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निर्दोष, निष्कलंक बापू


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किसीने ठीक ही लिखा है कि हिन्दू तो वह बूढ़े काका का खेत है, जिसे जो चाहे जब जोत जाय । उदार, सहिष्णु और क्षमाशील इस वर्ग के साथ वर्षों से बूढ़े काका के खेत की तरह बर्ताव हो रहा है । हिन्दू समाज का नेतृत्व करनेवाले ब्रह्मज्ञानी संतों, महात्माओं, समाज-सुधारकों, क्रांतिकारी प्रखर वक्ताओं पर जिसके मन में जो आता है, वह कुछ भी आरोप मढ़ देता है । अब तो दुष्प्रचार की हद हो गयी, जब ७३ वर्षीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू पर साजिशकर्ताओं की कठपुतली, मानसिक असंतुलन वाली कन्या द्वारा ऐसा घटिया आरोप लगवाया गया, जिसका कोई सिर-पैर नहीं, जिसे सुनने में भी शर्म आती है । इससे देश-विदेश में फैले बापूजी के करोड़ो भक्तों व हिन्दू समाज में आक्रोश का ज्वालामुखी सुलग रहा है ।

कुदरत के डंडे से कैसे बचेंगे ?

आरोप लगानेवाली ल‹डकी की मेडिकल जाँच रिपोर्ट में चिकित्सकों ने आरोप को साफ तौर पर नकार दिया है । इससे स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ बापूजी को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है लेकिन प्रश्न यह है कि करोड़ो भक्तों के आस्था के केन्द्र बापूजी के बारे में अपमानजनक एवं अशोभनीय आरोप लगाकर भक्तों की श्रद्धा, आस्था व भक्ति को ठेस पहुँचानेवाले कुदरत के डंडे से कैसे बच पायेंगे ? शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि ‘भगवान स्वयं का अपमान सहन कर सकते हैं मगर अपने प्यारे तत्त्वस्वरूप संतों का नहीं ।’

व्यावसायिक हितों की चिंता

इन झूठे, शर्मनाक आरोपों के मूल में वे शक्तियाँ काम कर रही हैं, जो यह कतई नहीं चाहती हैं कि बापूजी की प्रेरणा से संचालित गुरुकुलों के असाधारण प्रतिभासम्पन्न विद्यार्थी आगे चलकर देश, संस्कृति व गुरुकुल का नाम रोशन करें । दुनिया जानती है कि भारतीय वैदिक गुरुकुल परम्परा पर आधारित शिक्षण एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के क्षेत्र में बापूजी के मार्गदर्शन में देशभर में चल रहे गुरुकुल आज कॉन्वेंट शिक्षण पद्धति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं । एक तरफ कई व्यावसायिक संस्थाओं की लूट इस पहाड़ के नीचे आ रही है तो दूसरी तरफ इंटरनेट और अश्लील साहित्य सामग्री के जरिये देश के भविष्य को चौपट करने की सुनियोजित साजिश पर पानी फिर रहा है । ओजस्वी-तेजस्वी भारत निर्माण के बापूजी के संकल्प को हजम कर पाना उन साजिशकर्ताओं के लिए अब काँटोंभरी राह साबित हो रहा है । ऐसे में गुरुकुलों की बढ़ती लोकप्रियता, विश्वसनीयता की छवि और मेधावी बच्चों की प्रतिभा को कुचलने के लिए अब कुछ इस तरह से कीचड़ उछाला जा रहा है कि माता-पिता अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजें ही नहीं ।

पहले गुरुकुल के बच्चों पर तांत्रिक विद्या का मनग‹ढंत आरोप लगाया गया परंतु जब सर्वोच्च न्यायालय में इन आरोपों की हवा निकल गयी तो अब सीधे बापूजी के चरित्र पर ही कीच‹ड उछालने लगे हैं । मगर सूर्य पर थूँकने का दुस्साहस करनेवाले खुद ही गंदे हो जाते हैं । जो समाज को मान-अपमान, qनदा-प्रशंसा और राग-द्वेष से ऊपर उठाकर समत्व में प्रतिष्ठित करते हुए समत्वयोग की यात्रा करवाते हैं, भला ऐसे संत के दुष्प्रचार की थोथी आँधी उनका क्या बिगा‹ड पायेगी ? टीआरपी के पीछे दौ‹डनेवाले चैनल बापू को क्या बदनाम कर पायेंगे ? बापू के भक्तों की हिमालय-सी दृ‹ढ श्रद्धा के आगे आरोप की बिसात एक तिनके के समान है ।

चाहे धरती फट जाय तो भी सम्भव नहीं

वैसे आज किसी पर भी कीच‹ड उछालना बहुत आसान है । पहले बापूजी के आश्रम के लिए जमीन ह‹डपने, अवैध कब्जे, गैर-कानूनी निर्माण के थोकबंद आरोप लगाये गये मगर सत्य की तराजू पर सभी झूठे, बेबुनियाद साबित हुए । जब इनसे काम नहीं बना तो बापूजी और उनके द्वारा संचालित आश्रम, समितियों और साधकों पर अत्याचार किये गये लेकिन भक्तों ने इनका डटकर मुकाबला किया । साजिश करनेवालों ने हर बार मुँह की खायी । कितने तो आज भी लोहे के चने चबा रहे हैं तो कितने कुदरत के न्याय के आगे खामोश हैं परंतु बावजूद इसके आज भी बापूजी के ऊपर अनाप-शनाप आरोप लगवानेवालों को अक्ल नहीं आयी । साजिशकर्ताओं के इशारे पर बकनेवाली एक ल‹डकी ने बापूजी पर जैसा आरोप लगाया है, दुनिया इधर-की-उधर हो जाय, धरती फट जाय तो भी ऐसा सम्भव नहीं हो सकता है । यह घिनौना आरोप भक्तों की श्रद्धा, साधकों की आस्था को डिगा नहीं सकता है ।

पूरा जीवन खुली किताब

बापूजी का पूरा जीवन खुली किताब की तरह है । उसका हर पन्ना और उस पर लिखी हर पंक्ति समाज का युग-युगांतर तक पथ-प्रदर्शन करती रहेगी । बापूजी कोई साधारण संत नहीं, वे असाधारण आत्मसाक्षात्कारी महापुरुष हैं ।

दरअसल सबसे ब‹डी समस्या यह है कि सारे आरोप हिन्दू संतों पर ही लगाये जाते हैं क्योंकि हिन्दू चुपचाप सब सह लेता है । दुनिया के और किसी धर्म में ऐसा होने पर क्या होता है यह किसीसे छुपा नहीं है । हमारी उदारता और सहिष्णुता का दुरुपयोग किया जाता है । तभी तो महापुरुषों को बदनाम करने का षड्यंत्र चलता ही रहा है, फिर चाहे कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी हों या फिर सत्य साँर्इं बाबा हों । आरोप लगानेवालों ने तो माता सीताजी व भगवान श्रीकृष्ण पर भी लांछन लगाया था । ऐसे में यह कल्पना कैसे की जा सकती है कि समाज को संगठित कर दिव्य भारतीय संस्कृति की विश्व-क्षितिज पर पताका लहरानेवाले विश्ववंदनीय संत पर आरोप न लगाये जायें ? संत तो स्वभाव से ही क्षमाशील होते हैं लेकिन उनके भक्त अपमान बर्दाश्त करनेवाले नहीं हैं । झूठ के खिलाफ सत्य की यह धधकती मशाल अन्याय और अत्याचार के अँधेरे को कुचलकर ही रहेगी ।

– श्री निलेश सोनी (वरिष्ठ पत्रकार)

प्रधान सम्पादक, ‘ओजस्वी है भारत !’

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संत श्री आशारामजी बापू दर्शन 14th May 2015


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संत श्री आशारामजी बापू मंगलमय दर्शन

संत श्री आशारामजी बापू दर्शन 14th May 2015

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू पीड़ित हो रहे है | उन्होंने मीडिया को बताया की पुरानी गाड़ी, पुराना मकान, पुराना शरीर पुचकार के चलाना पड़ता है ७६ साल की उम्र है | इससे बड़ी कोई पीड़ा ही नहीं है |

फिर भी आसाराम बापू मस्त लग रहे है इस पार पूज्य बापूजी ने जवाब दिया की –
मस्त लगूंगा ही ! गुरु का ज्ञान मिला है !

जोधपुर से पूज्य बापूजी के भक्तों ने जिस सड़क से बापूजी की गाड़ी गुजरती है वहा के खड्डे भर दिये ताकि पूज्य आशारामजी बापू को कमर में दर्द ना हो |

पूज्य बापूजी ने कहा कि “कमर दर्द चलता रहेता है | ठीक है | ड्राईवर गाड़ी तेज नहीं चलाता | ”

बापू पर आरोप लगाने वालो को मुहतोड़ जवाब देते हुए पूज्य श्री ने कहा की – “गलत करने वालों को (भगवान) सद्बुद्धि दे और बराबर सजा दे , ये (मै) बोलूँगा | हमने कराया तो मेरे को तो पहले सजा मिले | में कराऊ तो मेरे को १० गुनी सजा मिले |
हमला कराने वाले वे लोग है जिन्होंने मेरे को भेजा | वो अब देखते है की अब, कही जमानत न हो जाये, तो फिर वो करवा देते है | आरोप हम पर लगे इसीलिये तो करवा रहे है, नहीं तो कायको करवाते ?  ”

सब का मंगल ! सब का भला !! चाहने वाले पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने न्यायपालिका के निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए व्यंग करते हुए कहा कि – सलमान ने क्या जादू चला दिया ! 20 मिनट भी अन्दर नहीं गया और हम 20 महीने हो गये !! हमारा जमानत के लिए स्पेल्लिंग में कही गलती थी क्या ? ”

लोग पूछते है की बापूजी चमत्कार क्यों नही करते ? जादू क्यों नहीं करते ?

इसपर बापूजी ने कहा की – ” हमारा जादू हमारे लिये नहीं चलता |

पहले भी बापूजी ने कहा था की नाई अपने बाल खुद नहीं काटता, वकील अपना केस खुद नहीं लड़ता और डॉक्टर अपना इलाज खुद नहीं करता इसी लिए बापूजी अपने लिए कोई चमत्कार नहीं करेंगे ”

बापूजी ने मजाक में कहा की – “जादू सलमान से सीखना पड़ेगा ! ”

लोग कहेते है की बापूजी के भक्तो की श्रद्धा टूट रही है और कम होते जा रहे है पर सच तो यह है कि इस बार सवा करोड़ ऋषि प्रसाद संत श्री आशारामजी आश्रम की मासिक पत्रिका की छपाई हुयी है और सब बिक भी जाएगी | कल ही बापूजी ने अपने हाथ में लेके इस मास की ऋषि प्रसाद पत्रिका “बापूजी को जेल क्यों ?” का विमोचन किया था |

पत्रकार ने पूछा की सलमान को बहोत लोग मिलने आये थे आपको कोई फ़िल्मी कलाकार मिलने क्यों नहीं आते ?

बापूजी ने कहा कि हमारे इधर करोड़ो भक्त मिलने को आते है | (किसी कलाकार से कम नहीं है)

पूज्य बापूजी ने नेपाल के भूकंप पीड़ितों की सेवा करने के लिए इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि – ” मै तो चाहता हु दो दिन के लिए सिर्फ नेपाल चला जाऊ, बस | नेपाल वालों की सेवा करने के लिए | ”

पत्रकार ने फिर पूछा की बापूजी आप सलमान की तरह जादू क्यों नही चलाते तब बापूजी ने विनोद करते हुए कहा कि – “हमारे को जादू चलाना आता तो 20 महिना थोड़े ही रहते इधर ! सलमान के पास है कुछ ! जय ! जय ! “

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