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निर्दोष, निष्कलंक बापू


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किसीने ठीक ही लिखा है कि हिन्दू तो वह बूढ़े काका का खेत है, जिसे जो चाहे जब जोत जाय । उदार, सहिष्णु और क्षमाशील इस वर्ग के साथ वर्षों से बूढ़े काका के खेत की तरह बर्ताव हो रहा है । हिन्दू समाज का नेतृत्व करनेवाले ब्रह्मज्ञानी संतों, महात्माओं, समाज-सुधारकों, क्रांतिकारी प्रखर वक्ताओं पर जिसके मन में जो आता है, वह कुछ भी आरोप मढ़ देता है । अब तो दुष्प्रचार की हद हो गयी, जब ७३ वर्षीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू पर साजिशकर्ताओं की कठपुतली, मानसिक असंतुलन वाली कन्या द्वारा ऐसा घटिया आरोप लगवाया गया, जिसका कोई सिर-पैर नहीं, जिसे सुनने में भी शर्म आती है । इससे देश-विदेश में फैले बापूजी के करोड़ो भक्तों व हिन्दू समाज में आक्रोश का ज्वालामुखी सुलग रहा है ।

कुदरत के डंडे से कैसे बचेंगे ?

आरोप लगानेवाली ल‹डकी की मेडिकल जाँच रिपोर्ट में चिकित्सकों ने आरोप को साफ तौर पर नकार दिया है । इससे स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ बापूजी को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है लेकिन प्रश्न यह है कि करोड़ो भक्तों के आस्था के केन्द्र बापूजी के बारे में अपमानजनक एवं अशोभनीय आरोप लगाकर भक्तों की श्रद्धा, आस्था व भक्ति को ठेस पहुँचानेवाले कुदरत के डंडे से कैसे बच पायेंगे ? शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि ‘भगवान स्वयं का अपमान सहन कर सकते हैं मगर अपने प्यारे तत्त्वस्वरूप संतों का नहीं ।’

व्यावसायिक हितों की चिंता

इन झूठे, शर्मनाक आरोपों के मूल में वे शक्तियाँ काम कर रही हैं, जो यह कतई नहीं चाहती हैं कि बापूजी की प्रेरणा से संचालित गुरुकुलों के असाधारण प्रतिभासम्पन्न विद्यार्थी आगे चलकर देश, संस्कृति व गुरुकुल का नाम रोशन करें । दुनिया जानती है कि भारतीय वैदिक गुरुकुल परम्परा पर आधारित शिक्षण एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के क्षेत्र में बापूजी के मार्गदर्शन में देशभर में चल रहे गुरुकुल आज कॉन्वेंट शिक्षण पद्धति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं । एक तरफ कई व्यावसायिक संस्थाओं की लूट इस पहाड़ के नीचे आ रही है तो दूसरी तरफ इंटरनेट और अश्लील साहित्य सामग्री के जरिये देश के भविष्य को चौपट करने की सुनियोजित साजिश पर पानी फिर रहा है । ओजस्वी-तेजस्वी भारत निर्माण के बापूजी के संकल्प को हजम कर पाना उन साजिशकर्ताओं के लिए अब काँटोंभरी राह साबित हो रहा है । ऐसे में गुरुकुलों की बढ़ती लोकप्रियता, विश्वसनीयता की छवि और मेधावी बच्चों की प्रतिभा को कुचलने के लिए अब कुछ इस तरह से कीचड़ उछाला जा रहा है कि माता-पिता अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजें ही नहीं ।

पहले गुरुकुल के बच्चों पर तांत्रिक विद्या का मनग‹ढंत आरोप लगाया गया परंतु जब सर्वोच्च न्यायालय में इन आरोपों की हवा निकल गयी तो अब सीधे बापूजी के चरित्र पर ही कीच‹ड उछालने लगे हैं । मगर सूर्य पर थूँकने का दुस्साहस करनेवाले खुद ही गंदे हो जाते हैं । जो समाज को मान-अपमान, qनदा-प्रशंसा और राग-द्वेष से ऊपर उठाकर समत्व में प्रतिष्ठित करते हुए समत्वयोग की यात्रा करवाते हैं, भला ऐसे संत के दुष्प्रचार की थोथी आँधी उनका क्या बिगा‹ड पायेगी ? टीआरपी के पीछे दौ‹डनेवाले चैनल बापू को क्या बदनाम कर पायेंगे ? बापू के भक्तों की हिमालय-सी दृ‹ढ श्रद्धा के आगे आरोप की बिसात एक तिनके के समान है ।

चाहे धरती फट जाय तो भी सम्भव नहीं

वैसे आज किसी पर भी कीच‹ड उछालना बहुत आसान है । पहले बापूजी के आश्रम के लिए जमीन ह‹डपने, अवैध कब्जे, गैर-कानूनी निर्माण के थोकबंद आरोप लगाये गये मगर सत्य की तराजू पर सभी झूठे, बेबुनियाद साबित हुए । जब इनसे काम नहीं बना तो बापूजी और उनके द्वारा संचालित आश्रम, समितियों और साधकों पर अत्याचार किये गये लेकिन भक्तों ने इनका डटकर मुकाबला किया । साजिश करनेवालों ने हर बार मुँह की खायी । कितने तो आज भी लोहे के चने चबा रहे हैं तो कितने कुदरत के न्याय के आगे खामोश हैं परंतु बावजूद इसके आज भी बापूजी के ऊपर अनाप-शनाप आरोप लगवानेवालों को अक्ल नहीं आयी । साजिशकर्ताओं के इशारे पर बकनेवाली एक ल‹डकी ने बापूजी पर जैसा आरोप लगाया है, दुनिया इधर-की-उधर हो जाय, धरती फट जाय तो भी ऐसा सम्भव नहीं हो सकता है । यह घिनौना आरोप भक्तों की श्रद्धा, साधकों की आस्था को डिगा नहीं सकता है ।

पूरा जीवन खुली किताब

बापूजी का पूरा जीवन खुली किताब की तरह है । उसका हर पन्ना और उस पर लिखी हर पंक्ति समाज का युग-युगांतर तक पथ-प्रदर्शन करती रहेगी । बापूजी कोई साधारण संत नहीं, वे असाधारण आत्मसाक्षात्कारी महापुरुष हैं ।

दरअसल सबसे ब‹डी समस्या यह है कि सारे आरोप हिन्दू संतों पर ही लगाये जाते हैं क्योंकि हिन्दू चुपचाप सब सह लेता है । दुनिया के और किसी धर्म में ऐसा होने पर क्या होता है यह किसीसे छुपा नहीं है । हमारी उदारता और सहिष्णुता का दुरुपयोग किया जाता है । तभी तो महापुरुषों को बदनाम करने का षड्यंत्र चलता ही रहा है, फिर चाहे कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी हों या फिर सत्य साँर्इं बाबा हों । आरोप लगानेवालों ने तो माता सीताजी व भगवान श्रीकृष्ण पर भी लांछन लगाया था । ऐसे में यह कल्पना कैसे की जा सकती है कि समाज को संगठित कर दिव्य भारतीय संस्कृति की विश्व-क्षितिज पर पताका लहरानेवाले विश्ववंदनीय संत पर आरोप न लगाये जायें ? संत तो स्वभाव से ही क्षमाशील होते हैं लेकिन उनके भक्त अपमान बर्दाश्त करनेवाले नहीं हैं । झूठ के खिलाफ सत्य की यह धधकती मशाल अन्याय और अत्याचार के अँधेरे को कुचलकर ही रहेगी ।

– श्री निलेश सोनी (वरिष्ठ पत्रकार)

प्रधान सम्पादक, ‘ओजस्वी है भारत !’

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Dirty politics (घिनौनी राजनीति)


Dirty politics (घिनौनी राजनीति)

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कितना घिनौना दुष्प्रचार ! कितनी घिनौनी राजनीति !

छिदवाड़ा गुरुकुल की सहेलियों को जाते-जाते आरोप लगानेवाली लड़की कहती गयी कि ‘‘अब देखना गुरुकुल का क्या होता है ! मैं अपना नाम करूँगी । गुरुकुल की जड़ उखाड़ के रख दूँगी । न होगा गुरुकुल, न मुझे आना प‹डेगा ।”

यह बात आरोप करनेवाली लड़की की सहेली ने अपने पिता को बतायी और अन्य लोगों तक पहुँची, हम तक भी पहुँची । छिदवाड़ा से शाहजहाँपुर १००० कि.मी. से अधिक व शाहजहाँपुर से जोधपुर १००० कि.मी. से अधिक, कुल २००० कि.मी. से अधिक अंतर हो जाता है । अब सोचो, इतने दूर से माँ-बाप के साथ लड़की को बुलाकर, माँ बाहर बरामदे में बैठी है, बाप भी वहीं है उस समय उसका मुँह दबाकर हाथ घुमाते रहे… क्या ऐसा सम्भव है ? ‘मैं चिल्लाती रही और माँ-बाप को भी नहीं सुनायी दिया ! पास में स्थित किसान के घर में रहनेवालों को भी सुनायी नहीं दिया !’ कैसी कपोलकल्पित कहानी है !

दुष्कर्म नहीं हुआ और यह बात लड़की स्वयं बोलती है, उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी बोलती है । मुँह दबाया हो ऐसी कहीं कोई खरोंच भी लैबोरेटरी रिपोर्ट में नहीं पायी गयी । फिर भी ‘दुष्कर्म है, दुष्कर्म है…’ – ऐसा मीडिया का दुष्प्रचार कितना घिनौना है ! राजनीति कितनी घिनौनी है ! साजिशकर्ताओं की, धर्मांतरणवालों की साजिश कितनी घिनौनी है ! कोई भी समझ सकता है आसानी से कि साजिश है, राजकारण है, मनग‹ढंत कहानी है । और पाँच दिन बाद न जोधपुर में न शाहजहाँपुर में, एफआईआर दर्ज की जाती है दिल्ली में रात को २-४५ बजे ! यह तथ्य तो साजिश की पोल ही खोल देता है । पुलिस पर ऊपर से दबाव ऐसा था कि उनको तो मानसिक दबाव देकर बापूजी से हस्ताक्षर ही कराने थे, वे उन्होंने करवा लिये । दो-दो, तीन-तीन दिन का जागरण और मानसिक दबाव… पुलिस के मनमाफिक लिखे हुए कागजों पर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा के लाखों-करो‹डों लोगों को सताने व उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया गया । इस घिनौनी साजिश से तो हृदय भी काँपता है, कलम भी काँपती है । आश्चर्य है ! आश्चर्य है !! आश्चर्य है !!!

सत्यवक्ताओं, ‘ऋषि प्रसाद’ के पाठकों को,साधकों को, और ashram.org के Viewers को  भगवान दृढ़ता दे और सुंदर, सुहावनी सूझबूझ दे । भारतीय संस्कृति को मिटानेवालों की संतों को बदनाम करने की मलिन मुरादें नाकाम हों । सभी संतों, प्रवक्ताओं और पाठकों को ईश्वर विशेष-विशेष आत्मबल, ओज अवश्य-अवश्य प्रदान करते हैं । ॐ ॐ ॐ… उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम – ये छः सद्गुण जहाँ, पद-पद पर प्रभु की प्रेरणा-सहायता वहाँ ! ॐ ॐ ॐ…

करोड़ो भक्तों को, जिन्होंने आँसू बहाये, जप किया, धरना दिया, धैर्य, शांति का परिचय दिया व कुप्रचार को सुप्रचार से काटने का यह भगीरथ कार्य किया और करते रहेंगे, उनको और उनके माता-पिता को धन्यवाद है ! धन्या माता पिता धन्यो…

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क्यों नजरंदाज किया गया महत्त्वपूर्ण गवाहों को ?


आरोप लगानेवाली लड़की ने जिस जगह की वह मनगढ़ंत घटना बतायी है, जोधपुर के मणई गाँव में स्थित उस कुटिया की देखभाल करनेवाले विष्णु ने एक इंटरव्यू में ऐसे कई तथ्य बताये जिनसे यह सिद्ध हो जाता है कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है ।

विष्णु : ‘‘आरोप लगानेवाली लड़की व उसका परिवार १६ अगस्त की सुबह को मणई से जोधपुर रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकले थे । मणई और रेलवे स्टेशन के बीच में तकरीबन ४ से ५ पुलिस स्टेशन पड़ते हैं तो वे लोग वहाँ पर भी एफआईआर दर्ज करा सकते थे । दिल्ली जाकर एफआईआर दर्ज कराने से एक नया सवाल खड़ा होता है ।

१६ अगस्त की सुबह को लड़की व उसके पिताजी हमारे घर आये, खाना खाया और लड़की अपने पिताजी के साथ एकदम हँस-मिल के बातचीत कर रही थी तथा खुशी से मेरे बेटे-बेटी को १००-१०० रुपये भी दिये, फिर मेरा चचेरा भाई उनको रेलवे स्टेशन तक छोड़कर आया ।“

गवाह विष्णु की इन तथ्यपूर्ण बातों से लड़की के मनगढ़ंत आरोपों की पोल खुल जाती है । परंतु आश्चर्य की बात तो यह है कि अधिकांश मीडिया ने इतने महत्त्वपूर्ण गवाह का इंटरव्यू समाज तक नहीं पहुँचाया । आखिर क्यों ?

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प्रीता शुक्ला: सत्य अवश्य सामने आयेगा


राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, लखनऊ

मैं १५ सालों से पूज्य बापूजी के सान्निध्य में आती रही हूँ । पूज्य बापूजी के मार्गदर्शन के बाद मेरा जीवन पूर्णतया परिवर्तित हो गया है । बापूजी हमेशा विपरीत परिस्थिति में भी मार्गदर्शक बनकर प्रोत्साहन देते रहे हैं । बापूजी की ही प्रेरणा का प्रभाव है कि मैं अनेक छात्र-छात्राओं को सही मार्ग पर चलना बता पायी हूँ । मैं इस बात की साक्षी हूँ कि पूज्य बापूजी द्वारा दिखलाये हुए मार्ग पर चलकर अनेक विद्यार्थी कुमार्ग से बच गये और उनके जीवन में उन्नतिकारक परिवर्तन हो गया । बापूजी ने विश्वमानव के कल्याण के लिए जो विश्वव्यापी दैवी कार्य किये हैं, उनकी गिनती नहीं हो सकती । जिन महापुरुष ने अपना सारा जीवन समाजोत्थान में लगा दिया, उन पर यह घटिया आरोप लगाया गया है । यह तथ्यहीन, सत्य से परे, बिल्कुल झूठा और बेबुनियाद है । पूज्य बापूजी निर्दोष हैं । सत्य अवश्य सामने आयेगा, ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है ।

– श्रीमती प्रीता शुक्ला, प्रधानाचार्य,

राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, लखनऊ

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देश-विदेश में गूँजी पुकार, बंद हो बापूजी पर अत्याचार


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विश्ववंदनीय पूज्य बापूजी को सुनियोजित षड्यंत्र के अंतर्गत फँसाकर जेल में डालने के खिलाफ देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं तथा श्री योग वेदांत सेवा समितियों, युवा सेवा संघों एवं महिला उत्थान मंडलों के साथ विभिन्न धार्मिक, सामाजिक व महिला संगठनों ने रैलियों, धरना-प्रदर्शनों आदि के द्वारा इस षड्यंत्र एवं दुष्प्रचार का शांतिपूर्ण जाहिर विरोध किया ।

भारत देश ही नहीं बल्कि विदेशों के लंदन, बोस्टन, न्यूयॉर्क आदि कई शहरों में भी षड्यंत्र के खिलाफ आवाज उठायी जा रही है । दिल्ली में २३ अगस्त को निकली विशाल रैली में लाखों लोग शामिल हुए और हजारों लोग जंतर-मंतर पर धरने में जा बैठे । निर्दोष पूज्य बापूजी की शीघ्र रिहाई के लिए लाखों महिलाओं एवं भाइयों ने जप-पाठ, हवन व प्रार्थना के साथ कई दिनों तक व्रत, उपवास भी रखा । ४, ५ व ११ सितम्बर को भी दिल्ली में विशाल शांति रैलियाँ निकालकर श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं कि एक लड़की की मनग‹ढंत बातें सच्ची या हम करोड़ों साधकों के पवित्र अनुभव सच्चे ?

दिल्ली में ११ व १२ सितम्बर को आयोजित ‘जन-सत्याग्रह व विशाल संत-सम्मेलन’ में देशभर से आये संतों एवं लाखों लोगों ने पूज्य बापूजी के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए इस षड्यंत्र की भारी निंदा की । जंतर-मंतर पर सतत विरोध-प्रदर्शन अभी भी जारी है । पंजाब में वहाँ के प्रसिद्ध संतों ने बापूजी पर लगे आरोपों तथा षड्यंत्र के विरोध में संत-सम्मेलन कर अपनी आवाज बुलंद की ।

१९ सितम्बर को मुंबई में भी श्री नारायण साँर्इंजी एवं विभिन्न संतों की उपस्थिति में बापूजी के समर्थन में महासम्मेलन हुआ । महाराष्टड्ढ में मुंबई के सायन व बांद्रा, औरंगाबाद, लातूर, अकोला, जलगाँव, खामगाँव जि. बुलढ़ाणा, नागपुर, नांदेड़, नासिक, भुसावल जि. जलगाँव, पुणे, बीड, चांदवड जि. नासिक, प्रकाशा, धुलिया, अमरावती, अहमदनगर, श्रीरामपुर जि. अहमदनगर, कल्याण, उल्हासनगर आदि स्थानों में शांति रैलियाँ निकालकर लाखों साधकों ने अपने दिल की गहरी व्यथा व्यक्त करते हुए सरकार से निर्दोष संत पूज्य बापूजी की रिहाई की माँग की । उस्मानाबाद में विभिन्न धार्मिक संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया ।

राजस्थान में बीकानेर, अलवर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर, निवाई जि. टोंक, पीपाड़ सिटी, पाली, भीलवाड़ा आदि तथा उत्तर प्रदेश में बलिया, मेरठ, हाथरस, जौनपुर, अलीगढ़, बरेली, बदायूँ, उझानी जि. बदायूँ, इगलास जि. अलीगढ़, गोरखपुर, झाँसी, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मुजफ्फरपुर (बिहार) आदि स्थानों पर शांति रैलियाँ, धरना-प्रदर्शन करके लोगों ने मीडिया के भ्रामक कुप्रचार का खंडन करते हुए बापूजी के खिलाफ चल रही साजिश का अंत करने की माँग की ।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर, रतलाम, उज्जैन, महू, छतरपुर, मुलताई जि. बैतूल, सबलगढ़ जि. मुरैना, शिवपुरी, पेटलावद जि. झाबुआ, टीकमगढ़ तथा छत्तीसगढ़ में राजनांदगाँव, कोरबा, रायगढ़, बेमेतरा, धमतरी, बिलासपुर, डोंगरगढ़ जि. राजनांदगाँव, दुर्ग आदि स्थानों पर रैली तथा विरोध-प्रदर्शन हुए । रायपुर में हजारों लोगों ने ८ सितम्बर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया हुआ है ।

बीदर, बीजापुर, गुलबर्गा, यादगीर, धारवाड़, बैंगलोर (कर्नाटक) तथा कठुआ, राजौरी (जम्मू-कश्मीर), बोकारो, राँची, गिरिडीह, जमशेदपुर, रामगढ़, गुमला, हजारीबाग (झारखंड), बाँका, दरभंगा, डालटनगंज (बिहार) में बड़ी संख्या में लोगों ने पूज्य बापूजी के विरुद्ध रची गयी साजिश के खिलाफ मौन रैलियाँ निकालकर विरोध जताया । पटना में ५ दिन तक धरना चला तथा बेलगाम (कर्नाटक) में २० से अधिक दिनों तक लगातार धरना चला । पठानकोट, लुधियाना, चंडीगढ़, शाहपुरकंडी जि. पठानकोट, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, मुकेरियाँ जि. होशियारपुर (पंजाब), भुवनेश्वर, झारसूगुड़ा, बरगड़ (ओड़िशा), फरीदाबाद, जींद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा), जहीराबाद जि. मेदक, निजामाबाद, हैदराबाद (आंध्र प्रदेश), नई टिहरी, हरिद्वार, काशीपुर, देहरादून (उत्तराखंड), कोलकाता आदि स्थानों पर शांति रैलियाँ व धरना-प्रदर्शन करके विरोध जताया गया । साथ ही देशभर में संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया ।

जंतर-मंतर, दिल्ली में ११ सितम्बर से प्रारम्भ हुआ ‘जन-सत्याग्रह’ सतत चालू है । यहाँ हजारों की संख्या में विभिन्न सम्प्रदायों व समाज के लोग पूरा दिन जप-पाठ, प्रार्थना करते हैं । २८ सितम्बर को जंतर-मंतर, दिल्ली में श्री सुरेशानंदजी व विभिन्न संतों की उपस्थिति में एवं चंडीगढ़ में श्री नारायण साँर्इंजी एवं विभिन्न संतों की उपस्थिति में पूज्य बापूजी के समर्थन में ‘जन-सत्याग्रह व विशाल संत-सम्मेलन’ का आयोजन हुआ । श्रीरामपुर, जि. अहमदनगर (महा.) में भी २८ सितम्बर को संत-सम्मेलन एवं जन-सत्याग्रह हुआ ।

पूज्य बापूजी पर हो रहे अन्याय-अत्याचार के विरोध में लाखों लोगों ने २९ सितम्बर को पूरे भारत में जगह-जगह विशाल मौन-रैलियाँ निकालीं । इस दिन उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, निवाई (राजस्थान), नासिक, सोलापुर, उल्हासनगर, नागपुर, भुसावल, मुंबई, आकोट, अमरावती, अकोला, अहमदनगर (महा.), लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जौनपुर (उ.प्र), खरगोन, भोपाल, सागर, दमोह (म.प्र.), रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगाँव, बिलासपुर, कवर्धा, कोरबा (छ.ग.), चंडीगढ़ (पंजाब), भुवनेश्वर, अनगुल (ओड़िशा), भावनगर, बड़ौदा, राजकोट, सिरोही (गुज.), हरिद्वार (उत्तराखंड), पटना (बिहार), बेलगाम, बीदर, बैंगलोर, बीजापुर (कर्नाटक), जमशेदपुर (झारखंड), जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (आं.प्र.), कोलकाता आदि अनेक स्थानों पर मौन-रैलियाँ निकालकर लोगों ने निर्दोष पूज्य बापूजी पर हो रहे अन्याय को बंद करने तथा उन्हें शीघ्र-से-शीघ्र रिहा करने की माँग की । ३० सितम्बर को जोधपुर में विभिन्न महिला संगठनों एवं हजारों साधक महिलाओं ने पूज्य बापूजी का समर्थन करते हुए संकीर्तन यात्रा निकाली ।

साजिशकर्ताओं और कुप्रचारकों को शर्म आनी चाहिए । न्यायपालिका और सरकार को अपने पद और सत्ता के दुरुपयोग से बचना चाहिए, सदुपयोग करना चाहिए । भगवान सबका मंगल करें, सबको सद्बुद्धि दें । हरि ॐ ॐ… हरि ॐ…

प्यारे सत्यनिष्ठ प्रवक्ता और पाठकों की भगवान मति-गति और बढ़ायें और मंगल हो उनका । देश-विदेश में रैली निकालनेवालों को ईश्वर ने खूब सूझबूझ दी । उन्होंने शांति बनाये रखी, सत्य का पक्ष लिया । सत्य के पक्ष के लिए जो कुछ सहा वह तुम्हारे अंतरात्मा और ईश्वर से छुपा नहीं है । साजिशकर्ताओं की पोल भी समाज के सज्जनों से छुपी नहीं है ।

देश-विदेश में कई भक्तों को पूज्य बापूजी के दर्शन और सत्संग का लाभ मिल रहा है । आश्चर्य को भी आश्चर्य हो । २७ सितम्बर को सागवाड़ा के गोरेश्वर महादेव पुल पर सात लोगों पर पूज्य बापूजी ने टॉर्च मारी, हालचाल पूछा, बातचीत की । वे व्यक्ति शिष्य होते तो आनंदित, आह्लादित होते लेकिन मनचले थे, भागे थाने । बोले : जोधपुर जेल से फरार बापू हमको मिले । और भी कई भक्तों, सज्जनों और संतों को बापूजी का दर्शन हो रहा है ।  इतने सारे सच्चे अनुभव हैं कि स्थानाभाव के कारण उनका यहाँ उल्लेख करना असम्भव है ।

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Swami Vivekanand – A character of journalism untrusted


स्वामी विवेकानंद – पत्रकारिता का चरित्र बना अविश्वसनीय

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समाज की श्रद्धा को संत ईश्वर से जोड़ते हैं । वे अपनी सुख-सुविधा की परवाह नहीं करते । वे कष्ट सहकर भी निरपेक्ष भाव से समाज तथा संस्कृति के उत्थान में स्वयं को लगा देते हैं । बहती-उफनती इस विचित्र संसार नदी पर वे स्वयं सेतु बन जाते हैं ताकि लोग पार हो जायें । परंतु संस्कृति-विरोधियों एवं विकृत मानसिकतावाले देश के गद्दारों को देश व समाज की उन्नति सहन नहीं होती । और जब उन्हें अपना उल्लू सीधा होते नहीं दिखता तो ऐसे लोग ही संत-महापुरुषों को बदनाम करने के षड्यंत्र रच लेते हैं । इसमें साथ निभाता है मीडिया का वह तबका जो बिकाऊ व देशद्रोही है । यह घटना ऐसे मीडिया की करतूतों को बेनकाब करती है :

स्वामी विवेकानंदजी द्वारा विदेशों में वैदिक सद्ज्ञान का डंका बजाये जाने से ईसाई मिशनरीवाले बौखला गये । उन्होंने अमेरिका, यूरोप आदि के अनेक समाचार पत्रों में विवेकानंदजी पर तरह-तरह के घृणित चारित्रिक आरोप लगाये और खूब कीचड़ उछाला पर विवेकानंदजी उससे जरा भी विचलित नहीं हुए । कुछ विदेशी कुप्रचारक समाचार पत्रों ने स्वामीजी की छवि बिगाड़ने के उद्देश्य से उनका इंटरव्यू भी लिया, जिससे उनकी दूषित मनोवृत्ति का परिचय मिलता है । ‘बोस्टन डेली एडवरटाइजर’ से एक पत्रकार ‘ब्लू बारबर’ उनका इंटरव्यू लेने आया । प्रस्तुत हैं कुछ अंश : (प्रश्नकर्ता आरोप लगाते हुए)

प्रश्न : आपके दुराचरण से परेशान होकर मिशीगन के पूर्व गवर्नर की पत्नी श्रीमती वागले ने अपनी नाबालिग नौकरानी को निकाल दिया । यह सब अखबारों में छपा है । आपको क्या कहना है ?

उत्तर : इसके लिए कृपया आप श्रीमती वागले से पूछें और उनकी बात पर विश्वास करें ।… और सोचने-समझने की यदि शक्ति हो, नीर-क्षीर विवेकी बनने की इच्छा हो तो उस नौकरानी से जाकर पूछें । थोड़ा परिश्रम तो करना प‹डेगा ।

प्रश्न : इस विषय में आपको कुछ नहीं कहना ?

उत्तर : नहीं ।

प्रश्न : श्री हेल ने अपनी पुत्रियों को आपसे मिलने से रोका है ? …क्यों ?

उत्तर : उनकी दोनों अविवाहित पुत्रियाँ यहाँ मेरे साथ बैठी हुई हैं ।… उनसे पूछकर देखिये – परंतु मेरे सम्मुख नहीं, अलग से ।

विवेकानंदजी ने कुछ रुककर कहा : ‘‘आप भाग्यशाली हैं । श्री वागले और उनकी नौकरानी, जिसे आपके अखबार ने विवश होकर ‘निकालना पड़ा’ ऐसा लिखा है, वे आ रही हैं ।’’

ब्लू बारबर सकपका गया । उसे ठंड में पसीने आ गये पर झेंप के कारण पसीना पोंछ नहीं सका ।

विवेकानंदजी ने कहा : ‘‘ब्लू बारबर ! कृपया आप अपना पसीना पोंछ लें । मुझे खेद है कि यहाँ पत्रकारिता का चरित्र अविश्वसनीय है । यह यहाँ के विकास के लिए अशुभ लक्षण है । मुझे और कुछ नहीं कहना है और जो कहा है, वह छपेगा भी नहीं ।’’

वे उठकर चल दिये । पत्रकार पसीना पोंछता रह गया । स्वामी विवेकानंदजी को आज सारी दुनिया जानती है परंतु लोगों को गुमराह करने का भयंकर अपराध करके अपने कुल-खानदान को भी कलंकित करनेवाले निंदक नष्ट-भ्रष्ट हो गये ।

वरिष्ठ पत्रकार श्री अरुण रामतीर्थकर कहते हैं : ‘‘पहले केवल प्रिंट मीडिया थी जो निर्दोष संतों को भी दोषी साबित करने में लगी रहती थी, परंतु वर्तमान में इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने तो सारी हदें पार कर दी हैं।

मिशनरियों के गुलाम बिकाऊ मीडिया को पूरे देश में क्या हो रहा है – इससे कोई मतलब नहीं है । आकाश छूती पेट्रोल आदि की कीमतें,

रुपये का अवमूल्यन,

आत्महत्या करते किसान आदि जनसाधारण के हितों से जुड़ी खबरों को प्रमुखता देना इनकी फित्रत में नहीं है, इन्हें तो बस कहीं से कोई भारतीय संस्कृति-विरोधी खबर मिल जाय, फिर चाहे वह झूठी अफवाह ही क्यों न हो, उसे ये अच्छे-से मसाला लगा के चटपटी खबर बनाकर करोड़ो देशवासियों को भ्रमित करने में देर नहीं करते ।“

सच्चाई तो यह है कि कुछ मीडिया के पक्षपाती, राष्ट्र-विघातक रवैये से भारत लोकतांत्रिक देश है या नहीं – यह सवाल हर नागरिक के मन में उठ रहा है । और क्यों न उठेगा, हम देख रहे हैं कि संत आशारामजी के समर्थन में पिछले ४०-४५ दिनों से सत्याग्रह करते करोड़ो देशवासियों की आवाज इनके कानों तक नहीं पहुँची लेकिन किराये के चार लोग अगर किसी संत के विरोध में दो नारे लगा दें तो दिनभर ‘ब्रेकिंग न्यूज’ चलाते रहेंगे । समाज, देश तथा विश्व का मंगल करनेवाले संतों को बदनाम कर उनके राष्ट्रहितकारी सेवाकार्यों में बाधा पैदा करना – यही इनका उद्देश्य हो गया है । अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए ये दिनभर अनर्गल कहानियाँ बना-बनाकर जनमानस विकृत करने का प्रयास करते हैं ।

मेरा मानना है कि ऐसे बिकाऊ मीडिया के षड्यंत्र से देश की रक्षा के लिए ‘सुदर्शन’ जैसे सच्चे, स्वदेशी, संस्कृतिप्रेमी चैनलों की जरूरत है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनियता बनी रहे । दूसरी जो भी चैनल सच  बता रही है उनको भी साधुवाद है । संत श्री आशारामजी बापू के बारेमे सच्ची खबरें जानने के लिये www.ashram.org, www.ashramnews.org   और  www.santbharatram.wordpress.com  पर देखिये |

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Dr. Subrahamaniyam Swami (प्रसिद्ध न्यायविद् डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी )


Dr. Subramanyam Swami

प्रसिद्ध न्यायविद् डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा सोशल मीडिया पर प्रचारित किये गये कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य
१) घेराबंदी से ग्रस्त हिन्दुओ ! झूठे आरोपों व कुप्रचार के माध्यम से तुम्हारे मार्गदर्शक व संत योजनाबद्ध रीति से समाप्त कर दिये जायेंगे । जब तक यह बात तुम्हारी समझ में आयेगी, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी । अतः सावधान !
२) धर्मांतरण कार्यों का प्रतिरोध करने में आशाराम बापू सबसे आगे हैं ।
३) हिन्दू-विरोधी एवं राष्टड्ढ-विरोधी ताकतों के गहरे षड्यंत्रों को और हिन्दू संतों को बदनाम करने के उनके गुप्त हथकंडों को सीधे व भोले-भाले हिन्दू नहीं देख पा रहे ।
४) पूर्व में काँची मठ के शंकराचार्यजी को हत्या के झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया एवं मीडिया ने भी उनको कातिल ही प्रचारित किया । जब उनको निर्दोष छो‹डा गया तो किसी मीडिया प्रतिष्ठान ने उन्हें कातिल कहने के लिए कोई क्षमायाचना नहीं की ।
५) साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक भी सबूत व बिना चार्जशीट के पिछले ६ वर्षों से जेल में प‹डी हैं केवल इसलिए कि वे हिन्दू साध्वी हैं ।
६) सबसे खराब बात यह है कि धर्म-निरपेक्ष-हीनभावना के शिकार अधिकांश हिन्दू जो भी मीडिया कहता है, उसे तुरंत सत्य मान लेते हैं । कोई सबूत नहीं, कोई जाँच नहीं, कोई दोषी सिद्ध करना नहीं – अचानक सभी लोग जज बन जाते हैं क्योंकि मीडिया और फिल्मों ने हमारे दिमागों में कूट-कूटकर भर रखा है कि अगर कोई हिन्दू संत है तो वह अवश्य ही भ्रष्ट और विकृत है ।

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