गौ सेवा - गाय की रक्षा - देश की रक्षा

बापू जी के श्री चित्र को १०८ परिक्रमा करती निवाई गौशाला की गौमाता

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गौ सेवा – गाय की रक्षा – देश की रक्षा

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ईन बट़नों पर Click करके 2 मिनिट में आप हजारों लोगों तक पू़ज्य संत श्री आशारामजी बापू का सत्य संदेश पहुँचा सकते है ।

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News Post India - First Page

News Post is weekly news paper. It says Sant Shri Asharamji Bapu is a real saint.

asaram bapuji

Asaram Bapuji ki Sachchai

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(श्रीरामचरितमानस, सुन्दरकांड)

Ram Navmi1

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम !

हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम ।

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ।।

 हनुमानजी ने मैनाक पर्वत को हाथों से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा – भाई ! श्रीरामचन्द्रजी का काम किये बिना मुझे विश्राम कहाँ?

श्री राम नवमी : ५ अप्रैल

तो जिस प्रकार श्री राम के कार्य को पूर्ण किये बिना हनुमान जी को विश्राम भाता नहीं, उसी तरह हम साधकों का भी यही दृड़ निश्चय होना चाहिए कि गुरुदेव हमें जिस परम लक्ष्य तक पंहुचाना चाहते हैं, हम उसे पाए बिना रुके नहीं और कहीं विश्राम के लिए रुके नहीं ! हनुमान जी के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेते हुए हमें भी इसी तरह नित-निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए !

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Festival

श्री राम नवमी

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“इन मल-मूत्र से भरे स्थानों के लिए मैं काम से अंधा हो रहा हूँ ! इन गंदे अंगों के पीछे मैं अपनी जिंदगी तबाह किये जा रहा हूँ !”

vemna, detachment, renunciation

Rishi Vemna

आंध्र प्रदेश में एक धनाढय सेठ का छोटा पुत्र वेमना माता-पिता की मृत्यु के बाद अपने भैया और भाभी की छत्रछाया में पला-बढ़ा। उसकी भाभी लक्ष्मी उसे माँ से भी ज्यादा स्नेह करती थी। वह जितने रूपये माँगता उतने उसे भाभी से मिल जाया करते। बड़ा भाई तो व्यापार में व्यस्त रहने लगा और छोटा भाई वेमना खुशामदखोरों के साथ घूमने लगा। उनके साथ भटकते-भटकते एक दिन वह वेश्या के द्वार तक पहुँच गया। वेश्या ने भी देखा कि ग्राहक मालदार है। उसने वेमना को अपने मोहपाश में फँसा लिया और कुकर्म के रास्ते चल पड़ा।

अभी वेमना की उम्र केवल 16-17 साल की ही थी। वेश्या जो-जो माँगें उसके आगे रखती, भाभी से पैसे लेकर वह उन्हें पूरी कर देता। एक बार उस वेश्या ने हीरे-मोतियों से जड़ा हार, चूड़ियाँ और अँगूठी माँगी।

वेमना उस वेश्या के मोहपाश में पूरी तरह बँध चुका था। उसने रात को भाभी के गहने उतार लिये। भाभी ने देख के अनदेखा कर दिया। कुछ दिनों बाद वेमना ने भाभी का मँगलसूत्र उतारने की कोशिश की, तब भाभी ने पूछाः “सच बता, तू क्या करता है ? पहले के गहने कहाँ गये ?” सच्चाई जानकर भाभी रो पड़ी। सोचने लगी कि ‘इतनी सी उम्र में ही यह अपना तेज बल सब नष्ट कर रहा है।’

किंतु भाभी कोई साधारण महिला नहीं थी, सत्संगी थी। उसने देवर को गलत रास्ते जाने से रोकने के लिए डाँट-फटकार की जगह विचार का सहारा लिया और देवर के जीवन में भी सदविचार आ जाय – ऐसा प्रयत्न किया। उसने एक शर्त रखकर वेमना को जेवर दियेः

“बेटा ! वह तो वेश्या ठहरी। तू जैसा कहेगा, वैसा ही करेगी। उसे कहना कि ‘तू नग्न होकर सिर नीचे करक और अपने घुटनों के बीच से हाथ निकालकर पीछे से ले, तब मैं तुझे गहने दूँगा।’ जब वह इस तरह तेरे से गहने लेने लगे तब तू काली माता का स्मरण करके उनसे प्रार्थना करना कि हे माँ ! मुझे विचार दो, भक्ति दो। मुझे कामविकार से बचाओ।”

दूसरे दिन वेमना की शर्त के अनुसार जब वेश्या गहने लेने लगी, तब वेमना ने माँ काली से सदबुद्धि के लिए प्रार्थना की। भाभी की शुभ भावना और माँ काली की कृपा से वेमना का विवेक जाग उठा कि ‘इन मल-मूत्र से भरे स्थानों के लिए मैं काम से अंधा हो रहा हूँ। इन गंदे अंगों पीछे मैं अपनी जिंदगी तबाह किये जा रहा हूँ….’ यह विचार आते ही वेमना तुरन्त गहने लेकर भाभी के पास आया और भाभी के चरणों में गिर पड़ा। भाभी ने वेमना का और भी मार्गदर्शन किया।

वेमना मध्यरात्रि में ही माँ काली के मंदिर में चला गया और सच्चे हृदय से प्रार्थना की। उसकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर माँ काली ने उसे योग की दीक्षा दे दी और माँ के बताये निर्देश के अनुसार वह लग गया योग-साधना में। उसकी सुषुप्त शक्तियाँ जागृत होने लगीं और कुछ सिद्धियाँ भी आ गयीं। अब वेमना वेमना न रहा, योगिराज वेमना होकर प्रसिद्ध हो गया। उनके सत्संग से ‘वेमना योगदर्शनम्’ और ‘वेमना तत्त्वज्ञानम्’ – ये दो पुस्तकें संकलित हुई। आज भी आंध्र प्रदेश के भक्त लोग इन पुस्तकों को पढ़कर योग और ज्ञान के रास्ते पर चलने की प्रेरणा पाते हैं।

कहाँ तो वेश्या के मोह में फँसने वाला वेमना और कहाँ करूणामयी भाभी ने सही रास्ते पर लाने का प्रयास किया, माँ काली से दीक्षा मिली, चला योग व ज्ञान के रास्ते पर और भगवदीय शक्तियाँ पा लीं, भगवत्साक्षात्कार कर लिया एवं कइयों को भगवान के रास्ते पर लगाया। कई व्यसनी-दुराचारियों के जीवन को तार दिया। जिससे वे संत वेमना होकर आज भी पूजे जा रहे

Satsang

भोगों से वैराग्य

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नेपाल: 168 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला 105 साल का बुजुर्ग

Sant Asharamji Bapu

नेपाल भूकंप दुर्घटना में चमत्कार नेपाल भूकंप दुर्घटना में चमत्कार

नेपाल में आए विनाशकारी भूकम्प के बाद चमत्कार की कई घटनाएं सामने आई हैं. ताजा मामला है 105 साल के बुजुर्ग का, जिन्हें 168 घंटों तक मलबे में दबे रहने के बाद भी जिंदा निकाला गया है.

नेपाल भूकंप: 120 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकाला गया युवक

रविवार को राहत और बचाव कार्य के दौरान नुवाकोट के किमतांग गांव में स्थानीय पुलिस और लोगों ने मिलकर एक घर के मलबे से 105 साल के फंचु घले को बाहर निकाला, तो वो जिंदा पाए गए.

22 घंटे मलबे में फंसे रहने के बाद 4 महीने का बच्चा निकला जिंदा

वैसे तो लोगों ने आस ही छोड़ दी थी कि इतनी भयानक त्रासदी के बाद भी इतने वृद्ध जिंदा होंगे. लेकिन जब लोगों ने उन्हें निकाला, तो वे न सिर्फ जीवित थे, बल्कि पूरी तरह तंदुरुस्त भी थे.

फंचु घले को नेपाली सेना के हेलीकप्टर से…

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Mangalmay Channel

नेपाल: 168 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला 105 साल का बुजुर्ग

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Celebration of Parents’ Worship Day @ ‪#‎Isanpur‬‪#‎Hyderabad‬, @ @‪#‎Mukund‬ Vihar, ‪#‎Karawal‬ Nagar – ‪#‎Delhi‬, @ ‪#‎Vadodara‬‪#‎Gujarat‬, @‪#‎Muzaffarnagar‬‪#‎Uttar‬ Pradesh, Bhandara by Yuva Sewa Sangh@‪#‎Rajpura‬‪#‎Punjab‬, Divine Satsang by Shri Ramabhai@ ‪#‎Tohana‬ – Haryana, by Sadhvi Rekha Bahan@ ‪#‎Lunawada‬ – #Gujarat.

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Matri-pitri pujan

Matri-pitri pujan

Celebration of Parents’ Worship Day in the Shanti Memorial School, Mukund Vihar – To view more pictures of this event, click here:

Parent's Worship Day

Celebration of Parents’ Worship Day by Bapuji’s Sadhaks

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