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अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी – आँवला नवमी


avla navmi

कार्तिक शुक्ल नवमी (२९ अक्टूबर २०१७ ) को ‘अक्षय नवमी’ तथा ‘आँवला नवमी’ कहते है | अक्षय नवमी को जप, दान, तर्पण, स्नानादि का अक्षय फल होता है | इस दिन आँवले के वृक्ष के पूजन का विशेष माहात्म्य है | पूजन में कपूर या घी के दीपक से आँवले के वृक्ष की आरती करनी चाहिए तथा निम्न मंत्र बोलते हुये इस वृक्ष की प्रदक्षिणा करने का भी विधान है :

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च |
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ||

इसके बाद आँवले के वृक्ष के नीचे पवित्र ब्राम्हणों व सच्चे साधक-भक्तों को भोजन कराके फिर स्वयं भी करना चाहिए | घर में आंवलें का वृक्ष न हो तो गमले में आँवले का पौधा लगा के अथवा किसी पवित्र, धार्मिक स्थान, आश्रम आदि में भी वृक्ष के नीचे पूजन कर सकते है | कई संत श्री आशारामजी आश्रमों में आँवले के वृक्ष लगे हुये हैं | इस पुण्यस्थलों में जाकर भी आप भजन-पूजन का मंगलकारी लाभ ले सकते हैं |

Limitless fruits from Akshay Navami

Karthik Shukla Navami (29 Nov 2017) is also renowned as “Akshay Navami” or “Amla Navami”. Performing recitations, donations, tarpan, bathing, etc.. offers limitless benefits. There is a special significance of worshiping Amla tree on this day. During puja, one should use a lamp lit using camphor or clarified butter, ghee in front of an Amla tree. Following mantra should be recited and then circumambulate around the tree:
YANI KANI CHA PAPAANI JANMANTARAKRITAANI CHA |
TAANI SARVAANI NASHYANTU PRADAKSHINPADE PADE ||
After this, there is the custom of offering food to pure brahmins and devotees of pure heart, and then one should oneself take meal under the Amla tree. If one doesnot have Amla tree in his backyard then the same practice can be repeated around a small amla plant in a pot or in any holy, religious place or ashram. Many Sant Shri Asaramji ashrams have Amla trees planted in their premises. You may also take benefit of these holy places.

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Om, Special Tithi, Tithi

Special occasion for Japa and Meditation : Ravivary Saptami


 

रविवारी सप्तमी

raviari saptami

साधना में तीव्रता से आगे बढने के लिए :

संत आशाराम बापू जी ने कहा है की रविवारी सप्तमी के दिन किया गया जप ध्यान लाख गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली, जन्माष्टमी, होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल रविवारी सप्तमी के दिन भी करने से होता है |

समय : सूर्योदय से सुबह ८  बजे तक – ३० जुलाई २०१७
संत आशारामजी बापू जी ने कहा की साधको को साधना में उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :

१: मौन का अधिक से अधिक सेवन करे या जितना कम संभव हो उतना कम बोले |

२: अधिक से अधिक समय जप और ध्यान में लगाये |

३: उपवास करे और सिर्फ दूध का सेवन करे |

४: रविवारी सप्तमी के दिन और उससे एक रात पहले भूमि पर शयन का करें |

५: रविवारी सप्तमी से एक रात्रि पहले साधकों को चाहिए की वो एक मजबूत संकल्प ले की, मै कल मौन रखूँगा सद्ग्रंथो जैसे की “जीवन रसायन”, “इश्वर की ओर” और “दिव्य प्रेरणा प्रकाश” का पठन करूँगा और अपने आपको सतत जप और ध्यान में संलग्न रखूँगा |

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Alerts, Ashram News, Controvercy, Exposion, People's Experience, Saint and People, Social Activities, The Fact

साजिश को सच का रूप देने की मनोवैज्ञानिक रणनीति


shilpa

संत श्री आशारामजी बापू के खिलाफ जो षड्यंत्र चल रहा है, उसका मनोवैज्ञानिक तरीके से किस तरह से सुनियोजन किया गया है, यह मैं एक मनोविज्ञानी होने के नाते आपको बताना चाहती हूँ । आठ मुख्य पहलू समझेंगे कि किस तरह इस साजिश को सच का मुखौटा पहनाया जा रहा है ।

(१) जनता के विशिष्ट वर्गों पर निशाना : समाज के शिक्षित, जागरूक, उच्च एवं मुख्यतः युवा वर्ग को निशाना बनाया गया क्योंकि इनको विश्वास दिलाने पर ये तुरंत प्रतिक्रिया करते हैं ।

(२) षड्यंत्र का मुद्दा : देश की ज्वलंत समस्या ‘महिलाओं पर अत्याचार’ को मुख्य मुद्दा बनाया है । इस भावनात्मक विषय पर हर कोई तुरंत प्रतिक्रिया दे के विरोध दर्शाता है ।

(३) रणनीति : चीज को यथार्थपूर्ण, विश्वसनीय, प्रभावशाली दिखाने जैसी मार्केटिंग रणनीति का उपयोग करके दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है ।

दर्शक मनोविज्ञान का भी दुरुपयोग किया जा रहा है । कोई विज्ञापन हमें पहली बार पसंद नहीं आता है लेकिन जब हम बार-बार उसे देखते हैं तो हमें पता भी नहीं चलता है कि कब हम उस विज्ञापन को गुनगुनाने लग गये । बिल्कुल ऐसे ही बापूजी के खिलाफ इस बोगस मामले को बार-बार दिखाने से दर्शकों को असत्य भी सत्य जैसा लगने लगता है ।

(४) प्रस्तुतिकरण का तरीका : पेड मीडिया चैनलों के एंकर आपके ऊपर हावी होकर बात करना चाहते हैं । वे सिर्फ खबर को बताना नहीं चाहते बल्कि सेकंडभर की फालतू बात को भी ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बताकर दिनभर दोहराते हैं और आपको हिप्नोटाइज करने की कोशिश करते हैं ।

(५) भाषा : खबर को बहुत चटपटे शब्दों के द्वारा असामान्य तरीके से बताते हैं । ‘बात गम्भीर है, झड़प, मामूली’ आदि शब्दों की जगह ‘संगीन, वारदात, गिरोह, बड़ा खुलासा, स्टिंग ऑपरेशन’ ऐसे शब्दों के सहारे मामूली मुद्दे को भी भयानक रूप दे देते हैं ।

(६) आधारहीन कहानियाँ बनाना, सुटिंग ऑपरेशन्स और संबंधित बिन्दु : ‘आश्रम में अफीम की खेती, स्टिंग ऑपरेशन’ आदि आधारहीन कहानियाँ बनाकर मामले को रुचिकर बना के उलझाने की कोशिश करते हैं ।

(७) मुख्य हथियार : बहुत सारे विडियो जो दिखाये जाते हैं वे तोड़-मरोड़ के बनाये जाते हैं । ऐसे ऑडियो टेप भी प्रसारित किये जाते हैं । यह टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग है ।

इसके अलावा कमजोर, नकारात्मक मानसिकतावालों को डरा के या प्रलोभन देकर उनसे बुलवाते हैं । आश्रम से निकाले गये २-५ बगावतखोर लोगों को मोहरा बनाते हैं ताकि झूठी विश्वसनीयता ब‹ढायी जा सके ।

(८) मनोवैज्ञानिक वातावरण तैयार करना : बापूजी की जमानत की सुनवाई से एक दिन पहले धमकियों की खबरें उछाली जाती हैं, कभी पुलिस को, कभी माता-पिता और लड़की को तो कभी न्यायाधीश को । ये खबरें कभी भी कुछ सत्य साबित नहीं हुर्इं ।

अब आप खुद से प्रश्न पूछिये और खुद ही जवाब ढूँढिये कि क्या यह आरोप सच है या एक सोची-समझी साजिश ?

और एक बात कि केवल पेड मीडिया चैनल ही नहीं बल्कि इसीके समान प्रिंट मीडिया भी खतरनाक तरीके से जनमानस को प्रभावित कर रहा है । इन दोनों से सावधान रहना चाहिए ।

– शिल्पा अग्रवाल,

प्रसिद्ध मनोविज्ञानी

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गौ सेवा - गाय की रक्षा - देश की रक्षा

बापू जी के श्री चित्र को १०८ परिक्रमा करती निवाई गौशाला की गौमाता

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गौ सेवा – गाय की रक्षा – देश की रक्षा

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Saint and People

काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वतीजी महाराज


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षड्यंत्रों के तहत हिन्दू समाज पर अन्याय, अत्याचार बंद किया जाना चाहिए । संतों के सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा होनी चाहिए ।

अगर संतों को जेल में डालकर बदनाम करने का षड्यंत्र होता रहा तो भारत की अस्मिता, भारत की संस्कृति सुरक्षित नहीं रह पायेगी । इसे सुरक्षित रखने के लिए सबको एकजुट हो के प्रयास करना होगा । और वह दिन दूर नहीं कि आशारामजी बापू आप सब लोगों के बीच में आयेंगे, आरोपों से बरी होंगे और राष्ट्रहित, समाजहित होगा ।

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रामानुजाचार्य

साधक सिद्ध कैसे बने ?


ramanujacharya

श्री रामानुजाचार्य

श्री रामानुजाचार्य ने कुछ उपाय बताये हैं, जिनका आश्रय लेने से साधक सिद्ध बन सकता है। वे उपाय हैं :

विवेक: आत्मा अविनाशी है, जगत विनाशी है। देह हाड़ मांस का पिंजर है, आत्मा अमर है । शरीर के साथ आत्मा का कतई सम्बन्ध नहीं है और वह आत्मा ही परमात्मा है । इस प्रकार का तीव्र विवेक रखें ।

विमुखता: जिन वस्तुओं, व्यसनों को ईश्वर प्राप्ति के लिए त्याग दिया, फिर उनकी ओर न देखें, उनसे विमुख हो जायें । घर का त्याग कर दिया तो फिर उस ओर मुड़-मुड़कर न देखें । व्यसन छोड़ दिये तो फिर दुबारा न करें । जैसे कोई वमन करता है तो फिर उसे चाटने नहीं जाता, ऐसे ही ईश्वर प्राप्ति में विघ्न डालनेवाले जो कर्म हैं उन्हें एक बार छोड़ दिया तो फिर दुबारा न करें |

अभ्यास: भगवान के नाम जप का, भगवान के ध्यान का, सत्संग में जो ज्ञान सुना है उसका नित्य, निरंतर अभ्यास करें ।

कल्याण: जो अपना कल्याण चाहता है वह औरों का कल्याण करे, निष्काम भाव से औरों की सेवा करे ।

भगवत्प्राप्तिजन्य क्रिया: जो कार्य तन से करें उनमें भी भगवत्प्राप्ति का भाव हो, जो विचार मन से करें उनमें भी भगवत्प्राप्ति का भाव हो और जो निश्चय बुद्धि से करें उन्हें भी भगवत्प्राप्ति के लिए करें ।

अनवसाद: कोई भी दु:खद घटना घट जाय तो उसे बार-बार याद करके दु:खी न हों ।

अनुहर्षात्: किसी भी सुखद घटना में हर्ष से फूलें नहीं । जो साधक इन सात उपायों को अपनाता है वह सिद्धि प्राप्त कर लेता है ।

 

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Hanuman Jayanti

श्री हनुमान मंत्र रक्षा कवच


श्री हनुमान जयंती  : १० अप्रैल (उपवास) – ११ अप्रैल (उत्सव)

प्राणों की रक्षा हेतु हनुमान मंत्र / रक्षा कवच |

हनुमानजी जब लंका से आये तो राम जी ने उनको पूछा कि रामजी के वियोग में सीताजी अपने प्राणो की रक्षा कैसे करती हैं ?

तो हनुमान जी ने जो जवाब दिया उसे याद कर लो । अगर आप के घर में कोई अति अस्वस्थ है, जो बहुत बिमार है, अब नहीं बचेंगे ऐसा लगता हो, सभी डॉक्टर व दवाईयाँ भी जवाब दे गईं हों, तो ऐसे व्यक्ति की प्राणों की रक्षा इस मंत्र से करो..उस व्यक्ति के पास बैठकर ये हनुमानजी का मंत्र जपो..तो ये सीता जी ने अपने प्राणों की रक्षा कैसे की ये हनुमानजी के वचन हैं….

नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट ।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ॥

इसका अर्थ भी समझ लीजिये ।

‘ नाम पाहरू दिवस निसि ‘ ….. सीता जी के चारों तरफ आप के नाम का पहरा है । क्योंकि वे रात दिन आप के नाम का ही जप करती हैं । सदैव राम जी का ही ध्यान धरती हैं और जब भी आँखें खोलती हैं तो अपने चरणों में नज़र टिकाकर आप के चरण कमलों को ही याद करती रहती हैं ।

तो ‘ जाहिं प्रान केहिं बाट ‘….. सोचिये की आप के घर के चारों तरफ कड़ा पहरा है । छत और ज़मीन की तरफ से भी किसी के घुसने का मार्ग बंद कर दिया है, क्या कोई चोर अंदर घुस सकता है..? ऐसे ही सीता जी ने सभी ओर से श्री रामजी का रक्षा कवच धारण कर लिया है ..इस प्रकार वे अपने प्राणों की रक्षा करती हैं । तो ये मंत्र श्रद्धा के साथ जपेंगे तो आप भी किसी के प्राणों की रक्षा कर सकते हैं ।

रक्षा कवच बनाने के लिए: –

दिन में 3-4 बार शांति से बैठें , 2-3 मिनिट होठो में जप करे और फिर चुप हो गए। ऐसी धारणा करे की मेरे चारो तरफ भगवान का नाम  घूम रहा है| भगवान के नाम का घेरा मेरी रक्षा कर रहा है और इस प्रकार से जप करते करते शांत और एकाग्र चित्त हो जायें | ईश्वर आपकी रक्षा करेंगे हर कदम पर, जीवन की हर मुश्किल राह पर आपका पथ प्रदर्शन करेंगे |

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