया गया है ऐसा बताके आपकी बैंक डिटेल्स मांग लेते है इसके बाद आपको वेरिफिकेशन कोड पूछा जाता है जोकि OTP पासवर्ड होता है, वो बिना मैसेज पढ़े व्यक्ति दे देते है |
उसके बाद आपके अकाउंट से रुपये गायब। आप हैरान न हो, यह सच हैं। दिल्ली और गुजरात के ठग कुछ इस तरह से ही ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं।

ठग किसी भी शख्स को फोन कर उनके डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर उनके अकाउंट से रुपये निकाल रहे हैं।

हाल के दिनों में राजधानी और गुजरात में इस तरह की दर्जनों वारदात को अंजाम दे चुके हैं।

7549936801 इस  मोबाइल नंबर से फ़ोन आया और पैसे निकाल लिए गए, ऐसे कॉन्फिडेंस से और आईडिया से बात करते है की पढ़े लिखे लोग भी फस जाते है |  न तो बैंक एक्शन लेती है, नहीं पुलिस कुछ कर पाती है |
पुलिस तकनीकी आधार से मामलों की जांच करने के साथ साथ लोगों को भी जागरूक करने की पहल शुरू कर दी है।

 

This is time to wake up.The world which has taken so much things from hinduism is now aginst hinduism.So wake up and save your self, your saint and your country.

 

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पर्व विशेष, सत्संग, सनातन संस्कृति, Navratri, Special Tithi, The Fact, The Truth

The Truth of New Year Gudi Padwa


नया वर्ष का सच

The Truth of New Year

भारतीय संस्कृति का चैत्री नूतन वर्ष – 28 मार्च
चैत्रे मासि जगद् ब्रम्हाशसर्ज प्रथमेऽहनि ।
-ब्रम्हपुराण

अर्थात ब्रम्हाजी ने सृष्टि का निर्माण चैत्र मास के प्रथम दिन किया । इसी दिन से सत्ययुग का आरंभ हुआ । यहीं से हिन्दू संस्कृति के अनुसार कालगणना भी #आरंभ हुई । इसी कारण इस दिन वर्षारंभ मनाया जाता है । यह दिन महाराष्ट्र में ‘गुडीपडवा’ के नाम से भी मनाया जाता है । गुडी अर्थात् ध्वजा । पाडवा शब्द में से ‘पाड’ अर्थात पूर्ण; एवं ‘वा’ अर्थात वृद्धिंगत करना, परिपूर्ण करना । इस प्रकार पाडवा इस शब्द का अर्थ है, परिपूर्णता ।

गुड़ी (बाँस की ध्वजा) खड़ी करके उस पर वस्त्र, ताम्र- कलश, नीम की पत्तेदार टहनियाँ तथा शर्करा से बने हार चढाये जाते हैं।

गुड़ी उतारने के बाद उस शर्करा के साथ नीम की पत्तियों का भी प्रसाद के रूप में सेवन किया जाता है, जो जीवन में (विशेषकर वसंत ऋतु में) मधुर रस के साथ कड़वे रस की भी आवश्यकता को दर्शाता है।

वर्षारंभके दिन सगुण #ब्रह्मलोक से प्रजापति, ब्रह्मा एवं सरस्वतीदेवी इनकी सूक्ष्मतम तरंगें प्रक्षेपित होती हैं ।

चैत्र #शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रजापति तरंगें सबसे अधिक मात्रा में पृथ्वी पर आती हैं । इस दिन सत्त्वगुण अत्यधिक मात्रा में #पृथ्वी पर आता है । यह दिन वर्ष के अन्य दिनों की तुलना में सर्वाधिक सात्त्विक होता है ।

प्रजापति #ब्रह्मा द्वारा तरंगे पृथ्वी पर आने से वनस्पति के अंकुरने की भूमि की क्षमता में वृद्धि होती है । तो बुद्धि प्रगल्भ बनती है । कुओं-तालाबों में नए झरने निकलते हैं ।

#चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन #धर्मलोक से धर्मशक्ति की तरंगें पृथ्वी पर अधिक मात्रा में आती हैं और पृथ्वी के पृष्ठभाग पर स्थित धर्मबिंदु के माध्यम से ग्रहण की जाती हैं । तत्पश्चात् आवश्यकता के अनुसार भूलोक के जीवों की दिशा में प्रक्षेपित की जाती हैं ।

इस दिन #भूलोक के वातावरण में रजकणों का प्रभाव अधिक मात्रा में होता है, इस कारण पृथ्वी के जीवों का #क्षात्रभाव भी जागृत रहता है । इस दिन वातावरण में विद्यमान अनिष्ट शक्तियों का प्रभाव भी कम रहता है । इस कारण वातावरण अधिक #चैतन्यदायी रहता है ।
भारतीयों के लिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन अत्यंत शुभ होता है ।

साढे तीन मुहूर्तों में से एक #मुहूर्त

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया एवं दशहरा, प्रत्येक का एक एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा, ऐसे साढे तीन मुहूर्त होते हैं । इन साढे तीन #मुहूर्तों की विशेषता यह है कि अन्य दिन शुभकार्य हेतु मुहूर्त देखना पडता है; परंतु इन चार दिनों का प्रत्येक क्षण #शुभमुहूर्त ही होता है ।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक दिवस, मत्स्यावतार दिवस, #वरुणावतार संत #झुलेलालजी का अवतरण दिवस, सिक्खों के द्वितीय गुरु #अंगददेवजी का #जन्मदिवस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का जन्मदिवस, चैत्री नवरात्र प्रारम्भ आदि पर्वोत्सव एवं जयंतियाँ वर्ष-प्रतिपदा से जुड़कर और अधिक महान बन गयी।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रकृति सर्वत्र माधुर्य #बिखेरने लगती है।

भारतीय संस्कृति का यह नूतन वर्ष जीवन में नया उत्साह, नयी चेतना व नया आह्लाद जगाता है। वसंत #ऋतु का आगमन होने के साथ वातावरण समशीतोष्ण बन जाता है।

सुप्तावस्था में पड़े जड़-चेतन तत्त्व गतिमान हो जाते हैं । नदियों में #स्वच्छ जल का संचार हो जाता है। आकाश नीले रंग की गहराइयों में चमकने लगता है।

सूर्य-रश्मियों की प्रखरता से खड़ी फसलें परिपक्व होने लगती हैं ।

किसान नववर्ष एवं नयी फसल के स्वागत में जुट जाते हैं। #पेड़-पौधे नव पल्लव एवं रंग-बिरंगे फूलों के साथ लहराने लगते हैं।

बौराये आम और कटहल नूतन संवत्सर के स्वागत में अपनी सुगन्ध बिखेरने लगते हैं । सुगन्धित वायु के #झकोरों से सारा वातावरण सुरभित हो उठता है ।

कोयल कूकने लगती हैं । चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं । इस सुहावने मौसम में #कृषिक्षेत्र सुंदर, #स्वर्णिम खेती से लहलहा उठता है ।

इस प्रकार #नूतन_वर्ष का प्रारम्भ आनंद-#उल्लासमय हो इस हेतु प्रकृति माता सुंदर भूमिका बना देती है । इस बाह्य #चैतन्यमय प्राकृतिक वातावरण का लाभ लेकर व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन में भी उपवास द्वारा #शारीरिक #स्वास्थ्य-लाभ के साथ-साथ जागरण, नृत्य-कीर्तन आदि द्वारा भावनात्मक एवं आध्यात्मिक जागृति लाने हेतु नूतन वर्ष के प्रथम दिन से ही माँ आद्यशक्ति की उपासना का नवरात्रि महोत्सव शुरू हो जाता है ।

नूतन वर्ष प्रारंभ की पावन वेला में हम सब एक-दूसरे को सत्संकल्प द्वारा पोषित करें कि ‘सूर्य का तेज, चंद्रमा का अमृत, माँ शारदा का ज्ञान, भगवान #शिवजी की #तपोनिष्ठा, माँ अम्बा का शत्रुदमन-सामर्थ्य व वात्सल्य, दधीचि ऋषि का त्याग, भगवान नारायण की समता, भगवान श्रीरामचंद्रजी की कर्तव्यनिष्ठा व मर्यादा, भगवान श्रीकृष्ण की नीति व #योग, #हनुमानजी का निःस्वार्थ सेवाभाव, नानकजी की #भगवन्नाम-निष्ठा, #पितामह भीष्म एवं महाराणा प्रताप की #प्रतिज्ञा, #गौमाता की सेवा तथा ब्रह्मज्ञानी सद्गुरु का सत्संग-सान्निध्य व कृपावर्षा – यह सब आपको सुलभ हो ।

इस शुभ संकल्प द्वारा ‘#परस्परं #भावयन्तु की सद्भावना दृढ़ होगी और इसी से पारिवारिक व सामाजिक जीवन में #रामराज्य का अवतरण हो सकेगा, इस बात की ओर संकेत करता है यह ‘#राम राज्याभिषेक दिवस।

अपनी गरिमामयी संस्कृति की रक्षा हेतु अपने मित्रों-संबंधियों को इस पावन अवसर की स्मृति दिलाने के लिए बधाई-पत्र लिखें, दूरभाष करते समय उपरोक्त सत्संकल्प दोहरायें, #सामूहिक भजन-संकीर्तन व प्रभातफेरी का आयोजन करें, #मंदिरों आदि में #शंखध्वनि करके नववर्ष का स्वागत करें

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Abhyas, कथा अमृत, दर्शन ध्यान, विचार विमर्श, विवेक जागृति, संत वाणी, सनातन संस्कृति, Bapuji, Tatvik Satsang, The Truth

अमीर खुसरो की गुरुभक्ति


हजरत निजामुद्दीन औलिया के हजारों शिष्य थे। उनमें से 22 ऐसे समर्पित शिष्य थे जो उन्हें खुदा मानते थे, अल्लाह का स्वरूप मानते थे। एक बार हजरत निजामुद्दीन औलिया ने उनकी परीक्षा लेनी चाहिए। वे शिष्यों के साथ दिन भर दिल्ली के बाजार में घूमे। रात्रि हुई तो औलिया एक वेश्या की कोठी पर गये। वेश्या उन्हें बड़े आदर से कोठी की ऊपरी मंजिल पर ले गयी। सभी शिष्य नीचे इंतजार करने लगे कि ‘गुरुजी अब नीचे पधारेगे… अब पधारेंगे।’वेश्या तो बड़ी प्रसन्न हो गयी कि मेरे ऐसे कौने-से सौभाग्य हैं जो ये दरवेश मेरे द्वार पर पधारे? उसने औलिया से कहाः “मैं तो कृतार्थ हो गयी जो आप मेरे द्वार पर पधारे। मैं आपकी क्या खिदमत करूँ?”

औलिया ने कहाः “अपनी नौकरानी के द्वारा भोजन का थाल और शराब की बोतल में पानी इस ढंग से मँगवाना कि मेरे चेलों को लगे कि मैंने भोजन व शराब मँगवायी है।” वेश्या को तो हुक्म का पालन करना था। उसने अपने नौकरानी से कह दिया।

थोड़ी देर बाद नौकरानी तदनुरूप आचरण करती हुई भोजन का थाल और शराब की बोतल ले कर ऊपर जाने लगी। तब कुछ शिष्यों को लगा कि ‘अरे ! हमने तो कुछ और सोचा था, किंतु निकला कुछ और…. औलिया ने तो शराब मँगवायी है…. ‘ऐसा सोचकर कुछ शिष्य भाग गये। ज्यों-ज्यों रात्रि बढ़ती गयी, त्यों-त्यों एक-एक करके शिष्य खिसकने लगे। ऐसा करते-करते सुबह हो गयी। निजामूद्दीन औलिया नीचे उतरे। देखा तो केवल अमीर खुसरो ही खड़े थे। अनजान होकर उन्होंने पूछाः “सब कहाँ चले गये?”

अमीर खुसरोः “सब भाग गये।”

औलियाः “तू क्यों नहीं भागा? तूने देखा नहीं क्या कि मैंने शराब की बोतल मँगवायी और सारी रात वेश्या के पास रहा?”

अमीर खुसरोः “मालिक ! भागता तो मैं भी किंतु आपके कदमों के सिवाय और कहाँ भागता?”

निजामुद्दीन औलिया की कृपा बरस पड़ी और बोलेः “बस, हो गया तेरा काम पूरा।”

कैसी अनन्य निष्ठा थी अमीर खुसरो की !

आज भी निजामुद्दीन औलिया की मजार के पास ही उनके सतशिष्य अमीर खुसरो की मजार उनकी गुरुनिष्ठा, गुरुभक्ति की खबर दे रही है।

सतगुरु दाता सर्ब के, तू किर्पिन कंगाल।

गुरु-महिमा जाने नहीं, फँसयौ मोह के जाल।।

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सूर्य करे है दिन मे उजाला, चाँद करे है रात मे, जोगी करे है नित्य उजाला सतत सभी के हृदय मे ……….


AsaramjiBapu.org is always bringing you interesting content related to spirituality, wellness, health, self-improvement, philosophy, faith, rituals and the truth about Sant Shri Ashramji Bapu.

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It is well known that none of the Self Realized saints were ever untouched by defamation .

Asharam Bapu is undoubtedly THE greatest saint of 21st century .With over 40 Years of Selfess Service, Over 425 Ashrams, more than 1400 Samitis and 17000+ Balsanskars, 50+ Gurukuls, atleast 60 Millions of Sadhaks,Devotees & Followers.

Apart from the above mentioned facts Asharam Bapu is a hardcore Deshbhakta & Nationalist . And is the force to reckon with .His literature apart from guiding the spiritual aspirant to the highest level of consciousness, also addresses a wide field from health to peaceful family life to correct lifestyle among others.The children at Balsankars & of sadhak families are taught from childhood to respect the motherland , to be proud of their rich culture & heritage , to be a proud Hindu .

 

Sant Asaram Bapu got more than 8 Lakh Rakhies in Jodhpur.  Something unbelievable & first time in the history of India when any saint on whom someone has put the allegation of sexual assault is trusted by millions of women’s of India & has been fully supported with such an incredible support in form of  around 8 Lakh Rakhies this year. What does this mean??

 

This incredible support & fan following has raised lot many questions now on the judicial system which has allowed any person to be arrested & imprisoned just on the basis of an UNPROVEN allegation of rape or sexual harassment.

It was Homi Bhabha’s vision that Indians will go for Thorium Nuclear reactors, considering that we have the world’s best Thorium reserves, in the Monazite sands of Kerala. Thorium has 150 times more power than Uranium, and does NOT run the risk of meltdown or explosion.

Our president Abdul Kalam had told on national television years back that India must develop Thorium based nuclear reactors. Thorium contains 150 times more energy than Uranium and is the MOST efficient combustible .

India is world’s No 1 in Thorium nuclear reactor R&D, ahead of USA, Russia and China.  Thorium is safe and not prone to runaway reactions, and its waste products remain dangerous for a shorter period..Thorium is the energy for the future and everybody knows India’s potential in this field.

The contract for SethuSamudran would be given to a american company who under the garb of dredging would take away all the sand to US. Thus keeping the land at the mercy of nature besides desytroying the rich biodiversity . It was because of Shri Ram Setu that areas beyond Tamil Nadu were protected

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As per data 1989 data churches spend more than $145 Billion dollars, command 4 Million full time workers, run 13,000 libraries, publish 22,000 periodicals & four billion tracts a year, operate 1,890 radio & TV stations. There are a quarter million foreign Missionaries , over 4500 institutions to train them especially to convert 80 Million Hindu population of India specially, But Hindu saints are the biggest obstacles in their way who take forefront stand against these missionaries,

Alone Sant Asaram bapu has banned out 100’s of missionary groups from the states like Rajasthan, Ahmadabad, Gujarat etc, Big question is, Is it because of this these saints are being continuously framed & targeted into false allegations so that they could be neutralized & missionaries could get their clean path to accomplish their objective of religious conversions in India.

Reportedly, Till year 2005 the number of conversions recorded were more than 8,25,000 in India, Now is 2014 & count has crossed 25,42,000
conversions in India, out of which 95% of converts were found belong to very much below the poverty line & from extremely poor background.

Recently the statement comming out from Shiva (deciple of Sant Asaram Bapu) that “I have been beaten, tortured to give false statement against Sant Asaram ji Bapu” clearly indicates that there is some conspiracy going on big scale to target Hindu religion.

 

Never bowed down to Desh-Drohi Foreign Funded Media

media

This has also raised the question against the biased role played by News Channels for deliberately propagating the false information of rape in order to break faith of Millions in India & outside India, not just in Sants but in Hinduism also. Question arises, Why Media did trials & created lots of defaming for this Sant when there was nothing in proof but just an allegation?? Was it necessary to give personal judgments before Court of Law could have given their judgements??

Many saints like Nityananda, Jayendra Saraswati, Sant Asaram Bapu were maligned with fake allegations is this to accomplish the goal of 100 Million Hindu Converts declared by “Reverend Pat Robertson” in Dallas Christian Conclave in Oct 2005? & Worldwide goal of 1 Billion declared in same conclave to make up for losses in Europe?

Destroyed Xian Proselytization in Tribals Belts of India

suman

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Mission Swachh Bharat & inspires others to join the movement


bapunotGuilty

वैसे तो हम शांति के पक्षधर हैं, शांति हमारी रगों में है लेकिन आज सत्ता की गलत नीतियों के चलते और मीडिया की मिलीभगत से कितने ही संतों को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है । उनके उस षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए संतों और जनता को संगठित होना पड़ेगा ।

अगर इस भारतभूमि पर कोई अनैतिक कृत्य होता है और आप देखते रहते हो तो यह आपकी सबसे बड़ी नाकामी है । इसलिए हर व्यक्ति प्रतिदिन एक घंटे का समय संस्कृति रक्षा, राष्ट्र रक्षा और संत रक्षा के लिए दे, राष्ट्र के विकास के लिए दे, राष्ट्र की कुरीतियों के उन्मूलन के लिए दे । और जिस दिन हर व्यक्ति एक घंटा चिंतन करेगा और सभी परस्पर एकजुट होकर नकारात्मक प्रवृत्ति के लोगों के साथ बैठकर संवाद करोगे और उनके मस्तक के कचरे को निकालकर दफन कर दोगे, उसी दिन भारत विश्वगुरु के रूप में पुनः उभर आयेगा । इसके लिए सबको सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है ।

संतों के आदेशों-निर्देशों, मूल्यों-मान्यताओं को अगर आप अपने जीवन में उतारें और जो हमारी संस्कृति, आस्था के केन्द्रों पर प्रहार करते हैं उनको रोकने के लिए उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।…

उठिये, जागिये और जगाने के लिए इस समय में भीष्म पितामह की भूमिका में संत आशारामजी बापू आपके साथ हैं । उनके आदेशों-निर्देशों को सभी शिरोधार्य करें तो वह दिन दूर नहीं कि भारत अपने खोये हुए गौरव, मान-सम्मान-स्वाभिमान को पुनः प्राप्त करेगा ।

जिनके रोम-रोम से विश्वबंधुत्व, विश्वशांति, ‘सर्वभूतहितेरतः’ की महक फैलती है, उन परम पूज्य बापूजी के दर्शन – सत्संग से हम भक्तों को जो अनुभूति होती है वह अवर्णीय है और प्रेम, करुणा, वात्सल्य की वे जो साक्षात् मूर्ति दिखाई देते है, उन पूज्य बापूजी को हम सभी शिष्य वंदन करते है ।

 

‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । आचार्यदेवो भव ।’ को पुनर्जागृत करने की जो परम्परा बापूजी ने आरम्भ की है, उसके लिए पूरा विश्व संत श्री आशाराम बापूजी का आभारी है । जो बापूजी की शिक्षा है, ऋषियों की, संतों की, हमारे गुरुओं की शिक्षा है, हमारी मर्यादा और परम्पराओं की जो शिक्षा है, हम उसके ऊपर द्रढ़ता से चलें ।

पूज्य बापूजी !

इलाही हमारी नजरों में

वो तासीर आ जाय ।

जहाँ भी देखें, जिसे भी देखें,

बस आपकी तस्वीर नजर आ जाय ।।

 

हमने अवतारों की कथा तो बहुत सुनी है लेकिन अवतार का प्रत्यक्ष दर्शन वर्त्तमान समय में हो रहा है – पूज्य आशारामजी बापू के रूप में । दुनिया के १५६ से ज्यादा देशों से पूज्य आशारामजी बापू का नाद सुनाई दिया है, लोग “ हरि ॐ “ बोलते सुनाई देते हैं ।

 

हमारे संतों, देवी-देवताओं और संस्कृति के ऊपर अपमान, अफवाह और कुप्रचार का षड्यंत्र चल रहा है । बापूजी हम लाखों-करोड़ो भक्तों के हृदय में हैं । हमें मालूम है संत कौन हैं, हमारे देव कौन हैं, हमारी परम्परा क्या है । बापूजी का अपमान व कुप्रचार ज्यादा समय तक चलनेवाला नहीं है । लाखों- करोड़ो हृदयों में जो संतों का एक पवित्र स्थान है, वह कोई भी मिटा नहीं सकता !

हम भारत के संविधान को अपील करते है कि निर्दोष संत को बाइज्जत रिहा करें और कुदरत के कोप से इस देश को बचायें |

जय हिंद | जय भारत ||

 

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श्री मद्भगवद् गीता – पाँचवें अध्याय का माहात्म्य


श्री भगवान कहते हैं हे देवी! अब सब लोगों द्वारा सम्मानित पाँचवें अध्याय का माहात्म्य संक्षेप में बतलाता हूँ, सावधान होकर सुनो | मद्र देश में पुरुकुत्सपुर नामक एक नगर है | उसमें पिंगल नामक एक ब्राह्मण रहता था | वह वेदपाठी ब्राह्मणों के विख्यात वंश में, जो सर्वदा निष्कलंक था, उत्पन्न हुआ था, किंतु अपने कुल के लिए उचित वेद-शास्त्रों के स्वाध्याय को छोड़कर ढोल बजाते हुए उसने नाच-गान में मन लगाया | गीत, नृत्य और बाजा बजाने की कला में परिश्रम करके पिंगल ने बड़ी प्रसिद्धी प्राप्त कर ली और उसी से उसका राज भवन में भी प्रवेश हो गया | अब वह राजा के साथ रहने लगा | स्त्रियों के सिवा और कहीं उसका मन नहीं लगता था | धीरे-धीरे अभिमान बढ़ जाने से उच्छ्रंखल होकर वह एकान्त में राजा से दूसरों के दोष बतलाने लगा | पिंगल की एक स्त्री थी, जिसका नाम था अरुणा | वह नीच कुल में उत्पन्न हुई थी और कामी पुरुषों के साथ विहार करने की इच्छा से सदा उन्हीं की खोज में घूमा करती थी | उसने पति को अपने मार्ग का कण्टक समझकर एक दिन आधी रात में घर के भीतर ही उसका सिर काटकर मार डाला और उसकी लाश को जमीन में गाड़ दिया | इस प्रकार प्राणों से वियुक्त होने पर वह यमलोक पहुँचा और भीषण नरकों का उपभोग करके निर्जन वन में गिद्ध हुआ |

अरुणा भी भगन्दर रोग से अपने सुन्दर शरीर को त्याग कर घोर नरक भोगने के पश्चात उसी वन में शुकी हुई | एक दिन वह दाना चुगने की इच्छा से इधर उधर फुदक रही थी, इतने में ही उस गिद्ध ने पूर्वजन्म के वैर का स्मरण करके उसे अपने तीखे नखों से फाड़ डाला | शुकी घायल होकर पानी से भरी हुई मनुष्य की खोपड़ी में गिरी | गिद्ध पुनः उसकी ओर झपटा | इतने में ही जाल फैलाने वाले बहेलियों ने उसे भी बाणों का निशाना बनाया | उसकी पूर्वजन्म की पत्नी शुकी उस खोपड़ी के जल में डूबकर प्राण त्याग चुकी थी | फिर वह क्रूर पक्षी भी उसी में गिर कर डूब गया | तब यमराज के दूत उन दोनों को यमराज के लोक में ले गये | वहाँ अपने पूर्वकृत पापकर्म को याद करके दोनों ही भयभीत हो रहे थे | तदनन्तर यमराज ने जब उनके घृणित कर्मों पर दृष्टिपात किया, तब उन्हें मालूम हुआ कि मृत्यु के समय अकस्मात् खोपड़ी के जल में स्नान करने से इन दोनों का पाप नष्ट हो चुका है | तब उन्होंने उन दोनों को मनोवांछित लोक में जाने की आज्ञा दी | यह सुनकर अपने पाप को याद करते हुए वे दोनों बड़े विस्मय में पड़े और पास जाकर धर्मराज के चरणों में प्रणाम करके पूछने लगेः “भगवन ! हम दोनों ने पूर्वजन्म में अत्यन्त घृणित पाप का संचय किया है, फिर हमें मनोवाञ्छित लोकों में भेजने का क्या कारण है? बताइये |”

यमराज ने कहाः गंगा के किनारे वट नामक एक उत्तम ब्रह्मज्ञानी रहते थे | वे एकान्तवासी, ममतारहित, शान्त, विरक्त और किसी से भी द्वेष न रखने वाले थे | प्रतिदिन गीता के पाँचवें अध्याय का जप करना उनका सदा नियम था | पाँचवें अध्याय को श्रवण कर लेने पर महापापी पुरुष भी सनातन ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त कर लेता है | उसी पुण्य के प्रभाव से शुद्ध चित्त होकर उन्होंने अपने शरीर का परित्याग किया था | गीता के पाठ से जिनका शरीर निर्मल हो गया था, जो आत्मज्ञान प्राप्त कर चुके थे, उन्ही महात्मा की खोपड़ी का जल पाकर तुम दोनों पवित्र हो गये | अतः अब तुम दोनों मनोवाञ्छित लोकों को जाओ, क्योंकि गीता के पाँचवें अध्याय के माहात्म्य से तुम दोनों शुद्ध हो गये हो |
श्री भगवान कहते हैं सबके प्रति समान भाव रखने वाले धर्मराज के द्वारा इस प्रकार समझाये जाने पर  दोनों बहुत प्रसन्न हुए और विमान पर बैठकर वैकुण्ठधाम को चले गये |

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