ईश्वर प्राप्ति

Shraddha ki pariskha (श्रद्धा की परीक्षा ) – Asaramji Bapu


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Shraddha ki pariskha (श्रद्धा की परीक्षा ) – Asaramji Bapu

श्रद्धा वह प्रकाश है जो आत्मा की, सत्य की प्राप्ति के लिए बनाये गए मार्ग को दिखावा रहता है। श्रद्धा की परीक्षा, जब भी मनुष्य एक क्षण के लिए लौकिक चमक-दमक, कामिनी और कंचन के लिये मोहग्रस्त होता है तो माता की तरह ठण्डे जल से मुँह धोकर जगा देने वाली शक्ति यह .. आसाराम बापूजी , श्रद्धा का अर्थ है–”सत्य में धारण करना”। ”श्रत्” अर्थात् सत्य, ”धा” अर्थात् ”धारण करना।” संसार की प्रत्येक वस्तु का विकास सत्य की तरफ है। अगर कहीं असत्य का प्राबल्य भी दीखता है तो सामयिक है, वह अपनी प्रतिक्रिया को उत्पन्न कर रहा होता है। सलिए सफलता तक पहुंचने के लिए बहुत जरूरी है पवित्र लक्ष्य के साथ जुड़ी अखंड श्रद्धा का होना। भारतीय जनमानस श्रद्धा प्रधान रहा है। श्रद्धावान व्यक्ति ही ज्ञान संपन्न और चरित्र संपन्न बनता है। श्रद्धा का अर्थ है सघन इच्छा अथवा … भक्त प्रह्लाद, स्वामी विवेकानंद , घाटवाले बाबा, निर्भयता, भजन , चमत्कार, तत्वज्ञान में हिलाने वाली बातें, ॐ

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Festival, Holi, Satsang

होली उत्सव के पीछे का रहस्य


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Bapuji ke vachan

ये होली उत्सव के पीछे ऋतू-परिवर्तन का रहस्य छुपा है..और विघ्न-बाधाओं को मिटाने की घटनाए भी छुपी है.. और बच्चों को ऋतू-परिवर्तन के समय जो रोग होते उन रोगों को मिटाने का भी इस उत्सव में बड़ा भारी रहस्य है..

रघु राजा ने ये रहस्य नारद जी से उजागर करवाया था..रघु राजा के राज्य में वसंत ऋतू में बच्चे बिमारी से घिर जाते..मन्दाग्नि हो जाती, खान-पान पचता नहीं था..कई बच्चे तो मौत के शिकार हो जाते..तो राजा का कर्तव्य है की प्रजा की तकलीफ राजा की है..कई उपाय खोजने के बाद भी रास्ता नहीं मिला तो देव ऋषि नारद जी से प्रार्थना किये की हमारे राज्य में बच्चों की तंदुरुस्ती लड़खडाने लगी है..कई बच्चे मौत के मुंह में चले गए…तो देव ऋषि नारद जी ने उपाय बताया की इन दिनों में ऐसा उत्सव मनाया जाय..तो उस के बाद बच्चो की अग्नि मंदता दूर हुयी, रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ी..बच्चे,किशोर युवान स्वस्थ रहेने लगे..

ये होली का उत्सव बहुत कुछ हमारे हीत का दे देता है..सूर्य के सीधे तीखे किरण पड़ते तो शरीर में सर्दियों में जमा कफ़ पिघलने लगता है..और जठरा में आ जाता है.. और जठरा मंद हो जाती है..पलाश के फूल मन्दाग्नि निवर्तक है..इसलिए पलाश के फूलों का रंग से, पलाश के पत्तल से, पलाश के दोने से कितने सारे फायदे होते है..राजस्थान में अभी भी ये प्रथा है..महाराष्ट्र में केले के पत्ते पर भोजन करते…इस से चांदी के बर्तन में भोजन करने का लाभ होता है, लेकिन पलाश पत्ते के पत्तल और दोने में भोजन करने से सोने के बर्तन करने का लाभ होता है….अभी तो कागज़ के प्लेटे आ गए..दोने आ गए..इन सब में वो लाभ नहीं होता, जो खाकरे(पलाश) के पत्तल और दोने से होता है..

अब खाकरे के दोने और पत्तल तुम कहा ढूंढ़ने जाओगे?..इसलिए खाकरे(पलाश) के सार स्वरुप केसुड़े के फूल का रंग बना कर तुम्हारे शरीर के रोम कुपो पर ऐसी असर पड़े की वर्ष भर आप की रोग प्रतिकारक शक्ति बनी रहे..खाकरा लीवर को भी मजबूत करता है..लीवर कमजोर होता उन को काविल(जौंडिस ) होता है..जो केसुड़े के फूलों का रंग लगाते उन को काविल(जौंडिस) नहीं होता…मन्दाग्नि भी नहीं होता..मन्दाग्नि के कारण कई बीमारियाँ भी होती है..

सुनामी ने कहर किया तो जापानी बेचारे तबाही के बिच झुंझ रहे है..जी करता है की मैं जा कर वहाँ सेवा करू…तन-मन-धन से जापानियों की सेवा का रास्ता हम खोज लेंगे…
नारायण हरी.. हरि ॐ हरि…

इन दिनों में:-

1)नंगे सीर धुप में कभी ना घुमे..

2)नीम के 25-से-40 पत्ते एक काली मिर्च के साथ चबा के खाए और पानी पिए… ये पित्त जन्य रोग और वायु जन्य रोग को विदाय देने की व्यवस्था है..

3) इन दिनों में बिना नमक का भोजन करने का आग्रह रखे..नमक नहीं छोड़ सकते तो कम कर दो..ये नमक से बचने के दिन है..एक महिना नमक कम कर दो..खड़े नमक से घर में पोता मारे तो घर की निगेटिव ऊर्जा चली जाती है..हफ्ते-15 दिन में ऐसा एक बार जरुर किया करे.
4)ऋतू परिवर्तन है तो ट्यूमर और ब्लोकेज जोर मारेगा..कई लोगो की रोग प्रतिकार शक्ति कमजोर होती तो रोग की संभावना बढ़ जाती है..तो घर के मुख्य द्वार पर नीम और आसोपाल के पत्ते का तोरण लगाना भी हीतकारी रहेगा..

सब से बड़ा हीतकारी है अभयदान ! अपने आत्मा का चिंतन करो..

कन्या-दान, गोदान, गोरस-दान, सुवर्ण दान, विद्या दान , भूमि दान, धन दान, अन्न दान आदि अष्ट-प्रकार के दान से भी अभयदान हजार गुना बड़ा है…अभयदान से पता चलता है की ये सुनामी आई, इस से हजार गुना बड़ी सुनामी आये फिर भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती..हम तो सत -चित-आनंद स्वरुप आत्मा है..शरीर को तो कितना भी संभालो सुनामी में नहीं गए तो और किसी ढंग से जानेवाले है.. मकान,शरीर और ये व्यवस्थाये तो देर-सवेर लड़खडाने वाली है..लेकिन इन सारी व्यवस्था के फायदा उठा के आप के सत-स्वभाव, चेतन स्वभाव और आप के आनंद स्वभाव का आप को साक्षात्कार हो जाए!इस से आप परम निर्भीक हो जाओगे!!
ये सूरज बरफ का गोला होकर धरती पर पड़ जाए और धरती उलटी होकर आकाश में उड़ने लगे ..अपन सब निचे गीर जाए तभी भी अपना कुछ नहीं बिगड़ेगा ये साक्षात्कार हो जाता है! 🙂
ये सूर्य जो है ना, ऐसे अरबो अरबो सूरज है एक आकाश गंगा में..इस सब में सब से छोटा सूरज है जो हम देख रहे…फिर भी ये सूरज पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है! सूर्य पे जाकर खड़े होके देखे तो पृथ्वी कितनी लगेगी?13 लाख-वा हिस्सा!! ज़रा-सा..ऐसी कई आकाश गंगा जिस से संचलीत होती है वो तुम्हारा अंतरात्मा चैत्यन्य से तुम्हारा शरीर संचालीत होता है..और वो ही अंतरात्मा की सत-ता, चेतन-ता सब के अन्दर है..

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